[दीवान]टाइम्स ऑफ इंडिया की पोल खुली
brajesh kumar jha
jha.brajeshkumar at gmail.com
Thu Aug 26 14:21:31 IST 2010
*सौदा नहीं पटा तो अभियान** ***
**
*प्रथम प्रवक्ता टीम ***
* ‘**टाइम्स ऑफ इंडिया**’ **खोजी खबरों के लिए नहीं जाना जाता। उसकी छवि सरकार
के मुखपत्र की रही है। गत **31** जुलाई को टाइम्स ऑफ इंडिया के पाठकों को नया
अनुभव हुआ। उन्हें महसूस हुआ कि अपना अखबार नए अवतार में हैं। उसने भ्रष्टाचार
के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है। **‘**टाइम्स ऑफ इंडिया**’ **जैसा बड़ा अखबार
जब खेल-कूद
के एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन की तमाम गड़बड़ियों को उजागर करने पर उतर आया तो लोगों
को चारो तरफ गड़बड़ ही नजर आने लगा। उन्हें क्या पता था कि यह वह खीझ है जो अखबार
में इसलिए प्रकट हो रही है**, **क्योंकि सौदा पटा नहीं। ***
* *
*इसका दूसरा पहलू भी देखे बिना बात साफ नहीं होगी। कॉमनवेल्थ गेम्स की आयोजन
समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी हैं। वे कांग्रेस के नेता हैं। पार्टी में उनका
महत्वपूर्ण स्थान है। वे साफ-सुथरी छवि के लिए नहीं जाने जाते हैं। भ्रष्टाचार
की खबर उनपर आसानी से चिपकाई जा सकती है।***
*क्या किसी अखबार को सौदा न पटने पर भ्रष्टाचार के अभियान से रोका जा सकता है**?
**यह तो नहीं हो सकता। लेकिन अखबार को अपने पाठकों को क्या यह सूचित नहीं करना
चाहिए कि उसकी ओर से कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन में प्रचार-प्रसार और आयोजन को
सफल बनाने के लिए एक प्रस्ताव दिया गया था जो नामंजूर हो गया। यह सूचना दे देने
से उसके अभियान में वह बल नहीं रहता जो अखबार में दिख रहा है। उदाहरण के लिए **
31** जुलाई का अखबार सामने रख सकते हैं। उस दिन **‘**टाइम्स ऑफ इंडिया**’ **ने
पहले पेज पर **‘**खास खबर**’ **दी। जिसका शीर्षक यह बताता था कि खेल के
कर्ताधर्ता लालच के वश देश के सम्मान से खिलवाड़ कर रहे हैं। उसमें केंद्रीय
सतर्कता आयोग और सीबीआई के हवाले से सभी सोलह प्रोजेक्ट में हुई धांधली की खबर
थी। लंदन से **‘**टाइम्स नाऊ**’ **की नाविका कुमार की खबर साथ में छपी थी कि
अक्टूबर **2009** में जब क्विंस बैटन रिले का समारोह हुआ तो उसका इंतजाम जिस
कंपनी को दिया गया वह एक फर्जीवाड़ा था। उसके लिए कोई टेंडर आमंत्रित नहीं किया
गया। उस सामारोह में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल भी मौजूद थी। जिस ए.एम. फिल्म्स
को प्रबंध करना था उसे एक करोड़ अड़सठ लाख रुपए का ठेका दिया गया था। अगले दिन
पहली अगस्त को टाइम्स ऑफ इंडिया के पहले पेज पर जो खबरें छपीं**, **उनमें
खासतौर पर भारतीय उच्चायुक्त के हवाले से कहा गया था कि सुरेश कलमाड़ी का दावा
सही नहीं है। सुरेश कलमाडी ने दावा किया था कि ए.एम. फिल्म्स को ठेका देने में
किसी तरह की गड़बड़ी नहीं की गई।***
* *
*एक तरफ **‘**टाइम्स ऑफ इंडिया**’ **अभियान चला रहा था**, **क्योंकि उसे मनचाहा
ठेका नहीं मिला। लेकिन **‘**हिंदुस्तान टाइम्स**’ **ने एक अगस्त को **‘**टाइम्स
ऑफ इंडिया**’ **के जवाब में सुरेश कलमाडी का इंटरव्यू छापा। उस लंबे इंटरव्यू
में आरोपों पर सफाई है। **‘**हिंदुस्तान टाइम्स**’ **के मनीष तिवारी की रिपोर्ट
भी बताती है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहा है।
आरोप तो आरोप ही है। उसे फैसला के रूप में तभी पेश किया जाता है**, **जब वह
किसी खास मकसद से किया जा रहा हो। अगस्त महीने में करीब रोज टाइम्स ऑफ इंडिया
ने तैयारी में किए जा रहे भ्रष्टाचार और घटिया तैयारी पर खबरें छापता रहा। **‘*
*टाइम्स ऑफ इंडिया**’ **अपने पाठक को **54 **पेज का अखबार देता है। वह दो
हिस्से में होता है। पहले हिस्से में **32 **पेज रहता है। इन **32 **पेजों में
औसतन छह पेज पर अखबार ने खेल की तैयारी में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार को जगह दी।***
* *
*पूरी खबर के लिए प्रथम प्रवक्ता के 16 सितंबर वाले अंक को देखें।***
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