[दीवान]ब्लॉग के सैर सपाटे के दौरान मिले समरेन्द्र और उनकी कविता

girindra nath girindranath at gmail.com
Mon Dec 29 13:44:22 IST 2008


ब्लॉग के सैर सपाटे के दौरान मिले समरेन्द्र और उनकी कविता- मुझसे नई तकदीर ले
जाइये <http://dreamndesire.blogspot.com/2008/06/blog-post_21.html>
ब्लॉग का नाम है-  मेरे सपने, मेरी तमन्ना .. हाल ही में मोहल्ला पर उनके लिखे
-  गांव रहने लायक नहीं बचा... और
मीडिया?<http://mohalla.blogspot.com/2008/12/blog-post_09.html>
पर लम्बी बहस चली थी . गिरीन्द्र <http://www.anubhaw.blogspot.com/>

मुझसे नई तकदीर ले
जाइये<http://dreamndesire.blogspot.com/2008/06/blog-post_21.html>
हुजूर, मेहरबान, कदरदान!
मैं शब्दों का कारोबारी हूं,
मेरे पास हर तरह के शब्द हैं.
पैसे दीजिये,
जरूरत के शब्द ले जाइये.
अगर आपने किसी का क़त्ल किया है,
मगर क़ातिल कहलाने से बचना चाहते हैं,
तो मेरे पास आइये,
मैं क़त्ल को हादसा बता दूंगा.
यकीन मानिये,
शब्दों में बड़ी ताकत होती है,
सारा खेल शब्दों का है,
शब्दों से ही दुनिया चलती है.
मेरी और आपकी बिसात क्या,
शब्द बदलने पर देशों की तकदीर बदल जाती है.
मैं उन्हीं शब्दों को कारोबार करता हूं,
झूठ को सच बनाने के फन में माहिर हूं.
बस आप पैसे फेंकिये,
मुझसे अपनी जरूरत के शब्द,
और अपनी नई तकदीर ले जाइये।
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