[Deewan] telephonebooth

girindranath jha gnj_chanka at rediffmail.com
Mon Jun 12 12:12:24 IST 2006


  
टेलिफोन बुथों की स्थिती वजीरपुर में-
प्रवासियों का à¤
ड्डा,खासकर बिहार से आए प्रवासियों का.दरà¤
सल ये लोग यहाँ के फैक्ट्रीयों में मजदुरी करते हैं. कुछ तो परिवार के संग रहते हैं....और कुछ à¤
केले..वजीरपुर के जेजे कालोनी मे इनकी आबादी देखकर आपको बिहार के उन गाँवों की तस्वीर साफ झलकने लगेगी जहाँ आप एक दफे भी गए हों...
बोली-बानगी ठेठ वहीं की. भोझपुरी, मगही , मैथली भाषाऔं....से आप यहाँ रु-ब-रु हो सकते हैं.इस कमाउ शहर दिल्ली की यहाँ तस्वीर बहुत कुछ आपको समझ मे आ जाएगी...किस प्रकार दिल्ली  हर एक को à¤
पने आँचल मे पनाह देती है.
यहाँ के à¤
धिकतर बुथों को ये प्रवासी हीं चला रहे हैं.टाटा, रिलायंस के फिक्सड वायरलेस सेट वाले बुथ यहाँ ज्यादा है.जैसा कि रमेश कहता है-"इ सेट आराम से मिल जाता है..कोनो सरकारी झंझट नाहि... "
इन बुथों पर बातें जो होती है वो à¤
धिकतर एसटीडी हीं.लोग à¤
पने गाँव्-घर बात करते हैं.लोकल होती है(ऐसी बात नहीं है कि लोकल नहीं होती है)श्यामलाल बताता है" मोबाईल से लोकल बतिया लेते हैं...."
एक बात जो मुझे यहाँ पता चला कि "पोस्टकार्ड आधारित संपर्क-सूत्र' का किस प्रकार ये बुथ उनका शासन खत्म किए..मधेपुरा बिहार का इकबाल खाँ कहता है-"पहले मनीआडर्र करने के बाद भी एक ठो पोस्ट्कार्ड भेझना पङता था...कि मनीआडर्र भेझ रहे हैं...लेकिन जब से गाम में चाचा का बुथ खुलल है..एक बार फोन कर देते हैं तो à¤
ब्बजान पोस्टमास्टर साब से पुछते रहत हैं कि मनीआडर्र कब तक आबेगा.
ये सब आखिर हमारी तकनीकि सफलता का ग्रामीण स्तर तक पहुँच का प्रमाण है.
à¤
ब इकबाल के à¤
ब्बा जान ये ना कहेगें कि-
"चिट्ठी न कोई  संदेश जाने वो कौन सा देश् 
 जहाँ तुम चले गए.................."
गिरीन्द्र
(वहाँ के फोटो को मे à¤
पने ब्लाल पर पोस्ट कर दुगां)   
-------------- next part --------------
An HTML attachment was scrubbed...
URL: http://mail.sarai.net/pipermail/deewan/attachments/20060612/e7603b91/attachment.html 


More information about the Deewan mailing list