[दीवान] Fwd: fifth post covering 1968-1977

Ravikant ravikant at sarai.net
Sat Aug 25 14:21:08 IST 2007


आलोक जी,

माफ़ कीजिएगा, मैंने समझा कि ये पोस्ट मुझ तक दीवान के ज़रिए ही आई थी.

रविकान्त

----------  आगे भेजे गए संदेश  ----------

Subject: fifth post covering 1968-1977
Date: शुक्रवार 17 अगस्त 2007 19:22
From: "alok puranik" <puranika at gmail.com>
To: ravikant at sarai.net, vivek at sarai.net
Cc: alokpuranik at yahoo.com

*पांचवी पोस्ट-1968-1977 की अवधि*



*कमोबेश** वैसे ही भाव *

*1947 से 1968 करीब इक्कीस साल बाद का बाजार रिपोर्टिंग का सीन देखें, तो
साफहोता है। बाजार रिपोर्टिंग के
हाव-भाव बदले नहीं थे। देखिये-*



*हिन्दुस्तान 25 जून, 1968, पेज नौ, दो कालम *

*बम्बई शेयर*

*कटान और समर्थन के अभाव में प्रमुख शेयर नीचे*

*(हमारे बम्बई कार्यालय द्वारा)*

*बम्बई 24  जून। शेयर आज खामोश खुले और तेजड़ियों की कटान तथा नए समर्थन के
अभाव में गिकर*

*स्टील** शेयर खामोश बंद हुए। नई खरीदारी का अभाव था।......*

*नकद** समूह स्थिर था। चुने हुये शेयरों में खरीदारी हुई। विविध समूह में ग्वा.
रेयन, ने. रेयन, वोल्टास, सिंधिया और अन्य शेयरों में कटान हुई। ....*

*कटान, खामोशी............वही सब था। *

*बल्कि इसके बाद भी यही सब था। साल गये। दशक गये, पर यह कटान नहीं गयी। यह
खामोशी नहीं गयी। *



*तस्करी की खुली रिपोर्ट*

*उस दौर में तस्करी की खुली रिपोर्ट सामान्य थी। मतलब तस्करी का क्या असर भावों
पर है, इस बात को बताया जाता था। देखें-*

*हिन्दुस्तान 25 जून, 1968, पेज नौ, दो कालम*

*दिल्ली सराफा*

*आवक बढ़ने से सोने और चांदी दोनों के भाव गिरे*

*(हमारे व्यापार संवाददाता द्वारा)*

*दिल्ली 24 जून। प्रारम्भिक तेजी के पश्चात् सोने व चांदी के भाव आवक
बढ़ने सेटूट गए।
*

*बम्बई के सुधऱते समाचारों से चांदी तेजाबी प्रारंभ में रु. 3.25 बढ़कर  खुली
थी लेकिन बाद में बिहार, उत्तर प्रदेश व पंजाब में आवक बढ़ने के कारण इसके भाव
पूर्व स्तर से भी नीचे आ गए। चाँदी का सिक्का भी इसकी सहानुभूति में लुढ़क गया।
आज लगभग 30 सिल्ली चांदी का माल आया जबकि उठाव 15 सिल्ली के आसपास था। *

*      बम्बई में कस्टम अधिकारियों की सख्ती से माल कम बनने के कारण नकली
गिन्नी एक रुपया सुधरती सुनी गई। शुद्ध सोना निजी कारोबार में पहले तो रु. 163
के बजाए रु. 164 हो गया लेकिन बाद में बम्बई से 2000 तोले सोने की तस्करी
आवक  होने
से इसके भाव गिरते सुने गए। *

*...............*

*कस्टम अधिकारी अगर सख्ती कर देते  थे, तो भाव सुधर जाते थे। सख्त से तस्करी
में कमी होती थी। तस्करी में कमी से सप्लाई या आवक में कमी होती थी, सो भाव
सुधर जाते थे या बढ़ जाते थे। तस्करी आवक बढ़ती थी तो भाव गिर जाते थे। तस्करी
तंत्र पर सोने के भाव बहुत हद तक निर्भर थे। और बाजार रिपोर्टिंग में इस तथ्य
को ध्यान में रखा जाता था।  एक और नमूना देखें- *



*हिन्दुस्तान, 19 दिसम्बर 1969 पेज नंबर सात दो कालम*

*दिल्ली सराफा*

*तस्करी मांग से चांदी में सुधार *:* सोना व नकली गिन्नी नरम*

*(हमारे व्यापार संवाददाता द्वारा)*

*दिल्ली 18 दिसम्बर। बम्बई में तस्करों की मांग बढ़ने की चर्चा से चांदी
के भाव6 रुपए सुधर गए।
शुद्ध सोना इसके विपरीत घटता सुना जा रहा था। *

*यद्यपि** लंदन व न्यूयार्क में चांदी के भाव नरम चलने के समाचार थ, लेकिन
बम्बई में तस्करों द्वारा हाजिर चीनी की खरीद किये जाने की चर्चा से चादीं
साप्ताहिक डिलीवरी में 6 रुपए व तेजाबी में 7 रुपए प्रति किलो की वृद्धि हुई
है। सुना गया है कि बम्बई के एक प्रमुख तस्कर ने लगभग 250 सिल्ली चाँदी के सौदे
किये हैं। चाँदी के समर्थन में सिक्का भी 6 रुपए बढ़ गया। *

*पंजाब में पुलिस वालों की गतिविधि बढ़ जाने तथा तस्करों की बिकवाली से शुद्ध
सोना एक रुपये घटते सुना गया। नकली गिन्नी सोना व जेवरों के मूल्य भी मांग
कमजोर होने से नीचे उतर आए। *

*पुलिस की सख्ती, तस्करों की बिकवाली को बाजार रिपोर्टिंग में इंगित किया जाता
था। बल्कि यह तक साफ बता दिया जाता था कि बम्बई के एक प्रमुख तस्कर ने लगभग 250
सिल्ली चांदी के सौदे किये हैं। *

*हालांकि रिपोर्ट की भाषा है-सुना गया है कि बम्बई के एक प्रमुख तस्कर ने
लगभग............। *

* गौर की बात यह है कि बाजार रिपोर्टिंग करने वालों के ना सिर्फ तस्करों की
जानकारी होती थी, बल्कि प्रमुख तस्कर, और इसके नीचे के स्तर के तस्करों की
गतिविधियों के असर को अलग करके देखा जाता था। तस्करी का खासा असर बाजार
रिपोर्टिंग में देखा गया। सिर्फ भारतीय तस्करों का असर ही नहीं, बल्कि
पाकिस्तान के तस्करों की आपूर्ति और मांग के असर को भी बाजार रिपोर्टिंग में
रेखांकित किया जाता था। *

*मेवे भी डरते थे राष्ट्रीयकरण से *

*एक** नमूना देखें-*

*हिन्दुस्तान 17 नवंबर, 1971, पेज नंबर सात तीन कालम का शीर्षक, दो कालम की खबर
*

*दिल्ली की मंडियां*

*मेवों का कारोबार राष्ट्रीयकरण चर्चा से ठप्प *:* छो. इलायची टूटी*

* (हमारे संवाददाता द्वारा)*

*दिल्ली, 16 नवम्बर। मेवों के आयात व्यापार का शीघ्र ही राष्ट्रीयकरण होने की
चर्चा से आज बाजार में घबराहट फैल गई तथा कारोबार ठप्प हो गया।  छोटी इलायची
100  से 200 रु. टूट गई जबकि कत्था  15 रु.  प्रति  पेटी बढ़ गया। तेलों में
कारोबार कमजोर था तथा वनस्पति का उठाव भी घट गया था। मोठ, अरहर, काबली चना आदि
में मंदा जारी रहा। देसी घी के भाव 35 से 40 रु. घटाकर बोले गये। *

*आज मेवों में घबराहट के कारण कोई कारोबार नहीं हुआ। पता चला है कि भारत
सरकारमेवों के आयात
व्यापार का राष्ट्रीयकरण करने की सोच रही है तथा शीघ्र ही इस संबंध में सरकारी
निर्णय की घोषणा होने वाली है।  गोले में 10 से 15 रु. का मंदा आया। टिपटुर
मंडी से 800 बोरी माल आ  गया था। *

*किराना बाजार में छोटी इलायची , बम्बई, अमृतसर, आगरा, कानपुर आदि मंडियों के
मंदे समाचारों से 100 से 200 रु. और लुढ़क गई। एक हजार छोटी इलायची का स्टाक
जमा हो गया  था। पाकिस्तानी तस्करों की मांग भी कमजोर थी। काली मिर्च भी 5 से
10 रु. लुढ़क गई। ....*

*मेवों के आयात निर्यात के राष्ट्रीयकरण की  चर्चा से बाजार घबरा जाता था। छोटी
इलायची टूट जाती थी। मोठ, अरहर, काबली चना में भी मंदा आ जाता था। पाकिस्तानों
तस्करों की मांग कम रहती थी, तो इसका असर छोटी इलायची पर पड़ता था।*

*उस दौर में राष्ट्रीयकरण, समाजवाद की चर्चा का असर शेयर बाजार पर तो पड़ता ही
था। पर बाकी बाजार भी इस असर से अछूते नहीं रहते थे। राष्ट्रीयकरण का बहुआयामी
असर उस दौर की बाजार रिपोर्टिंग दिखाती है। *



*युद्ध** के असर में बाजार*

*      राष्ठ्रीयकरण से तो बाजार बहुत सहमा, फिर युद्ध ने सहमाया।
भारत-पाकिस्तान युद्ध का बाजार पर जबरदस्त पडा। *



*एक** नमूना देखें-*

*हिन्दुस्तान 29 नवम्बर, 1971, पेज सात, चार कालम*

*बम्बई शेयर *

*भारत-पाक सीमा पर तनाव का बाजार पर प्रभाव-अंत में कुछ सुधार*

*(हमारे बम्बई कार्यालय द्वारा)*

*बम्बई, 28 नवम्बर। भारत-पाक सीमा पर बढ़ते हुए संघर्ष और गत सप्ताह पाकिस्तान
द्वारा संकटकाल की घोषणा का बम्बई बाजार की सक्रियता पर प्रभाव पड़ता रहा।
समर्थन के अभाव  और घबराहट की कटान से भाव नए नीचे स्तर पर गिर गए। चुने शेयरों
में खरीद और मन्दड़ियों की पटान से बन्द होते समय मामूली सुधार हुआ। फिर भी
बन्द होते समय चहुंमुखी मामूली गिरावट दिखाई दी और बाजार का रुख कमजोर था। *

*      निर्यात के लिए अधिक सहायक नीति और विकास कटौती के संबंध में सरकार के
प्रारम्भिक निर्णय के संशोधन की संभावना की खबरों से सप्ताह स्थिर रुख के साथ
खुला। लेकिन अगले दिन पाकिस्तान द्वारा संकटकाल की घोषणा के फलस्वरुप
घबराहटपूर्ण कटान से शेयरों के भावों में गिरावट आई। .....*

*      कारोबार के रुख में सतर्कता थी क्योंकि सीमा पर खिंचाव बना हुआ था औरकिसी
भी समय युद्ध संभव था। पेशेवर तटस्थ बने रहे। ........अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों
द्वारा पाकिस्तान पर युद्ध टालने और राजनीतिक समझौते करने के लिए दबाव डालने की
खबरों से बाजार की भावना को कुछ सीमा तक सहायता मिली। *

*      बाजार युद्ध की आशंका से परेशान था। पाकिस्तान में संकटकाल की घोषणा से
बाजार में गिरावट आयी। पर बाजार इस बात को लेकर कुछ राहत भी महसूस कर रहा था कि
अंतर्राष्ट्रीय शक्तियां पाकिस्तान पर युद्ध टालने और राजनीतिक समझौते करने के
लिए दबाव डाल रही थीं। *

*      युद्ध के समय बाजार भारी ऊहापोह में था।*



* युद्ध का असर तस्करी पर, तस्करी का असर सोने के भावों पर *

*बाज**ार** रिपोर्ट**िंग बताती है कि युद्ध का असर कितना बहुआयामी था। एक
नमूनादेखें-
*

*हिन्दुस्तान 5 दिसम्बर, 1971 पेज नंबर सात दो कालम*

*दिल्ली सराफा *

*तस्करी आवक घटने से सोना तेज *:* चांदी में नरमी*

*(हमारे संवाददाता द्वारा)*

*दिल्ली , 4 दिसम्बर। तस्करी आवक घटने के कारण शुद्ध सोना एकदम 4 रुपए बढ़ता
सुना गया। इसके विपरीत चांदी 2.50 रुपये टूट गई। कारोबार संतोषजनक रहा। *

*      भारत के कई हवाई अड्डों पर पाकिस्तानी हमला होने की खबर से सोने की
तस्करी आवक एकदम बंद हो जाने की आशंका थी, जिससे निजी कारोबार में शुद्ध सोना 4
रुपए बढ़कर 198 रुपए हो गया। जेवर और स्टैंडर्ड सोने में भी दो-दो रुपए की तेजी
आई। *

*      यद्यपि आज कच्ची चाँदी की आवक 20 सिल्ली तथा मांग 15 सिल्ली की थी लेकिन
आरम्भ में चाँदी के भाव पाकिस्तानी हमला होने की खबर से 509.50 से घटकर 506 रह
गए थे।  बाद में  भारतीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा पाकिस्तानी
हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की घोषणा से चांदी साप्ताहिक डिलीवरी के भाव सुधरकर
507 रुपए हो गए लेकिन पूर्वस्तर से फिर भी 2.50 रुपए नीचे थे। सिक्का भी चांदी
के समर्थन में 4 रुपए प्रति सैंकड़ा टूट गया। ..........*

*      युद्ध का मतलब था तस्करी को सोने की आवक रुकना और तस्करी के सोने की आवक
रुकने का मतलब था, कुल सप्लाई में कमी। इसलिए बाजार के भाव बढ़ गये। सोने के
बाजार के लिए युद्ध सिर्फ युद्ध नहीं था, सोने की सप्लाई रुकने का कारक था,
 बाजार रिपोर्टिंग इस बात को रेखांकित करती है। *



*युद्ध** में गेहूं तेज*

*युद्ध** का असर सारे आइटमों पर एक सा नहीं था, कुछ आइटमों के भाव बढ़ रहे थे,
कुछ के कम हो रहे थे। एक नमूना देखें-*

*हिन्दुस्तान 5 दिसम्बर, 1971 पेज नंबर सात तीन कालम*

* दिल्ली की मंडियां*

*हमले की खबर से चीनी व तेल नरम *:* गेहूं , बादाम कागजी तेज*

*(हमारे व्यापार संवाददाता द्वारा)*

*दिल्ली, 4 दिसम्बर। पाकिस्तान द्वारा भारत के विरुद्ध हवाई हमला शुरु कर दिए
जाने की खबर से यद्यपि तेलों के भाव घट गए लेकिन कारोबार संतोषजनक था। गेहूं 3
से 4 रुपए बढ़ गया जबकि बाजरा, दाल उड़द, और दाल मूंग के भाव ढीले गए। सूखे
मेवों में किशमिश और बादाम कागजी के भाव जहां तेज हो गए वहां बादाम गिरी 200
रु.घटाकर बोली गई।*

*...पाकिस्तान द्वारा भारत के हवाई अड्डों पर व्यापक हमला करने के
पश्चातराष्ट्रपति
श्री गिरि द्वारा देश में आपातकालीन स्थिति की घोषणा कर दिए जाने से किराना
बाजार में आज कारोबार सुस्त रहा। धनियां 10 से 20 रुपए घटाकर बोला गया
क्योंकिस्टाकिस्ट अपना
माल बेच रहे थे। *

*गेहूं के भाव बढ़ रहे थे, पर बाजरा, दाल उड़द और दाल मूंग के भाव ढीले हो रहे
थे।  *







*जीत** का जोश बाजार में *

*      1971 में भारत-पाक युद्ध में भारत की विजय का असर शेयर बाजार पर कुछ यूं
दिखा-*

*हिन्दुस्तान 7 दिसम्बर 1971, पेज सात दो कालम*

*बंबई शेयर*

*(हमारे बंबई कार्यालय द्वारा)*

*बंबई, 6 दिसंबर। औद्योगिक शेयर कमजोर रुख के साथ खुले लेकिन शीघ्र ही उनमें
सुधार हुआ और वे स्थिर रुख के साथ ऊंचे बन्द हुए। पाकिस्तान के शहरों और नगरों
पर भारी बमबारी और युद्ध की अनुकूल खबरों के फलस्वरुप मंदड़ियों ने सभी
प्रमुखसट्टा शेयरों में पटान की। सभी शेयर अपने नए
नीचे स्तर से सुधरे और बेहतर भावों पर बन्द हुए। *

*टाटा स्टील और मुकन्द बेहतर थे। टेक्सटाइल वर्ग में सेंचुरी अपने नीचे के स्तर
की तुलना में दस रुपए से अधिक सुधर गए। अंत में स्टैंडर्ड ऊंचे गए। प्रारम्भिक
कमजोरी के बाद विविध शेयरों में सुधार हुआ। ............*

*      पाक शहरों पर बमबारी की खबरों से बाजार सुधरा। *

*      बंगलादेश में भारतीय सेना का मार्ग प्रशस्त होने के बाद बाजार और
 बेहतरहुआ। *

*हिन्दुस्तान 10 दिसम्बर 1971 पेज सात दो कालम*

*बम्बई शेयर *

*      भारतीय सेना की विजय की खबरों से शेयरों में तेजी*

*(हमारे बम्बई कार्यालय द्वारा)*

*बम्बई, 9 दिसम्बर। बहुत स्थिर खुलने के बाद औद्योगिक शेयर आगे बढ़े और ऊंचे
बन्द हुए। बंगला देश में पाकिस्तानी सेनाओँ के प्रतिरोध खत्म होने और पश्चिमी
पाकिस्तान में हमारी सेनाओं की  आगे बढ़ने की खबर से बाजार में आशाजनक वातावरण
पैदा हो गया है। टाटा आर्डीनरी , मुकन्द, सेंचुरी स्टैंडर्ड, ने. रेयन और
सिंधिया में मन्दड़ियों ने पटान की। जीवन बीमा निगम ने  अच्छे शेयरों का समर्थन
किया। ने. रेयन 10 रु. बढ़ गए। टाटा आर्डी. एक रुपए उछले। मुकन्द आधा रुपये
ऊंचे गए। सेंचुरी में 10 रुपए की वृद्धि हुई। स्टैण्डर्ड 11 ऊंचे थे। ....*

*जीवन बीमा निगम के समर्थन का मतलब है कि निगम ने बाजार में खऱीदारी की। गौरतलब
है कि तब जीवन बीमा निगम की खऱीद-बिक्री उल्लेखनीय मानी जाती थी। *

*मुकन्द , सेंचुरी स्टैंडर्ड, नेशनल रेयन महत्वपूर्ण शेयरों में गिने जाते थे।
*

*मिटे नामियों के निशां कैसे कैसे, जमीं खा गयी आसमां कैसे कैसे। *

*शेयर बाजार की कवरेज को देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि किस वक्त किस
कंपनीका बोलबाला बाजार
में होता था। *



*पाकिस्तान से उम्मीद*

*1971 के युद्ध के करीब तीन साल बाद बाजार पाकिस्तान से कुछ उम्मीद भी लगाया
करता था, एक नमूना देखिये -*

*हिन्दुस्तान 2 दिसम्बर 1974, पेज 5, एक कालम की खबर*

*बम्बई शेयर*

*बाजार** में चमक लेकिन अंत में कमजोरी *

*बम्बई , 1 दिसम्बर (ह.स.)। गत सप्ताह के अधिकांश भाग में मंदड़ियों की
पटान औरतेजड़ियों के समर्थन
से दलाल स्ट्रीट में चमक रही। लेकिन  बन्द होते समय रुख कमजोर रहा। *

*तेजड़ियों के पक्ष में दो कारण थे, नरोरा में कांग्रेस के उच्च नेताओं के
सम्मेलन के बाद 13 सूत्री कार्यक्रम और कुछ विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार
लाभांशपर लगे
प्रतिबंध या तो उदार बनाए जाने या पूर्णत *: *किये जाने की आशा। इस स्थिति का
तेजड़ियों ने लाभ उठाया और बाजार का समर्थन किया जबकि मंदड़ियों ने अपनी
बिक्रीकी पटान की। पूरे सप्ताह
भाव ऊपर उठाए गए ....................अनेक वर्षों के बाद भारत-पाकिस्तान में
व्यापार शुरु होने के सम्बन्ध में समझौता निकट होने की खबर से भावना को
 सहारामिला। *

*बन्द** होते समय, समर्थन के अभाव और ऊंचे स्तर पर मुनाफा वसूली तथा तेजड़ियों
की कटान से भाव गिर गए। सिंधिया स्टीम के एक प्रमुख तेजड़िये द्वारा भुगतान न
किए जाने के फलस्वरुप कुछ सदस्यों की जो कठिनाई का सामना करना पड़ा उसके कारण
चिंता पैदा हो गई। सम्भवत*:* ऐसे और मामले सामने आ सकते हैं। वस्तुत
बाजार संकटसे बाहर
नहीं है।.  *

*      बाजार इस उम्मीद में उछल जाया करता था कि लाभांश पर लगा प्रतिबंध या तो
उदार बनाया जायेगा, या हटा लिया जायेगा। फिर बाजार को यह उम्मीद भी थी कि
भारत-पाकिस्तान में व्यापार शुरु हो जायेगा। इस उम्मीद पर भी बाजार उठा। *

*      बाजार हर तरफ से उम्मीद लगाया करता था, पाकिस्तान से भी, जिसे कुछ सालों
पहले युद्ध में हराया गया था। बाजार का तर्क अलग होता है, पाकिस्तान से
व्यापारहोगा, तो नये बाजार मिलेंगे। नये बाजार
मतलब नयी बिक्री, और नयी बिक्री मतलब नये मुनाफे। *

*      उम्मीद नाउम्मीदी पाकिस्तान के तस्करों से भी *

*      सिर्फ आधिकारिक कारोबार से ही बाजार उम्मीद नहीं लगाता था।*

*      पाकिस्तान से होने वाली तस्करी से भी बाजार उम्मीद बांधता था
यानाउम्मीद होता था।
*

*      एक खबर देखिये-*





*      हिन्दुस्तान 2 दिसम्बर 1974, पेज 5, एक कालम की खबर*

*      दिल्ली सराफा (सा.समीक्षा)*

*      सोने व जेवर में हानि *

*      दिल्ली, 30 नवंबर, (ह.स.)। पूर्वी भारत से तस्करी आवक होने तथा
व्यापारसंबंध होने के
बाद पाकिस्तान से तस्करी आवक बढ़ने की उम्मीद से सोना व जेवरों में 10 से 14
रु. का मंदा आया। चांदी भी सीमित कारोबार में टूट गई। *

*      लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, कलकत्ता आदि पूर्वी भारत की मंडियों में तस्करी
आवक बढ़ने तथा बाद में बंबई में स्टैंडर्ड सोने का भाव टूट जाने से गत सप्ताह
सराफा बाजार में सोना विटूर व बिस्कुट के भाव 530  और 540 से घटकर 516 और 530
रु. होते सुना गया। जेवर और स्टैंडर्ड सोने में 512 व 521 रु. पर 13 से 14 रु.
का मंदा आया। मंदे की तह में यह कारण भी विद्यमान था कि पाकिस्तान से व्यापार
संबंध होने के बाद जब वहां से माल आने लगेगा तब उसकी आड़ में चोरी-छिपे सोना भी
आ जाएगा। असली  गिन्नी का भाव 400 रु. सुना गया। *

*      सोने का बाजार इस चिंता में आ गया कि पाकिस्तान से तस्करी आवक बढ़ी, तो
भाव गिर जायेंगे। *

*      इसके अलावा आशंका यह भी कि पाकिस्तान से व्यापार संबंध होने के बाद जब
वहां से माल आने लगेगा तब उसकी आड़ में चोरी-छिपे सोना भी आ जाएगा। मतलब सोने
की सप्लाई बढ़ जायेगी, मतलब सोने के भाव गिरने का अंदेशा। *

*      बाजार हर मसले को इस दृष्टिकोण से देखता था। *

*      और देखता क्या था, देखता है। *



*चिंता** यहां भी*

*      हिन्दुस्तान 2 दिसम्बर 1974, पेज 5, दो कालम की खबर*

*      दिल्ली की मंडियां(साप्ता. समीक्षा)*

*      मोटे अनाज और दालों में नरमी *:* चीनी में मजबूती*

*      दिल्ली, 30 नवम्बर (ह.स.) ............*

*      किराना व मेवे*:

*      भारत-पाकिस्तान व्यापार संबंध पुन: कायम होने की खबर से जहां लालमिर्च
की मांग घट गई वहां हल्दी,सुपारी, काली मिर्च, छोटी इलायची आदि मसालों में तेजी
आने की उम्मीद थी  क्योंकि पाकिस्तान को इनका निर्यात हो सकता है। तस्करी आवक न
होने तथा पाकिस्तान में इसका स्टाक खत्म हो जाने की चर्चा से लौंग के भाव 285-
290 से उछलकर 330-335 रुपए प्रति किलो की चोटी पर जा पहुंचे। ....*

*      ...............मांग सुस्त होने से गोला भी ढीला पड़ने लगा। *

*      पाकिस्तान से व्यापार संबंध स्थापित होने की खबर से किराना और मेवे के
बाजार में उतार आया कुछ आइटमों में और चढ़ाव आया कुछ आइटमों में। *

*      वजह वही साफ है, जो आइटम पाकिस्तान में बेचे जा सकते हैं, उनके भावबढ़े।
*

*      जिन आइटमों की सप्लाई पाकिस्तान आधिकारिक या तस्करी के जरिये होने की सं
भावित थी, उनके भाव कम हुए। *

*      तस्करी आवक न होने तथा पाकिस्तान में स्टाक खत्म होने की चर्चा से लौंग
के भाव यहां के बाजारों में ऊपर चले गये।*

*      बाजार सिर्फ आधिकारिक घटनाक्रम से नहीं चलता। पाकिस्तानों के तस्करों से
भी उम्मीद रखता था बाजार,  और नाउम्मीद भी होता था। *



*तस्करी अंदरुनी भी*

*तस्करी का मामला बड़ा मामला था। *

*सिर्फ पाकिस्तान से होने वाली तस्करी ही बाजार पर असर नहीं डाल रही थी। आंतरिक
तस्करी के असर भी भावों पर दिखते थे और ये असर रिपोर्टिंग में रेखांकित किये
जाते थे। एक नमूना देखें-*

*हिन्दुस्तान 26 मई, 1975 पेज नंबर पांच दो कालम*

*दिल्ली मंडी की साप्ताहिक समीक्षा*

*गेहूं फार्म और दालों में तेजी *:* वनस्पति व तेल नीचे*

*दिल्ली 24 मई (ह.स.)। सप्लाई स्थिति जटिल होने तथा स्टाकिस्टों की मांग पर
गेहूं फार्म में 20 रु. की जोरदार तेजी आई। अन्य अनाजों में कारोबार कमजोर था
जबकि दालें तेज हो गईं। चीनी बाद में सुधार के बावजूद ढीली थी जबकि प्रमुख
खाद्य तेलों और वनस्पति के भावों में गिरावट आई।  किराना व सूखे मेवों में
मिलाजुला रुख था। *

*पड़ोसी राज्यों से गेहूं की तस्करी आवक कमजोर होने तथा बढ़िया माल की आवक
कमजोर व मांग अधिक होने के कारण स्थानीय अनाज मंडी में गेहूं के भाव 5 से 20
रु. बढ़कर 180-220 रु. हो गए। *

*...दिल्ली प्रशासन द्वारा गेहूं में तेजी के विरुद्ध व्यापारियों को
चेतावनीदेने का
उल्टा असर पडा। सुना है व्यापारियों ने अपनी दुकानों पर बढ़िया फार्म गेहूं
रखना ही छोड़ दिया। यह माल गुप चुप रुप से उपभोक्ताओं को ऊंचे दाम पर बेच दिया
जाता है। सुना है कि दिल्ली की देहाती मंडियों और पड़ोसी राज्यों से गेहूं के
ट्रक रात को आते हैं और तुरन्त  उन्हे भूमिगत कर दिया जाता है। *

*      ........भारतीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा मेवों के सम्बन्ध में अफगानिस्तान
यात्रा करने की खबर से गत सप्ताह किशमिश, बादाम-पिस्ता और आबजोश आदि मेवों के
भाव लुढ़क गए। गोले के भाव हालांकि बाद में सुधरकर 840-970 रुपए हो गए लेकिन
पूर्व स्तर से फिर 10-30 रुपए नीचे हो गए थे। इस बार केरल में गोले का उत्पादन
अधिक बताया जाता है। *

*      पड़ोसी राज्यों से तस्करी की आवक कम होने के कारण दिल्ली की मंडियों में
भाव ऊपर होते थे, और रिपोर्टिंग में इस बात को चिन्हित किया जाता था कि इस तेजी
के पीछे कमजोर तस्करी आवक है। *

*      तस्करी ही तस्करी, आंतरिक और विदेशी बाजार के भावों पर खासा प्रभाव रखती
थी। *

*      *

*छापों का असर*

*      जुलाई 1975, आपातकाल की घोषणा के ठीक बाद का समय था।( 25 जून 1975 को
आपातकाल की घोषणा की गयी थी। यह 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक रहा।) इस दौर
में कारोबारों पर छापे मारे जाने का असर भावों पर देखे गये-*

*हिन्दुस्तान 26 जुलाई, 1975 पेज पांच  दो कालम*

*दिल्ली की मंडियां*

*स्टाक व आवक की अधिकता से चावल के भाव गिरे *

*दिल्ली-25 जुलाई (ह.स.) गत दो सप्ताह में पंजाब और हरियाणा से 25,000
बोरीचावलों की आवक होने
तथा स्थानीय स्टाक लगभग 80000 से 1,00,000 क्विण्टल तक हो जाने के अनुमान से
चावल बासमती और बेगमी के भाव 10 से 15 रुपये टूट गए। वर्षा अच्छी होने से
पंजाब, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में चावल का उत्पादन बढ़ने से बाजार में भी
गिरावट आई।*

*दिल्ली की नरेला मंडी में 2,000 क्विन्टल आवक होने से गेहूं देसी के भाव 5
रुपये प्रति क्विण्टल टूट गए। चने और इसकी दाल तथा बेसन में भी बिकवाली बढ़
जाने से दो-दो रुपए की हानि हुई। सरकारी छापों के कारण उत्पादन मंडियों में चने
की आवक बढ़ने की चर्चा थी। बाजार दिसावरी मांग के अभाव में 5 रुपए घटाकर बोला
गया। .........*

*      सरकारी छापों के कारण मंडियों में चने की आवक बढ़ी सो भाव गिरना तो तय
था। *

*आपातस्थिति का खात्मा और शेयर बाजार*

*आपातस्थिति के खात्मे की घोषणा का शेयर बाजार पर सकारात्मक असर पडा। बाजार
रिपोर्टिग में इसे दर्ज किया गया है। एक उदाहरण देखें-*

*हिन्दुस्तान 22 मार्च, 1977 पेज सात सिंगल कालम*

*दिल्ली शेयरों में उछाला*

*नई दिल्ली , 21 मार्च (समाचार)। स्थानीय शेयर बाजार में आज उछाला आया।
चुनावपरिणामों
और आपात स्थिति समाप्त किये जाने से प्रभावित लिवाल बढ़ने से सभी शेयर
लगातारसुधरकर मजबूती
से बंद हुए।.*

*      चुनाव परिणामों में जनता पार्टी की विजय हुई थी और आपातस्थिति की
समाप्ति की घोषणा कर दी गयी थी।*



*अनिश्चितता के तनाव*

*      पर जनता पार्टी की जीत भर से अनिश्चितता की स्थिति खत्म नहीं हुई। तमाम
तरह की अनिश्चितताएं बनी हुई थीं। बाजार इन अनिश्चितताओं के असर में झूल रहा
था, बाजार रिपोर्टिंग ने इसे दर्ज किया है-*

*हिन्दुस्तान 28 मार्च, 1977 पेज सात तीन कालम की खबर*

*दिल्ली मंडी की साप्ताहिक समीक्षा*

*राजनीतिक घटनाचक्र का कारोबार की धारणा पर प्रभाव*

*दिल**्ली 27 मार्च (ह.स.) उत्पादन मंडियों में सप्लाई स्थिति सुगम होने तथा
मांग के अभाव में गत सप्ताह मूंगफली और बिनौला के तेलों में 40 रु.
प्रतिक्विंटल तक मंदा आया। तेल सरसों पक्की घानी व तेल गोले के भाव 12
से 13 रुपये प्रति टीन लुढ़क गए। तेल अलसी 60 रुपए और बढ़ाकर बोला गया। नीरस
कारोबार में चीनी के भाव 14 रुपए तक लुढ़क गए। दालों में मिला-जुला रुख रहा
जबकि गेहूं में मजबूती तथा चावल और चने में नरमी दिखाई दी। स्वतंत्र भारत के
इतिहास में पहली बार कांग्रेस को लोकसभा के चुनाव में अभूतपूर्व हार का सामना
करना पड़ा और केन्द्र में श्री मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की
सरकार बन गई। *

*......*

*तेल तिलहन*

*यद्यपि** श्री जगजीवनराम व उनके साथियों द्वारा नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री श्री
देसाई के मंत्रिमंडल में गतिरोध और अनिश्चितता का वातावरण पैदा उत्पन्न कर दिए
जाने की खबर थी लेकिन ............कुछ व्यापारियों का विचार है था कि श्री
देसाई अपने अनुभव और सूझबूझ के बल पर वर्तमान संकट को पार कर लेंगे। निकट भविष
्य में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। संभवत इसीलिए यह अनुमान है कि जनता
पार्टी के अध्यक्ष देश के नए प्रधानमंत्री श्री देसाई भी महंगाई को घटाने का
प्रयास करेंगे। तेलों की सहानुभूति में वनस्पति के भाव भी लगभग 4 रुपए
प्रतिटीन घटकर 151
से 152.25 रुपए प्रति टीन रह गए। *

*      जनता पार्टी के नेताओं में आपसी मतभेद की खबरों के चलते बाजार में
अनिश्चितता थी।     *

*      तेल *–*तिलहन के बाजार भी राजनीतिक घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे थे
और भविष्य की आशाओं और उम्मीदों में झूल रहे थे। *

*      *





*मोरारजी की जय हो, बिकवाल चुप*

*अनिश्चितता छंटने की खबर के बाद बाजार उछला। एक खबर देखें-*

*हिन्दुस्तान 28 मार्च, 1977 पेज सात एक कालम की खबर*

*कलकत्ता शेयर समीक्षा*

*नई आर्थिक नीति की आशा से भावों में तेजी*

*कलकत्ता 27 मार्च(ह.स.) स्थानीय लायन्स रेंज में गत सप्ताह औद्योगिकों को
व्यापक रुप से उल्लेखनीय लाभ रहा। श्री मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्री बनने के
घोषणा से व्यापारियों में उत्साह था। *

*यह लाभ दस्ती डिलीवरी शेयरों में अधिक था। बाजार की टैक्नीकल स्थिति अच्छी
होने के कारण भारी खरीद कारोबार हुआ। *

*नकद** शेयरों में भी अच्छा कारोबार हुआ। यहां तक कि दूसरी श्रेणी  के शेयरों
में भी पूछताछ चली। बिकवाल चुप ही रहे। कारोबारियों के अनुसार सरकार की संभावित
नीति परिवर्तन से अर्थ व्यवस्था को और बल मिलेगा। *

*      बाजार अनिश्चितता को सख्त नापसंद करता है। यह बात रिपोर्टिंग में इंगित
की गयी है।*



*सोना बाहर तो भाव नीचे*

*      नयी सरकार से शेयर बाजार को उम्मीदें थीं, तो सोने के बाजार में खासी
आशंकाएं थी। एक खबर देखें-*

*हिन्दुस्तान 28 मार्च, 1977 पेज सात दो कालम की खबर*

*दिल्ली सराफा बाजार की साप्ताहिक समीक्षा*

*कारोबार** में अनिश्चितता *

*दिल्ली 27 मार्च (ह.स.) गत सप्ताह सर्राफा बाजार में दोतरफा घटा-बढ़ी के
बादअनिश्चित रुख रहा।
चांदी में बाद में गिरावट के बावजूद कुछ मजबूती थी जबकि सोना विटूर आवक बढ़ने
से 9 रुपये प्रति दस ग्राम गिर गया। जेवर और स्टैंडर्ड सोने में प्रारम्भिक
गिरावट के बाद फिर सुधार हो गया। *

*कच्ची चांदी की आवक कमजोर होने से तेजाबी प्रारम्भ में 1300  बढ़कर 1305 खुली
और न्यूयार्क के तेज समाचार से इसके भाव बढ़ते-बढ़ते  गुरुवार को 1329 रुपए तक
जा पहुंचे। केन्द्र में जनता पार्टी के अध्यक्ष श्री मोरारजी देसाई के प्रधान
मंत्री बनने के उपरान्त व्यापारियों को चांदी का निर्यात कोटा शीघ्र मिलने की
आशा थी। लेकिन गणतंत्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष श्री जगजीवनराम और उनके साथियों
द्वारा नए मंत्रिमंडल में शामिल होने के निर्णय करने के उपरान्त पीछे हट जाने
से चान्दी में कारोबार घट गया और शनिवार को भाव गिरते-गिरते 1302 रह गए। चान्दी
की तरह इसका सिक्का भी 1390 से बढ़कर 1419 रु. होने के बाद फिर घटकर  1392 रुपए
प्रति सैकड़ा रह गया। *

*पंजाब, उत्तर प्रदेश आदि से आवक होने तथा मांग के अभाव में सोना विटूर 9 रुपए
घटकर 578 से 583 रुपए रह गया। कहा जाता है कि श्री देसाई स्वर्ण नियंत्रण कानून
को सख्त करने की सोच रहे हैं।  अगर ऐसा हुआ तो दबा हुआ सोना बाहर आने की
संभावना है जिससे इसके भाव और घट सकते हैं। जेवर और स्टैंडर्ड सोने के भाव दो
तरफा घटा-बढ़ी  दिखाने के बाद अंत में 574 से 594 रुपए पर मजबूत रहे। बंबई से
आवक कमजोर होने से भी अनुकूल प्रभाव पडा। असली गिन्नी मांग के अभाव में 3 रुपए
घटकर 415 से 422 रुपए ही रह गई।  *

*      तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई सोने के मामले में सख्ती
दिखायेंगे, इस आशंका से बाजार परेशान हो गया। सोना बाहर तो बाजार नीचे, बाजार
की रिपोर्टिंग में लगातार यह भाव सामने आता रहा है। *



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