[दीवान]हिन्दी फिल्मों के ज्यादातर अभिनेता राजनीति में हो जाते हैं गुम

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Wed Apr 8 12:50:50 IST 2009


हिन्दी फिल्मों के ज्यादातर अभिनेता राजनीति में हो जाते हैं
गुम<http://vinitutpal.blogspot.com/2009/04/blog-post_07.html>
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 *दक्षिण के स्टारों की बजती है धुन*
अभिनेता राजनेता तो बन जाते हैं लेकिन राजनीति में सक्रिय भागीदारी की कमी उनकी
काबिलियत पर सवाल खड़े करती है। हिन्दी फिल्मों के अभिनेताओं की तूती आम जनता के
बीच जमकर बोलती है लेकिन राजनीति की रपटीली राहों में वे खो जाते हैं। अभी तक
मुट्ठी भर अभिनेता ही ऐसे हुए हैं जिन्हें केन्द्रीय कैबिनेट में शामिल होने का
मौका मिला है। वहीं, दक्षिण भाषाओँ की फिल्मों के अभिनेताओं की लोकप्रियता और
कामकाज का आलम यह है कि उन्होंने मुख्यमंत्री जैसे पद पर पहुँचने के साथ-साथ
वर्षों तक जनता के दिलों पर शासन भी किया है।
कुछ समय पहले संजय दत्त का राजनीति में उदय हुआ। समाजवादी पार्टी ने उन्हें
लखनऊ से उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया लेकिन वैधानिक आधार पर खड़े नहीं उतरने के
कारण उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा देने के बाद नफीसा अली को टिकट दिया गया है।
इससे पहले भी लखनऊ की सीट पर समाजवादी पार्टी ने मुजफ्फर अली को दो बार लोकसभा
का टिकट दिया लेकिन वह जीत नही पाए। राजबब्बर भी समाजवादी पार्टी के टिकट पर
सांसद बने, हालाँकि बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ दी। फ़िल्म अभिनेत्री जयाप्रदा
भी उत्तरप्रदेश के रामपुर सीट से सांसद बनी।
गौरतलब है कि नेहरू-गांधी परिवार से निकटता के कारण अमिताभ बच्चन इलाहाबाद से
सांसद तो बने लेकिन जल्द ही राजनीति से उनका मोहभंग हो गया। आपातकाल के दौरान
देवानंद ने अपनी पार्टी बनाकर राजनीति में प्रवेश किया लेकिन आखिरकार फिल्मी
दुनिया में वापस हो गए। हिन्दी फिल्मों की मायावी दुनिया से निकलकर वैजंतीमाला,
राजेश खन्ना, जया बच्चन, हेमामालिनी, धर्मेन्द्र, पूनम ढिल्लन और गोविंदा ने भी
संसद की राह देखी है। सुनील दत्त, विनोद खन्ना, शत्रुघ्न सिन्हा ऐसे अभिनेताओं
में शुमार रहे जिन्हें कैबिनेट मंत्री बनने का मौका मिला। हालाँकि नरगिस दत्त
और शबाना आजमी को राज्यसभा का सदस्य बनने का मौका मिला।
हिन्दी फिल्मों के अभिनेताओं के विपरीत दक्षिण भारत की फिल्मों के अभिनेताओं ने
फिल्मों के साथ-साथ देश की राजनीति के इतिहास में जमकर जलवा बिखेरा है। उनमें
कई को अपने-अपने राज्य में सत्ता भी हासिल हुई है। एमजे रामचंद्रन ऐसे पहले
अभिनेता रहे जिन्हें पहली बार किसी राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी मिले। वह
५० का दशक था। जयललिता का फिल्मी परदे से हटकर राजनीति में उदय हुआ और वे
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री हैं। यही इतिहास करूणानिधि का भी है। दक्षिण फिल्मों
के एक अन्य अभिनेता एनटी रामाराव ने अपनी काबिलियत की बदौलत न सिर्फ़
आँध्रप्रदेश की राजनीति बल्कि देश के राजनीति को भी प्रभावित किया। इसके अलावा,
रजनीकांत, चिरंजीवी, विजयकांत, राजकुमार आदि ने भी फिल्मी दुनिया से आकर
राजनीति में भी जलवे बिखेरे और उनकी लोकप्रियता अपार है।
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