[दीवान]'एक भी मिसरा सुबह की धूप से कमतर नहीं।'

shashi kant shashikanthindi at gmail.com
Sun Jul 24 16:12:46 IST 2011


मित्रो,
ई टीवी अक्सर मुशायरों का प्रसारण करता है. आज थोड़ा वक्त मिला तो ई टीवी पर
प्रसारित एक मुशायरे में इन मिसरों को सुनकर दिल को सुकून मिला. उम्मीद करता
हूँ फ़ेसबुक पर हमारे कुछ साथियों को भी इन्हें पढ़कर सुकून मिलेगा, जो ...
वगैरह-वगैरह...! पेश है -

हमको हक़बोई की आदत है तो है।
फिर ज़माने से बगावत है तो है।।

ये ज़माना जान भी ले ले तो क्या।
आपसे हमको मुहब्बत है तो है।।

तू अमीरी अपनी अपने पास रख।
मेरे घर में आज ग़ुरबत है तो है।।

मैंने खुद्दारी पे आँच आने न दी।
ज़िन्दगी बेकद्रो-कीमत है तो है।।

पता करो कि दफ़्तर में कौन दागी है।
अपना काम निकलेगा तो उसी से निकलेगा।।

वो निकला अपनी ज़िन्दगी से, तो अपनी कमी से निकला।
हमने समझा तो था उसे खुद्दार लेकिन वो तो नमकहराम निकला।।
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