[दीवान]...और बजट का इंतजार कौन करता है
reyaz-ul-haque
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Sat Mar 1 01:31:43 IST 2008
...और बजट का इंतजार कौन करता
है<http://hashiya.blogspot.com/2008/03/blog-post.html>
सुष्मिता
यह साफ दिखता है कि पी चिदंबरम ने विदेशी पूंजी के लिए जो रास्ते खोल कर रखे
हैं, यह बजट उसी रास्ते पर आगे बढनेवाला है. आर्थिक सर्वेक्षण का कहना है कि
वृद्धि दर को बरकरार रखना एक बडी चुनौती है, क्योंकि पहले से यह बात कही जा रही
है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सुनहरे दिन अपने आधार पर खडे होने के बजाय विदेशी
कारकों पर ज्यादा निर्भर हैं. पिछले साल भी वृद्धि दर का सबसे अधिक फायदा
कारपोरेट सेक्टर को मिला था, लेकिन सरकार ने इस सेक्टर को इस बार भी कर वृद्धि
से मुक्त रखा है.
इस बार तो सरकार के लिए वृद्धि दर को बनाये रखना ही सबसे बडी चुनौती है, और
इसलिए वह कारपोरेट टैक्स नहीं बढा रही है, क्योंकि इसी की बुनियाद पर वृद्धि दर
को इस स्तर पर बनाया रखा जा सकता है.
देश में व्याप्त कृषि संकट मुख्यतः विदेशी पूंजी के साथ स्पर्धा और रियायतों के
खात्मे की वजह से पैदा हुआ है. इसलिए अगर कृषि को संकट से निकालना है तो
किसानों को तात्कालिक राहत के बतौर समर्थन मूल्य ज्यादा दिया जाना चाहिए था.
अल्पकाल में किसानों की समस्याओं का समाधान यह सरकार नहीं कर सकती है, क्योंकि
यह खुद वैश्वीकरण की पैरोकार है, जो किसानों के संकट का मूल कारण है. ग्रामीण
अधिसंरचना में खर्च का जो प्रावधान है, वह किसानों को राहत देने के लिए कम और
गांवों को बाजार में बदल देने के लिए ज्यादा है, ताकि कारपोरेट घरानों की पहुंच
में हरेक गांव आ जाये.
किसानों की कर्जमाफी का फायदा मूल रूप से बडे किसानों को ही मिलना है, क्योंकि
छोटे और मध्यम किसान कर्जों के लिए आज भी गैर संस्थागत स्रोतों पर ही सबसे
ज्यादा निर्भर हैं. अकेले कर्ज माफी की प्रक्रिया किसानों को संकट से बाहर नहीं
निकाल सकती है, क्योंकि सरकार ने पहले ही खाद्यान्नों की उपज के बजाय
हॉर्टिकल्चर को प्रोत्साहन देना शुरू कर दिया था, ताकि किसान कारपोरेट जगत के
लिए कच्चा माल तैयार कर सकें.
राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना से जिस अनुपात में नये जिले जोडे गये हैं, उस
अनुपात में आवंटन अपर्याप्त है. वैसे भी रोजगार गारंटी अधिनियम किसानों को
बेहतर जीवन देने के बजाय डिमांड ड्राइव बनाये रखनेवाला है. इस योजना के तहत दी
जानेवाली न्यूनतम बढायी जानी चाहिए. कृषि को संकट से निकालने के लिए किसानों को
सिंचाई की सुविधा, अधिक समर्थन मूल्य, सस्ते आयातित कृषि उत्पादों के साथ
स्पर्धा में बाजार में टिके रहने के लिए संरक्षण और बडे किसानों पर टैक्स आदि
के कदम जरूरी हैं.
देश भर में बेरोजगारी का संकट बढ रहा है. कारपोरेट कल्चर बेरोजगारी बढायेगा ही.
देश में क्षेत्रीय तौर पर असमान औद्योगिक विकास के कारण रोजगार के अवसर कुछ ही
क्षेत्रों तक सीमित हैं. इसके कारण क्षेत्रीय दुर्भावना बढेगी और कुल मिला कर
इससे अर्थव्यवस्था को नुकसान ही होगा.
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REYAZ-UL-HAQUE______________________________
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