[दीवान]रेजिडेंस प्रूफ-5

bipul pandey bipulpandey at gmail.com
Fri Jun 29 12:43:06 IST 2007


पति,पत्नी और पता ***

पांचवी डाक ***

पिया की प्यारी क्यों रहती है पराई ***

पैन कार्ड यानी परमानेंट अकाउंट नंबर का फॉर्म भरिए। नाम भरने के बाद दूसरे
नंबर पर जो खाना बना होगा उसमें पूछा जाएगा पिता का नाम। साथ में दिशानिर्देश
होगा- विवाहित महिलाएं भी सिर्फ पिता का नाम दें। ये नौकरशाही का नया चेहरा है
जो किसी महिला को उसके पति के नाम से नहीं पहचानना चाहता। बताते हैं कि दो साल
पहले यानी साल 2005 से पहले ऐसा नहीं होता था.. आज भी महिला कहीं पर मां बनकर
मौजूद है तो कहीं पत्नी बनकर। बेटी बनकर हमेशा मौजूद रही है। लेकिन सरकारी स्तर
पर इस पहचान से इनकार बहुत ही हैरत की बात है। इनकम टैक्स विभाग ने जब ये छोटा
सा फैसला लिया तो शायद इसकी कोई वजह दर्ज नहीं की गई। यही वजह है कि इनकम टैक्स
के कर्मचारी स्पष्ट तौर पर नहीं बता पाते कि कानून बनाते वक्त कानून बनाने
वालों ने क्या दलील दी। कुछ कर्मचारी इस बात का संकेत जरूर करते हैं कि- 'पति
बदल सकता है, पिता नहीं'। लेकिन प्रामाणिक तौर पर यह बात कितनी सही है यह कहा
नहीं जा सकता।***

पैन कार्ड दरवाजा होता है आयकर भरने का। अगर पैन कार्ड नहीं है तो आयकर नहीं भर
सकते। आयकर नहीं भरते तो कानूनन आपको कड़ी सजा हो सकती है। पैन कार्ड बनवाने के
इस नियम में मामूली फेरबदल ने बहुत बड़ा उलटफेर कर दिया है। पैन कार्ड बनवाने
के लिए जरूरी है रेजिडेंस प्रूफ लेकिन पति से तो पहचान ही मिट चुकी है। बेटियों
के सामने संकट है कि पति का रेजिडेंस प्रूफ उनका अपना क्यों नहीं हो सकता।
क्योंकि पैन कार्ड बनवाने में दो प्रमाण पत्रों की जरूरत होती है। एक पहचान का
प्रमाण पत्र और दूसरा पते का प्रमाण पत्र।***

आइए एक नजर डालते हैं पहचान के प्रमाण पर। पहला प्रमाण है स्कूल लीविंग
सर्टिफिकेट। यानी स्कूल छोड़ने का सर्टिफिकेट, जिसकी अमूमन जरूरत ही नहीं पड़ती
और अगर जरूरत पड़ती भी है तो आगे की पढ़ाई के लिए दाखिला लेते वक्त जमा करा
लिया जाता है। दूसरा प्रमाण 10वीं का सर्टिफिकेट। अमूमन इनकम टैक्स भरने के
काबिल हर शख्स के पास 10वीं का सर्टिफिकेट मौजूद होता है। यानी समस्या का हल हो
गया लेकिन हैरानी होती है सोचकर कि सरकार का काम 10वीं के सर्टिफिकेट से कैसे
चल जाता है? जहां तक मैं समझता हूं सरकार को पहचान के प्रमाण के तौर पर चाहिए
होता है फोटो और उसके साथ नाम। और कुछ चाहे हों या न हों, अगर किसी से उसकी
पहचान पूछ रहे हैं तो इनका होना तो लाजिमी है। जबकि मैंने किसी के दसवीं के
सर्टिफिकेट पर फोटो चस्पां नहीं देखा। फिर कैसे काम चला लेती है सरकार?***

इनकम टैक्स विभाग का जो मकसद समझ में आता है उनमें पहचान की दूसरी संभावनाएं
तलाशते हैं। विभाग पहचान के तौर पर मांगता है बैंक का पासबुक, जमा खाते का
स्टेटमेंट, क्रेडिट कार्ड, पानी का बिल, राशन कार्ड, प्रॉपर्टी टैक्स की पर्ची
जैसी चीजें। इनमें भी फोटो नहीं मिलेगा। दिगर बात ये है कि पानी का बिल और
प्रॉपर्टी टैक्स जैसी चीजें किसी एक के नाम होती हैं। यानी घर का मुखिया ही इन
मानदंडों पर खरा उतरता है जिसके पास अपनी पहचान साबित करने के लिए अधिक विकल्प
हैं। अन्य के पास नहीं। पहचान साबित करने के दूसरे साधन हैं पासपोर्ट और वोटर
आई कार्ड। इन सभी विकल्पों पर चर्चा बाद में।***

अब बारी आती है पते के प्रमाण की। इसमें पानी के बिल के साथ-साथ शामिल है बिजली
बिल। एक और हैरत की बात पानी के बिल को आप अपने पहचान के प्रमाण के तौर पर पेश
कर सकते हैं लेकिन बिजली के बिल को नहीं। क्या अंतर है भाई? आखिर ऐसा क्यों हैं
? सवाल कई हैं, लेकिन जवाब मिलना मुश्किल है। लेकिन यह सब इनकम टैक्स नियम,
1962 के नियम संख्या 114 में दर्ज हैं। ऐसा पैन कार्ड का फॉर्म ही कहता है। पते
का प्रमाण आपके जमा खाते, क्रेडिट कार्ड की जगह उसके स्टेटमेंट या नौकरी देने
वाले के लिखकर देने पर मान्य हो सकता है। पते के पहचान या रेजिडेंस प्रूफ के
बाकी माध्यम पहचान के बाकी साधन ही हैं। जैसे कि राशन कार्ड, हाउस टैक्स,
पासपोर्ट, वोटर आईडी या फिर ड्राइविंग लाइसेंस।***

पूरे मामले को पेचीदा बनाता है इनकम टैक्स विभाग का एक नोट। पैन कार्ड के फॉर्म
पर ही लिखा है कि पहचान और पते का प्रमाण पत्र आवेदक के नाम पर होना चाहिए।
यानी न तो पिता का पता चलेगा और न पति का पता चलेगा। इनकम टैक्स का कानून बताता
है कि आपको अपनी पहचान का प्रमाण रखना होगा और पते का भी। बेहद पेचीदा। कानून
बनाने वालों ने अपनी सारी दिमागी ताकत झोंक दी, जिसका नतीजा है इनकम टैक्स नियम,
1962। ऐसा लगता है कि इनकम टैक्स के नियम बनाने वालों से करीब डेढ़ दशक पहले
अगर संविधान बनाने वालों ने संविधान न बना दिया होता तो आज की तारीख में वह भी
मुमकिन नहीं होता।***

आगे है—सीए से सुनिए... पत्नी के रेजिडेंस प्रूफ ने कैसे सताया

आपका दोस्त

बिपुल पांडेय

9868778088

शोध का विषय—रेजिडेंस प्रूफ
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