[दीवान]मोहल्ला

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Wed Jul 9 21:00:53 IST 2008


मोहल्ला

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बीबीसी की आउटसोर्सिंग बंद करो! बंद करो बंद करो!!
 
Posted: 09 Jul 2008 10:25 AM CDT
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बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की हिंदी, उर्दू और नेपाली सेवा के कर्मचारियों और कार्यक्रमों को लंदन से हटाकर बड़े पैमाने पर दिल्ली, इस्लमाबाद और काठमांडू भेजने के प्रयासों का ब्रितानी सांसदों ने विरोध किया है।

ब्रितानी संसद में एक प्रस्ताव लाकर सांसदों ने सरकार से माँग की है कि वह वर्ल्ड सर्विस की आउटसोर्सिंग पर रोक लगाये।

इराक़ पर हमला करने के विरोध में लेबर पार्टी से अलग हुए सांसद जॉर्ज गैलोवे ने यह प्रस्ताव हाउस ऑफ़ कॉमन्स में रखा है, जिस पर छह अन्य सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने हिंदी सेवा के लगभग अस्सी प्रतिशत कर्मचारियों और सभी रेडियो कार्यक्रमों और ऑनलाइन सेवाओं को लंदन से हटा कर भारत भेजने का फ़ैसला किया है। उर्दू सेवा और नेपाली सेवाओं के कर्मचारियों को भी बड़े पैमाने पर इस्लामाबाद और काठमांडू भेजने की योजना है।

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की दक्षिण एशिया के पत्रकार इस योजना का जमकर विरोध कर रहे हैं, उनका कहना है कि इस क़दम से बीबीसी की विश्वसनीयता, निष्पक्षता और कार्यकुशलता पर असर पड़ेगा। बीबीसी के कर्मचारी पिछले नौ सप्ताह से हर गुरूवार को बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के मुख्यालय बुश हाउस के बाहर फूलों के साथ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

ब्रिटेन में पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट (एनयूजे) के महासचिव जर्मी डियर इस क़दम के विरोध में कहते हैं, “हम इस योजना का विरोध करते हैं क्योंकि यह ग़लत नीतियों पर आधारित है, यह नौकरियों का मामला तो है ही, लेकिन उससे कहीं अधिक वर्ल्ड सर्विस की पत्रकारिता और उसके भविष्य के लिए भी संकट है...”

एनयूजे की अर्जुम वाजेद का कहना है कि “बीबीसी वर्ल्ड सर्विस का प्रबंधन हिंदी, उर्दू और नेपाली सेवा के पत्रकारों नौकरी छोड़कर चले जाने पर मजबूर कर रहा है या फिर उनसे कहा जा रहा है कि वे भारत-पाकिस्तान या नेपाल में स्थानीय शर्तों पर कम वेतन और सुविधाओं के साथ नौकरी करें...”

संसद में रखे गये प्रस्ताव में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस और पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (पेमरा) के बीच हुए करार पर गहरी चिंता प्रकट की गयी है। सांसदों का कहना इस करार से बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की संपादकीय स्वतंत्रता पर असर पड़ा है।

एनयूजे ने इस करार पर एतराज़ करते हुए कहा था कि “किसी देश की सरकारी एजेंसी को प्रसारण से पूर्व अपने कार्यक्रम उपलब्ध कराना संपादकीय स्वतंत्रता से समझौता है...”






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