[दीवान]हिंदी और अंग्रेजी तब और अब
Ravikant
ravikant at sarai.net
Tue Jan 29 16:38:08 IST 2008
rashtriy sahara hastaksep se hi
हिंदी और अंग्रेजी तब और अब
अवधेश कुमार
महात्मा गांधी ने अन्य समस्याआ॓ के समान भारत की भाषा समस्या के समाधान पर भी अपनी बात रखी
थी। वे अंग्रेजी को गुलामी का कारण मानते हैं। हिन्द स्वराज में उन्होंने लिखा,‘ सारे हिन्दुस्तान के
लिए जो भाषा चाहिए, वह तो हिन्दी ही होनी चाहिए। उसे उर्दू या नागरी लिपि में लिखने की
छूट रहनी चाहिये। हिन्दू मुसलमानों के संबंध ठीक रहे, इसलिए बहुत से हिन्दुस्तानियों का इन दोनों
लिपियों को जान लेना जरूरी है। ऐसा होने से हम आपस के व्यवहार से अंग्रेजी को निकाल
सकेंगे।’ .. ‘ हर एक पढ़े–लिखे हिन्दुस्तानी को अपनी भाषा का, हिन्दू को संस्कृत का, मुसलमान को
अरबी का, पारसी को फारसी का, और सबको हिन्दी का ज्ञान होना चाहिए। हिन्दुओं को अरबी
एवं कुछ मुसलमानों एवं पारसियों को संस्कृत सीखनी चाहिए। उत्तरी और पश्चिमी हिन्दुस्तान के लोगों
को तमिल सीखनी चाहिए। ..अंग्रेजी शिक्षा लेकर हमने अपने राष्ट्र को गुलाम बनाया है।.... यह
क्या जुल्म की बात है कि अपने देश में अगर मुझे इन्साफ पाना हो तो मुझे अंगेजी भाषा का उपयोग
करना चाहिए।...इसमें मैं अंग्रेजों का दोष निकालूं या अपना? हिन्दुस्तान को गुलाम बनाने वाले तो
हम अंग्रेजी जाननेवाले लोग ही हैं। ...हम सभ्यता के रोग में ऐसे फंस गये हैं कि अंग्रेजी शिक्षा बि
ल्कुल लिये बिना अपना काम चला सकें ऐसा समय अब नहीं रहा। जिसने वह शिक्षा पाई है वह उसका
अच्छा उपयोग करे। अंग्रेजों के साथ के व्यवहार में, ऐसे हिन्दुस्तानियों के साथ के व्यवहार में जिनकी
भाषा हम समझ नहीं सकते हो और अंग्रेज खुद अपनी सभ्यता से किस तरह परेशान हो गये हैं यह समझाने
के लिए अंग्रेजी का उपयोग किया जाये।’
आजादी के तुरंत बाद सरकार ने माध्यमिक शिक्षा को लेकर डॉ. ताराचंद की अध्यक्षता में एक समिति
का गठन किया। इसने अपनी अनुशंसा में कहा,- ‘माध्यमिक पूर्व एवं माध्यमिक उत्तर की कक्षाओं में
अंग्रेजी तब तक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाए जब तक विश्वविघालयों में यह अध्ययन–अध्यापन
का माध्यम बना रहे। जो छात्र सीनियर बेसिक स्तर पर विघालय छोड़ने का प्रस्ताव रखते हैं उनके
लिए अंग्रेजी ऐच्छिक विषय होना चाहिए।..... जब विश्वविघालयों में अंग्रेजी का माध्यम बनना
समाप्त हो जाए तो अंग्रेजी की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी जाए, माध्यमिक स्तर पर संघीय भा
षा न कि अंग्रेजी अनिवार्य विषय होना चाहिए।’ इसके एक सदस्य ने अंग्रेजी को किसी कारण से
अनिवार्य विषय बनाने के विरूद्ध मत प्रकट किया था।
नेशनल एसोशिएशन ऑ"फ सॉफ्टवेयर कंपनीज यानी नास्कॉम एवं मैकिन्जी ने 2005 में पेश अपनी रिपोर्ट
में कहा है,- ‘ देश को 2010 तक निर्यात से प्राप्त 60 अरब डॉलर का लक्ष्य पाने के लिए कम से
कम 23 लाख प्रोफेशनल की आवश्यकता होगी।....सूचना तकनीक एवं बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग के
क्षेत्र में नौकरियां पांच वर्षों में दोगुनी होंगी। इसके लिए हमें दोगुने प्रोफेशनन चाहिए।...भारत
को 10–12 समेकित ज्ञान नगरों की आवश्यकता है जो कि फोकस्ड ज्ञान दें। ... आरंभ से ही अंग्रेजी
भाषा में निपुण बनाने का शिक्षण दिया जाए।’
ज्ञान आयोग ने प्रधानमंत्री को दिए अपनी रिपोर्ट में अंग्रेजी को पहली कक्षा से अनिवार्य विषय के
रूप में पढ़ाए जाने की अनुशंसा की है। इसका शीर्षक ही है,’ खाई को पाटने के लिए कक्षा एक
से अंग्रेजी पढा़एं: सरकार को ज्ञान पैनल की रिपोर्ट’। इसमें लिखा है,- अंग्रेजी भाषा पर पकड़ एवं
उसकी समझ को उच्च शिक्षा तक पहुंचने, रोजगार संभावनाओं एवं सामाजिक अवसरों का मुख्य निर्धारक
है। विघालयों से निकलने वाले वैसे छात्र जिनको भाषा के रूप में अंग्रेजी का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं
मिला है, उच्च शिक्षा की दुनिया में स्वयं को अपाहिज की तरह पाते हैं। इसी तरह जो अच्छी
अंग्रेजी नहीं जानते हैं उन्हें हमारे अपने प्रमुख शिक्षा संस्थानों में स्थान पाने की प्रतिस्पर्धा में भी
कठिनाई होती है। यह अलाभकर स्थिति काम पाने की दुनिया में और बढ़ जाती है तथा
ऐसा केवल प्रोफेशनल क्षेत्रों में ही नहीं सफेद कॉलर की नौकरियों में भी होता है।
More information about the Deewan
mailing list