[दीवान]हुजूर! यह विकास का मतलब क्या होता है?

reyaz-ul-haque beingred at gmail.com
Wed Aug 4 17:17:16 IST 2010


*भारत समेत तीसरी दुनिया के अर्धउपनिवेशों के लिए विकास का क्या मतलब है? सिर्फ
यह कि वे अपने संसाधनों और सस्ते श्रम को विकसित साम्राज्यवादी देशों के
बहुराष्ट्रीय निगमों के मुनाफे और अपार लालच के लिए उन्हें सौंप दें. और इन
कथित विकासशील देशों में लोकतंत्र का क्या मतलब है?  यह कि अपने संसाधनों की
लूट का विरोध कर रही अपनी जनता को संसद में बनाए कानूनों के जरिए बंदूक और सेना
के बल पर चुप रखना या कुचल देना. पश्चिम बंगाल से लेकर उड़ीसा, झारखंड और बस्तर
तक यही चल रहा है. पूरे भारत में और पूरी दुनिया में विकास और लोकतंत्र के नाम
पर पर जो हो रहा है उसके निहितार्थ क्या हैं? इससे किनको फायदा हो रहा है?
जाने-माने नृतत्वशास्त्री फेलिक्स पैडेल और समरेंद्र दास की यह शोधपरक रिपोर्ट
हमें इसका ब्योरा देती है. इसे हम पानोस दक्षिण एशिया
<http://www.panossouthasia.org/>की पुस्तक बुलडोजर और महुआ के फूल  से साभार
पेश कर रहे हैं. *
*फ़ेलिक्स पैडेल और समरेन्द्र दास: * उड़ीसा में अल्युमिनियम की तलाश का नतीजा
सांस्कृतिक जनसंहार के रूप में सामने आया है. विस्थापन ने जहाँ एक ओर आदिवासी
समाज की संरचना की रीढ़ तोड़ दी है वहीं कारखानों से फैलते प्रदूषण ने इलाके से
खेती की सम्भावना समाप्त करके यहाँ के बाशिन्दों से उनकी जीविका का सबसे अहम
स्रोत छीन लिया है। चूंकि अल्युमिनियम उत्पादन को आगे बढ़ाने में हथियारों के
उद्योग का वरदहस्त है, इसलिए स्थानीय लोगों की ओर कोई ध्यान भी नहीं देता और यह
कहीं ज्य़ादा आपराधिक है।

*पूरा पढ़िएः हुजूर! यह विकास का मतलब क्या होता
है?<http://hashiya.blogspot.com/2010/08/blog-post.html>
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Nothing is stable, except instability
Nothing is immovable, except movement. [ Engels, 1853 ]
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