[दीवान]देश मेरा रंगरेज ए बाबू …..रंग-रंगीला परजातंतर
Rakesh Singh
rakeshjee at gmail.com
Wed Jul 7 11:58:56 IST 2010
प्रकाश, रविकांत तथा दीवान के तमाम दोस्तों को सलाम. ये फिल्म इसलिए भी देखिए
कि पहली बार हम भी इस फिल्म में नजर आने वाले हैं, बशर्ते एडिटरों ने कैंची न
चला दी हो तो. [?] अनुषा, महमूद और दानिश को ढेर सारा मुबारकबाद. हर लिहाज़ से
एक जरूरी फिल्म. भैया हम तो देखे जाएंगे और अपने यार दोस्तों को ले जाएंगे.
महमूद, अनुषा और दानिश की रचनात्मकता के हमेशा कायल रहे हैं इसलिए भी इसे
देखना-दिखाना चाहता हूं.
पीपली लाइव जिंदाबाद !
शुभकामनाएं
राकेश
[?]
2010/7/7 ravikant <ravikant at sarai.net>
> शुक्रिया, प्रकाश! मैं सोच ही रहा था कि कोई प्रचार शुरू करे कि हम कैसे करें
> कि ये आमिर ख़ान के साथ हमारा भी होम-प्रोडक्शन ठहरा। वैसे आमिर ख़ान साहब तो
> हरकत में आ ही गए हैं, और उनकी पहुँच की हम क्या खाकर बराबरी करेंगे। बहरहाल,
> ये फ़िल्म इसलिए भी देखी जानी चाहिए कि एक और गाना बड़ा सटीक बैठ रहा है, हमारे
> समय पर: 'सैंया तो खूबे कमात हैं, महँगाई डायन खाए जात है", जो यूट्यूब पर
> बाक़ी टीज़रों के साथ मौजूद है:
>
> http://www.youtube.com/results?search_query=PEEPLI+LIVE&aq=f
>
> ये गाना पारंपरिक कीर्तन-शैली में चौपाल पर गाया जा रहा है, और दृश्य में जमता
> है।
>
> अनूषा, महमूद और दानिश को हमारी शुभकामनाएँ। 'पायरेसी' की चिन्ता करने की
> स्थिति में अगर हम आ गए तो समझेंगे कि हमारी फ़िल्म हिट हो गई! वैसे हम हॉल में
> ही जाकर ही देखेंगे।
>
> रविकान्त
>
> Prakash K Ray wrote:
>
>> बहुत बहुत दिनों के बाद ऐसी कोई फ़िल्म आ रही है जिसका इंतज़ार इतनी बेसब्री
>> से मैं कर रहा हूँ. यह फ़िल्म है 'पीपली लाईव'. मुझे पक्का भरोसा है कि यही
>> इंतज़ार वे सब लोग कर रहे हैं जिन्होंने महमूद फ़ारूक़ी, दानिश हुसैन और अनुषा
>> रिज़वी के दास्तान गोई सुनी है, यह इस टीम की पहली फ़िल्म है जिसे अनुषा
>> निर्देशित कर रही हैं; जिन्होंने मैसी साहब, मुंगेरी लाल के हसीं सपने, मुल्ला
>> नसीरुद्दीन से लेकर सलाम बॉम्बे, लगान, वाटर तक रघुबीर यादव के अभिनय का आनंद
>> उठाया है, रघु भाई बड़े दिनों के बाद परदे पर दिखेंगे इस फ़िल्म में; जिन्होंने
>> हबीब तनवीर के 'नया थियेटर' के नाटकों में रंगमंच के अलहदा रूप का दीदार किया
>> है, इस फ़िल्म के कलाकारों की बड़ी संख्या इसी मंडली से हैं और हबीब
>> तनवीर-मोनिका तनवीर की बेटी नागिन तनवीर ने इस फ़िल्म में एक गीत गाया है और
>> उसे संगीतबद्ध भी किया है जो मध्य प्रदेश के गोंड आदिवासियों के संगीत पर
>> आधारित है. दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय और जामिया
>> मिलिया इस्लामिया से जुड़े लोगों के लिये गौरव की बात है कि अनुषा दिल्ली
>> विश्वविद्यालय और जामिया की पढ़ीं हैं तो फ़िल्म की एक मुख्य कलाकार शालिनी
>> वत्स जे एन यू की हैं. दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एन एस डी) के कई
>> कलाकार हैं. पूना फ़िल्म इंस्टीट्युट से प्रशिक्षित कई लोगों ने इस फ़िल्म के
>> तकनीकी पक्ष को संभाला है. फ़िल्म की ख़ासियतों की लम्बी फ़ेहरिस्त में यह बात
>> भी है कि देश के सबसे लोकप्रिय संगीत-समूहों में से एक इंडियन ओशन ने संगीत में
>> योगदान दिया है तो वहीं विश्व-भर में नामचीन मैथिअस डुप्लेसी ने पार्श्व-संगीत
>> दिया है. लेकिन जिस गाने के कुछ सेकेंडों के टीज़र ने तहलका मचा दिया है उसे
>> रघु भाई के साथ गाया है बडवाई गाँव के बाशिंदों ने- सखी सैंया तो बहुत ही कमात
>> है... इस गाने के शब्द भी गांववालों के ही हैं. फिर इस फ़िल्म में नसीरुद्दीन
>> शाह भी हैं जिनके चाहने वालों की तादाद बहुत बड़ी है. कुछेक को छोड़ दें तो
>> फ़िल्म का अनुभव लगभग सारे कलाकारों के लिये पहला था. निर्देशिका अनुषा के लिये
>> भी. फ़िल्म की कहानी ग़रीब किसानों के दुःख और उनके प्रति सरकार तथा मीडिया के
>> साथ-साथ शहर के लोगों की उदासीनता या नासमझी या उपेक्षा का बयान है. इस पूरे
>> तमाशे के निर्माता हैं आमिर खान, अपनी पत्नी किरण खान और रोनी स्क्रूवाला के
>> साथ, यानि पैसा इन्होंने लगाया है.
>>
>> पीपली लाईव इसलिये भी एक ज़रूरी फ़िल्म है कि यह हमारे समय की सबसे बड़ी
>> त्रासदी की एक कथा कहती है. ग्रामीण भारत भयानक तक़लीफ़ से गुज़र रहा है.
>> किसानी बरबाद है, आर्थिक तंगी से लोग शहरों की ओर पलायन के लिये मजबूर हैं.
>> सरकार और राजनेताओं का रवैया किसी से छूपा नहीं है. मुनाफ़ाखोर बनिए और लालची
>> कॉरपोरेट सबकुछ हड़प जाना चाहते हैं. मध्यवर्ग और मीडिया के अपने स्वार्थ हैं.
>> अनुषा कहती हैं कि फ़िल्म बनाने के लिये उन्हें कोई ख़ास रिसर्च की ज़रुरत नहीं
>> थी, सबकुछ सामने है हमारी आँखों के. मैं थोड़ा इस बात को आगे बढ़ाते हुए कहना
>> चाहता हूँ कि इस त्रासदी को जानने-समझने के लिये मुझे या किसी को फ़िल्म देखने
>> की ज़रुरत नहीं है. लेकिन ऐसी फ़िल्म बनाकर अनुषा और उनकी टीम ने बड़ा काम किया
>> है. कहते हैं ज़रूरी हो तो सच को हज़ार बार कहो और हज़ार तरीकों से कहो. पर
>> बॉलीवुड समय से कतरा कर चलता है. वह उन मुद्दों पर बात नहीं करता जिनसे समाज
>> दो-चार होता है. अगर फ़िल्में बनती भी हैं तो बड़े सतही और अगंभीर अंदाज़ से.
>> यह तो फ़िल्म देखने के बाद ही पता चलेगा कि इसमें क्या है और कैसे है लेकिन इस
>> हिम्मत के लिये पीपली लाईव की टीम बधाई की पात्र है. और यह हिम्मत बॉलीवुड के
>> आउट साईडरों की इस टीम ने की है जिसकी धूरी बने हैं आमिर खान-हिंदी सिनेमा का
>> एक बड़ा नाम.
>>
>> इस फ़िल्म से बॉलीवुड के नए युग के आरम्भ की सूचना मिलती है जिसकी झलक हालिया
>> कुछ ऐसी ही छोटी फिल्मों में दिखी है. और यह सबसे बड़ी वज़ह है इस फ़िल्म को
>> लेकर मेरे उत्साह की. पीपली लाईव में शहरी रंगमंच, लोक-कला, प्रशिक्षित
>> तकनीशियन, देहाती कलाकार, अपने पटकथा को लेकर उत्साहित लेकिन फ़िल्म के किसी
>> अनुभव से अछूती निर्देशिका, फ़िल्म और संगीत और तकनीक को समझने वाले, फ़िल्म
>> उद्योग के सबसे बड़े खिलाडियों में से एक, मनोरंजन उद्योग की बारीकियों को
>> समझने वाली प्रोफेशनल कंपनी---- इतने सारे घटक जुट सकते हैं और एक सुंदर
>> फ़िल्म बन सकती है. यह फ़िल्म और लोगों को ऐसे ज़रूरी विषयों को खंगालने को
>> उकसायेगी, रंगमंच और लोक-कलाओं में भरोसे को बल देगी, नए लोगों को हिम्मत देगी
>> कुछ करने और नया करने की. अच्छी फ़िल्में बन सकती हैं और लोग उनका स्वागत करने
>> के लिये भी तैयार हैं. इसका प्रमाण बनेगी पीपली लाईव. निःसंदेह, एक सफल फ़िल्म,
>> एक सुंदर फ़िल्म.
>>
>> फ़िल्म तेरह अगस्त को रिलीज़ हो रही है. टिकट बुक कर लें. इस फ़िल्म को
>> थियेटर में ही जा कर देखें. पाईरेटेड या डाउनलोडेड फ़िल्म न देखें. इससे इन
>> कलाकारों का हौसला टूटता है. फ़िल्म की कुछ तस्वीरों और टीज़र के लिये आयें:
>> www.bargad.wordpress.com <http://www.bargad.wordpress.com>
>> -प्रकाश
>>
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