[दीवान]हंस के संपादक राजेंद्र यादव को एक और चिट्ठी
reyaz-ul-haque
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Mon Jul 12 19:08:31 IST 2010
हंस के संपादक राजेंद्र यादव को एक और
चिट्ठी<http://hashiya.blogspot.com/2010/07/blog-post_12.html>
*दिल्ली में होने जा रहे हंस के सालाना जलसे पर जनज्वार ने कुछ सवाल
<http://www.janjwar.com/2010/07/blog-post.html#links>उठाये थे. उन सवालों पर
ज्यादातर पाठकों ने सहमति जाहिर की. मसला जलसे पर न अटके और बात साहित्य के
सरोकारों तक पहुंचे, इसके मद्देनज़र जनज्वार अगला लेख युवा पत्रकारविश्वदीपक का
प्रकाशित कर रहा है. लेख के साथ एक तस्वीर भी प्रकाशित की जा रही है जो वामपंथी
लेखकों के मौजूदा सरोकारों की घनीभूत अभिव्यक्ति है. उम्मीद है कि लेख और
तस्वीर दोनों ही बहस को एक नए धरातल पर पहुंचाने का जरिया बनेंगी-अजय प्रकाश.
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Nothing is stable, except instability
Nothing is immovable, except movement. [ Engels, 1853 ]
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