[Deewan] unicode par lekh
Ravikant
ravikant at sarai.net
Wed Sep 13 15:10:39 IST 2006
dosto,
unicode ke baare mein jaankaari deta lekh jo main Sahara Samay, 9 Sitambar
2006 se saabhar le raha hoon aur chandan ji ko sadhanyavaad bhi. is lekh mein
sirf ek baat ghalat hai ki unicode ke liye aapko high-end hardware chahiye.
baharhaal ise aur logon ko dein, forward karein circulate karein.
shukriya
ravikant
युनिकोड
एक कंप्युटर कई भाषाएं
बालेंदु दाधीच
सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास और सुधार की निरंतर प्रक्रिया
चलती रहती है और इसी संदर्भ में पिछले कुछ वर्षों से सूचनाओं के भंडारण
की एक आधुनिकतम पद्धति लोकप्रिय हो रही है जिसे युनिकोड कहते हैं।
युनिकोड के माध्यम से पहली बार सूचना प्रौद्योगिकी पर अंग्रेज़ी की
अनिवार्य निर्भरता से मुक्ति की संभावनाएं दिख रही हैं क्योंकि यह पद्धति
एक आम कम्प्यूटर को विश्व की सभी भाषाओं में काम करने में सक्षम बना सकती
है। ज़ाहिर है, आईटी क्षेत्र में भारतीय भाषाओं को विकसित होते देखने की
आकांक्षा रखने वाले लोग युनिकोड में छिपी संभावनाओं को देखकर उत्साहित
हैं क्योंकि कई दशकों बाद अब हम बिना अंग्रेज़ी हैं। मीडिया में कंप्युटर
की क्षमताओं का प्रयोग करने की स्थिति में आ रहे हैं। मीडिया में
कंप्युटर टेक्नालॉजी की असंदिग्ध रूप से महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए
कहा जा सकता है कि मीडिया भी आने वाले वर्षों में इस काल-विभाजक परिघटना
से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता।
हालांकि युनिकोड है तो सिर्फ़ डेटा के स्टोरेज संबंधी एकोडिंग मानक,
लेकिन इसके प्रयोग से कंप्यूटरों की कार्यप्रणाली और उनके इस्तेमाल के
तौर-तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है क्योंकि डेटा ही कंप्युटरों
के संचालन का केंद्र बिंदु है। भले ही हम कंप्यूटर का किसी भी काम के लिए
प्रयोग करें, मसलन लेखन कार्य के लिए, ध्वनि रिकार्डिंग या फिर वीडियो
प्रोसेसिंग के लिए, हमें इसके लिए कंप्यूटर को या तो कुछ सूचनाएं देनी
पड़ती है (जैसे टाइपिंग के माध्यम से रिकॉर्डिंग के ज़रिए) या फिर हम कुछ
सूचनाएं कंप्यूटर से ग्रहण करते हैं (मसलन पहले रिकार्डेड वीडियो को
देखना या पहले से मौजूद फाइलों को खोलना)। इन्हें क्रमश: इनपुट और आउटपुट
के रूप में जाना जाता है। इन दोनों प्रक्रियाओं में जिन सूचनाओं (डेटा)
का प्रयोग होता है, उन्हें कंप्यूटर पर अंकों के रूप में स्टोर किया जाता
है क्योंकि वह सिर्फ़ अंकों की भाषा जानता है, और वह भी सिर्फ़ दो अंको-
'शून्य' तथा 'एक' की भाषा। इन दो अंकों का भिन्न-भिन्न ढंग से पारस्परिक
बाइनरी संयोजन कर अलग-अलग डेटा को कंप्युटर पर रखा जा सकता है। मिसाल के
तौर पर 01000001 का अर्थ है। अंग्रेज़ी का कैपिटल ए अक्षर और 00110001 से
तात्पर्य है 1 का अंक।
अक्षरों या पाठ्य सामग्री और कंप्युटर पर स्टोर किए जाने वाले बाइनरी
डिजिट्स के बीच तालमेल बिठाने वाली प्रणाली को एनकोडिंग टेबल के माध्यम
से कंप्युटर यह तय करता है कि फलां बाइनरी कोड को फलां अक्षर या अंक के
रूप में स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाए। किस एनकोडिंग में कितने बाइनरी
अंक प्रयुक्त होते हैं, इसी पर उसकी क्षमता और नामकरण निर्भर होते हैं।
उदाहरण के तौर पर अब तक लोकप्रिय एस्की एनकोडिंग को 7 बिट एनकोडिंग कहा
जाता है क्योंकि इसमें हर संकेत या सूचना के भंडारण के लिए ऐसे सात
बाइनरी डिजिट्स का प्रयोग होता है। एस्की एनकोडिंग के तहत इस तरह के 128
अलग-अलग संयोजन संभव हैं यानी इस एनकोडिंग का प्रयोग करने वाला कंप्युटर
128 अलग-अलग अक्षरों या संकेतों को समझ सकता है। अब तक कंप्युटर इसी सीमा
में बंधे हुए थे और इसीलिए भाषाओं के प्रयोग के लिए उन भाषाओं के फोंट तक
सीमित थे जो इन संकेतों को कंप्यूटर स्क्रीन पर अलग-अलग ढंग से प्रदर्शित
करते हैं। यदि अंग्रेज़ी का फोंट इस्तेमाल करें तो 01000001 संकेत को ए
अक्षर के रूप में दिखाया जाएगा। लेकिन यदि हिन्दी फोंट का प्रयोग करें तो
यही संकेत ग, म या च अक्षर के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा।
युनिकोड एक 16 बाइट की एनकोडिंग व्यवस्था है, यानी इसमें हर संकेत को
संग्रह और अभिव्यक्त करने के लिए सोलह बाइनरी डिजिट्स का इस्तेमाल होता
है। इसीलिए इसमें 65536 अद्धितीय संयोजन संभव हैं। इसी वजह से युनिकोड
हमारे कंप्युटर में सहेजे गए डेटा को फोंट की सीमाओं से बाहर निकाल देता
है। इस एनकोडिंग में किसी भी अक्षर, अंक या संकेत को सोलह अंकों के
अद्धितीय संयोजन के रूप में सहेज कर रखा जा सकता है चूंकि किसी एक भाषा
में इतने सारे अद्धितीय अक्षर मौजूद नहीं हैं इसीलिए इस स्टैंडर्ड (मानक)
में विश्व की सारी भाषाओं को शामिल कर लिया गया है। हरभाषा को इन
65536संयोजनों में से उसकी वर्णमाला संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार स्थान
दिया गया है। इस व्यवस्था में सभी भाषाएं समान दर्ज़ा रखती है और सहजीवी
हैं। यानी युनिकोड आधारित कंपयूटर पहले से ही विश्व की हर भाषा से परिचित
है। भले ही वह हिन्दी हो या पंजाबी, या फिर उड़िया। इतना ही नहीं, वह उन
प्राचीन भाषाओं से भी परिचित है जो अब बोलचाल में इस्तेमाल नहीं होतीं,
जैसे कि पाली या प्राकृत। और उन भाषाओं से भी जो संकेतों के रूप में
इस्तेमाल होती हैं, जैसे कि गणितीय या वैज्ञानिक संकेत।
युनिकोड के प्रयोग से सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि एक कंप्युटर पर दर्ज़
किया गया पाठ (टेक्स्ट) विश्व के किसी भी अन्य युनिकोड आधारित कंप्युटर
पर खोला जा सकता है। इसके लिए अलग से उस भाषा के फोंट का इस्तेमाल करने
की अनिवार्यता नहीं है क्योंकि युनिकोड केंद्रित हर फोंट में सिद्धांतत:
विश्व की हर भाषा के अक्षर मौजूद हैं। कंप्युटर में पहले से मौजूद इस
क्षमता को सिर्फ़ एक्टीवेट (सक्रीय) करने की ज़रूरत है जो विंडोज़
एक्सीपी, विंडोज़ 2000, विंडोज़ 2003, विंडोज़ विस्ता, मैक एक्स 10, रेड
हैट लिनक्स, उबन्तु लिनक्स आदि ऑपरेटिंग सिस्टम के ज़रिए की जाती है।
विश्व भाषाओं की यह उपलब्धता सिर्फ़ देखने या पढ़ने तक ही सीमित नहीं है।
हिन्दी जानने वाला व्यक्ति युनिकोड आधारित किसी भी कंप्यूटर में टाइप कर
सकता है, भले ही वह विश्व के किसी भी कोने में क्यों न हो। सिर्फ़ हिन्दी
ही क्यों, एक ही फाइल में, एक ही फोंट का इस्तेमाल करते हुए आप विश्व की
किसी भी भाषा में लिख सकते हैं। इस प्रक्रिया अंग्रेज़ी कहीं आड़े नहीं
आती। विश्व भर में चल रही भूमंडलीकरण की प्रक्रिया में सूचना
प्रौद्योगिकी का यह अपना अलग ढंग का योगदान है।
युनिकोड आधारित कंप्यूटरों में हर काम किसी भी भारतीय भाषा में किया जा
सकता है, बशर्ते ऑपरेटिंग सिस्टम या कंप्युटर पर इन्स्टॉल किए गए
सॉफ्टवेयर युनिकोड व्यवस्था का पालन करें। मिसाल के तौर पर माइक्रोसॉफ्ट
के आफिस संस्करण, सन माइक्रोसिस्टम्स के स्टार आफिस या फिर ओपनसोर्स पर
आधारित ओपनआफिस.ऑर्ग जैसे सॉफ्टवेयरों में आप शब्द संसाधक (वर्ड
प्रोसेसर), तालिका आधारित सॉफ्टवेयर (स्प्रेडशीट), प्रस्तुति संबंधी
साफ्टवेयर (पावर-प्वाइंट आदि) तक में हिन्दी और अन्य भाषाओं का बिल्कुल
उसी तरह प्रयोग कर सकते हैं जैसे अब तक अंग्रेज़ी में किया करते थे। यानी
न सिर्फ़ टाइपिंग बल्कि सॉर्टिंग, इंडेक्सिंग, सर्च, मेल मर्ज़,
हेडर-फुटर, फुटनोट्स, टिप्पणियां (कमेंट) आदि सब कुछ।
कंप्यूटर पर फाइलों के नाम लिखने के लिए भी अब अंग्रेज़ी की ज़रूरत नहीं
रह गई है। यदि आप अपनी फाइल का नाम हिन्दी में 'मेरीफाइल.डॉक' भी रखना
चाहें तो इसमें कोई अड़चन नहीं है। इंटरनेट पर भी अब युनिकोड का मानक खूब
लोकप्रिय हो रहा है और धीरे-धीरे लोग पुरानी एनकोडिंग व्यवस्था की सीमाओं
से निकल कर युनिकोड अपनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। गूगल, विकिपीडिया,
एमएसएन आदि इसके उदाहरण है जिनमें हिन्दी में काम करना उसी तरह संभव है
जैसे अंग्रेज़ी में। युनिकोड आधारित भारतीय भाषाओं की वेबसाइटों की विषय
वस्तु (कॉन्टेंट) सर्च इंजनों द्वारा भी सहेजी जाती है यानी विश्व स्तर
पर उनकी उपस्थिति और दायरा बढ़ता है। फिलहाल सर्च इंजनों पर हिन्दी और
अन्य भारतीय भाषाओं की वेबसाइटों की स्थिति दयनीय है क्योंकि हर वेबसाइट
में अलग-अलग फोंट का इस्तेमाल होने के कारण सर्च इंजनों के लिए उनकी
विषय वस्तु को समझना संभव नहीं है। युनिकोड के प्रयोग से यही काम उनके
लिए बहुत आसान हो जाता है।
युनिकोड आधारित वेबसाइटों या पोर्टलों को देखने के लिए पाठक के पास
संबंधित फोंट होने की अनिवार्यता नहीं है। अगर कोई वेबसाइट युनिकोड में
है तो उसे विश्व में किसी भी स्थान पर फोंट डाउनलोड किए बिना न सिर्फ़
देखा जा सकता है बल्कि उसके लेखों को अपने कंप्युटर पर सहेजा भी जा सकता
है। डाइनामिक फोंट नामक टक्नोलॉजी के ज़रिए यह सुविधा सीमित अर्थों में
पहले भी थी लेकिन कंप्यूटर पर सहेजे गए लेख तभी पढ़े जा सकते थे यदि
कंप्युटर में संबंधित फोंट मौजूद हों। पर अब यह सीमा नहीं रही।
कंप्यूटर अब अंग्रेजी का मोहताज नहीं रहा और इसीलिए युनिकोड ने उसकी
सम्पूर्ण कार्यप्रणाली बदल दी है। डेटा के भंडारण के साथ-साथ उसकी
प्रोसेसिंग और प्रस्तुति के तरीके भी बदल गए हैं। चूंकि युनिकोड सोलह बाइट
की एनकोडिंग व्ववस्था है और विश्व के अधिकांश सॉफ्टवेयर पुरानी एनकोडिंग
व्ववस्था को ध्यान में रखते हुए विकसित किए गए थे इसलिए ऐसे सॉफ्टवेयर
युनिकोड टेक्स्ट को समझ नहीं पाते। नतीजन विश्व भर में सॉफ्टवेयरों को
युनिकोड समर्थनयुक्त बनाने की प्रक्रिया चल रही है। किसी कंप्यूटर
आवश्यकता है ताज़ातरीन विन्डोज़, लिनक्स या मैक ऑपरेटिंग सिस्टम का
प्रयोग। चूँकि इन ऑपरेटिंग सिस्टम के संसाधनों की अपनी ज़रूरतें हैं
इसलिए इस बात की काफ़ी संभावना है कि संबंधित कंप्यूटर कम से कम
पेंटियम-4,2 गीगाहर्ट्ज़ श्रेणी का हो और इन्हीं कारणों से युनिकोड की ओर
प्रस्थान करने में कुछ आवश्यक बिंदुओं पर विचार करने की आवश्यकता पड़
सकती है।
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