[दीवान] kavitakosh ka janmadin
Ravikant
ravikant at sarai.net
Sat Jul 5 12:44:38 IST 2008
दोस्तो,
कविताकोश नामक भव्य विकिया परियोजना आज अपना दूसरा जन्म दिन मना रहा है. आपमें से जिन सा
जन/सजनियों ने ये नहीं देखा है, वे अवश्य देखें. जाकर टिप्पणी दें, और अगर वक़्त व उत्साह है तो यो
गदान भी करें. कविताकोश की टीम निहायत समझदार, प्रतिबद्ध और उदार लोगों की टीम है. इस
कोश का महत्व शायद आप इस बात से आँक सकते हैं कि विकिपीडिया हिन्दी में अभी बीसेकहज़ार लेख
हैं, तो कविताकोश में भी दस हज़ार कविताएँ हैं. हज़ार रचनाएँ गद्यकोश में भी हैं, जो मेरे ख़याल से
हाल ही में शुरु हुआ है. बस मुट्ठी-भर लोग क्या-क्या नहीं कर डालते!
उन्हें ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ
रविकान्त
पनश्च: अभी मेरा बिहार जाना हुआ. वहाँ के एक क़स्बे में पाठ्यपुस्तकों की दुकान पर दसवी, बारहवीं
आदि की इतिहास, हिन्दी की किताबें उलट-पलट रहा था, तो पाठ्यक्रम में मंटो की कहानी
नया क़ानून देखकर बहुत ख़ुशी हुई. त्रिलोचन का ग़ालिब पर लिखा सॉनेट भी बेहतरीन था. उत्तर
प्रदेश वाले तो ख़ैर हिन्दी के दादा हैं ही, लेकिन यह जानकर अच्छा लगा कि जानकी वल्लभ शास्त्री
जैसे स्थानीय विद्वानों को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है. आप कविताकोश देखेंगे तो मेरा यह
इशारा समझ जाएँगे कि जो काम दिल्ली विश्व विद्यालय के प्रगतिशील हिन्दी विभाग में संभव नहीं
होता, वह इंटरनेट पर हो जाता है, या फिर स्थानीय स्तर पर - एससीईआरटी जैसी संस्थाएँ कर
दिखाती हैं.
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