[दीवान] latter
abhishek kashyap
kashyapabhishek03 at gmail.com
Tue Jun 3 15:59:39 IST 2008
अभी परसों डेल्ही विश्वविद्यालय के समाज कल्याण सभागार मे आयोजित दलित लेखक संघ
की राष्ट्रीय संगोष्ठी मे मैंने कनकलता को पितृसत्ता मे दलित स्त्री विषय पर
बोलते देखा - सुना. मंच लूटने का हुनर जानने वाले नियमित वक्ताओं से अलग जिस
तरह उसने अपने साथ घटे हादसे को सहमी - सकुची मगर साफ-संयमित आवाज मे व्यक्त
किया, उसने बहुतों को उसकी संवेदना से जोड़ दिया . गोष्टी मे मौजूद सराय से
संबद्ध राकेश कुमार जी और संवेदनशील सामाजिक मसलों की पत्रकारिता से जुड़े
अनुज आशीष अंशु से देर तक इस मसले पर बात होती रही. अंशु ने बताया कि दिल्ली
विश्वविद्यालय के कई छात्र - छात्राएँ कनकलता की लड़ाई मे उसके साथ है .बात
निकली है तो दूर तलक जानी चाहिए! यह लड़ाई आगे बढ़नी ही चाहिए. नागरिक समाज मे
ऐसे लोगों को कैसे बर्दास्त किया जा सकता है !
अभिषेक कश्यप
३ जून २००८
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