[दीवान]मीडिया पर बहस
vineet kumar
vineetdu at gmail.com
Sun Apr 24 11:55:41 IST 2011
दीवान के साथियों
आप इधर लगातार देख रहे होंगे कि देश और समाज के नाजुक मौके( जिसमें वर्ल्ड कप
से लेकर बाबरी मस्जिद को लेकर आनेवाले फैसले तक शामिल हैं) पर मीडिया को अलग से
संतुलित और संयम बरतने की अपील की जाने लगी है। उसी मीडिया को जो सालों से ये
अपील देश की जनता से करता आया है। दरअसल खुद मीडिया के भीतर उत्पाती प्रवृत्ति
में जिस तरह से इजाफा हुआ है,सरकार सहित हमें भी भरोसा नहीं होता कि पता नहीं
घंटेभर में कैसी शक्ल में उभरकर हमारे सामने आ जाए। इसकी एक शक्ल हमें
राडिया-मीडिया प्रकरण में देखने को मिली और दूसरा पीपली लाइव जैसी फिल्मों में।
हम कचोट खाकर सिनेमा हॉल से बाहर निकलते हैं कि काश नत्था के साथ-साथ पत्रकार
राकेश भी किसी तरह जीवित रह जाता।
कथादेश का मीडिया विशेषांक,मीडिया की इसी बनती-बदलती शक्ल को चिन्हित करता हुआ
हमारे बीच आया और उसके कई लेखों ने ये प्रस्तावित किया कि जितनी जल्दी हो सके
मीडिया से हीरो कहलाने का तमगा छीन लिया जाए या फिर इतिहास का अंत,ईश्वर की
मृत्यू या विचारना का अंत की ही प्रक्रिया में 2010 की घटना के बाद मेनस्ट्रीम
मीडिया के अंत की घोषणा कर दी जाए। हम मीडिया के नाम पर बाबुओं और पीआरओ की ओर
से जारी की गई प्रेस रिलीज को पत्रकारिता मानने के लिए कब तक अभिशप्त रहेगे? ये
एक ऐतिहासिक फैसला होगा और इस फैसले के पहले जाहिर तौर पर एक लंबी बहस श्रृंखला
से गुजरने की जरुरत होगी। इन्हीं सब बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए कथादेश 25
अप्रैल,दिन सोमवार को मीडिया पर एक बड़ी बहस का आयोजन कर रहा है। जगह हम सबों
के लिए परिचित है जहां कि आने के लिए किसी बहाने की जरुरत नहीं होती लेकिन हम
जैसे लोगों के हाथ में एक बहाना होता है तो भीतर घुसने में हौसला बना रहता है
कि चलो काम से आए हैं,कोई पूछे तो ठसक से बता सकते हैं कि क्यों आए हैं? ये जगह
है सीएसडीसएस,सराय..
नीचे कार्यक्रम का विवरण चेप रहा हूं, फिर तो मिलते हैं सोमवार को..
yyy
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