[दीवान]यह खबरनविशी है या मख्खनबाजी
brajesh kumar jha
jha.brajeshkumar at gmail.com
Sat May 23 01:14:34 IST 2009
*यह खबरनविशी है या मख्खनबाजी*
डा. मनमोहन सिंह ने जब देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तो खबर आई कि उन्होंने
अंग्रेजी में शपथ ग्रहण किया। न्यूज चैनल देखने वाले कई लोग भी इसका सीधा
प्रसारण देख रहे होंगे। लेकिन, देश की एक निजी समाचार एजेंसी की हिंदी इकाई की
तरफ से खबर कुछ यूं जारी हुई-
*
>
> “ डा. मनमोहन सिंह ने लगातार दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में
> शुक्रवार को शपथ लेकर एक बार फिर देश की बागडोर अपने हाथों में थाम ली है।
> राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने उन्हें पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई।
> उन्होंने पहले हिन्दी और फिर अंग्रेजी में शपथ ली।”
*
* *
इंट्रो की अंतिम पंक्ति काबिलेगौर है। सभी ने सुना-देखा की डा. सिंह ने शपथ के
लिए जिस भाषा का उपयोग किया वह अंग्रेजी थी। हिन्दी-अंग्रेजी का मामला न बने
इसलिए शायद तान छेड़ा गया कि शपथ लेते समय डा. सिंह ने हिन्दी भाषा का भी
प्रयोग किया। अब जिस आम जनता के वास्ते खबर लिखी गई है वही फैसला करे यह
खबरनविशी है य़ा फिर शुरू हो गई मख्खनबाजी।
इस पंक्ति के लेखक को खूब याद है कि उक्त एजेंसी में ही एक सही और पुख्ता खबर
देने पर उसे क्या कुछ नहीं सुनना पड़ा था। हिन्दी सर्विस के कर्ताधर्ता ने
वेबसाइट से खबर तक हटवा दी थी। जबकि वह निर्देशानुसार था। आखिरकार मैंने
संस्थान को छोड़ना ही बेहतर समझा था या यूं कहें की हटा दिया गया था। आज भी उस
खबर की एक कॉपी मेरे पास है।
दोनों खबरों को एक साथ आपके नजर डालूंगा। क्योंकि, सही फैसला तो जनता जनार्दन
के हाथों ही होगा।
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