[दीवान]जातिवाद को बाजार बरकरार रखेगा और बेचेगा
reyaz-ul-haque
beingred at gmail.com
Thu Feb 4 19:21:50 IST 2010
जातिवाद को बाजार बरकरार रखेगा और बेचेगा
<http://4.bp.blogspot.com/__ZySD_hi8E4/S2rPi7443XI/AAAAAAAACC0/NiLyOhuGbAo/s1600-h/Lakshman+Gaikwad.jpg>
*उचक्का नाम से आई अपनी आत्मकथा के जरिए लक्ष्मण गायकवाड़ ने हिंदी पाठकों के
बीच अपनी पहचान बनाई. मूलत: मराठी मे लिखनेवाले गायकवाड़ एक और पुस्तक
पथरकटवाभी हिंदू में अनूदित हो चुकी है. कभी राजनीति के जरिए दलितों की
मुक्ति के लिए
कोशिश करनेवाले गायकवाड़ का मानना है कि राजनीति अब पूंजी बनाने का साधन हो गई
है और उससे नए राजे-महाराजे पैदा हो रहे हैं. 1947 के बाद से हर तरह की
सुविधाओं से वंचित खानाबदोशों के अधिकारों के लिए वे अभी संघर्ष कर रहे हैं. वे
चाहते हैं कि उन्हें नागरिकता मिले, राशन कार्ड दिए जाएं. उनका अपना एक गांव हो
और वे आजादी से जी सकें. इस पर हाल में मराठी में उन्होंने एक किताब ‘हे
स्वातंत्रे कोणा आचे’ (यह आजादी किसकी है) लिखी है. उनसे हुई मेरी इस अनौपचारिक
बातचीत के कुछ अंश
तहलका<http://www.tehelkahindi.com/mulakaat/sakshatkar/506.html>पर भी
प्रकाशित हुए हैं.
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*पूरा पढ़िए : **जातिवाद को बाजार बरकरार रखेगा और
बेचेगा.*<http://hashiya.blogspot.com/2010/02/blog-post.html>
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El pueblo unido jamás será vencido
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