[दीवान]Fwd: प्रभाष जोशी का जाना जिस अखबार के लिए खबर नहीं
vineet kumar
vineetdu at gmail.com
Sun Nov 8 11:07:11 IST 2009
---------- Forwarded message ----------
From: vineet kumar <vineetdu at gmail.com>
Date: 2009/11/8
Subject: Re: [दीवान]प्रभाष जोशी का जाना जिस अखबार के लिए खबर नहीं
To: avinash das <avinashonly at gmail.com>
दीवान के साथियो
पोस्ट लिखे जाने के तुरंत बाद ही गिरि की तरफ उसका लिंक बढ़ाया। गिरि ने कुछ ही
लाइन पढ़ने के बाद एकदम से चैटबॉक्स पर लिखा- भइया। नवभारत ने अभय कुमार दुबे
का संस्मरण तो छापा ही है। इसलिए यह कहना कि प्रभाष जोशी पर एक लाइन की भी खबर
नहीं है,गलत होगा। उसके बाद उसने अखबार में छपी वो पूरी लाइन फोन पर ही सुना
डाला। मैं इस बात से परेशान था कि कहीं कुछ गलत तो नहीं लिख गया। मैंने भी कल
के नवभारत टाइम्स को अपने स्तर से खंगाला था लेकिन मुझे कहीं भी खबर नहीं दिखी।
इस मसले पर पोस्ट लिखे जाने के बाद गिरीन्द्र और अविनाश से मेरी लगातार बात
होती रही। चैटबॉक्स पर अविनाश ने अभय कुमार दुबे के संस्मरण का लिंक भेजा जिसे
कि मैंने शीर्षक के साथ एचटीएम करके लगा दिया है। माफी के साथ इऩ दोनों का
बहुत-बहुत शुक्रिया।
लेकिन अभी भी आपसे अनुरोध है कि आप इस संस्मरण को पढ़े और अपनी प्रतिक्रिया
जाहिर करें कि क्या इसके जरिए पूरे अखबार में प्रभाष जोशी के निधन की खबर नहीं
छापे जाने के विकल्प के तौर पर पढ़ा-समझा जा सकता है? क्या ऐसा करना अखबार की
चूक भर है?
एक बार फिर माफी के साथ
विनीत
2009/11/8 avinash das <avinashonly at gmail.com>
> किसके सौजन्य से ये जानकारी मिली, मुझे लगता है ये बताना आपकी विनम्रता को
> अधिक रेखांकित करेगा।
>
>
> 2009/11/8 vineet kumar <vineetdu at gmail.com>
>
>> नोटः- 7 नवम्बर के नवभारत टाइम्स ने प्रभाष जोशी को याद करते हुआ अभय कुमार
>> दुबे का संस्मरण छापा है- वह खनक अभी भी बजती है<http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/5204172.cms>।
>> अब सवाल है कि क्या इसे ही खबर के तौर पर पढ़ा-समझा जाना चाहिए और इस बात का
>> संतोष कर लिया जाना चाहिए कि,कोई बात नहीं चाहे किसी भी रुप में हो,याद तो किया
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