[दीवान]'हंस' की रजत जयंती के अवसर पर 31 जुलाई 2011 को वाणी प्रकाशन से दो खण्डों में प्रकाशित 'हंस : लम्बी कहानियाँ' पुस्तक का लोकार्पण
shashi kant
shashikanthindi at gmail.com
Sun Jul 31 00:09:04 IST 2011
साथियो,
'सूखा' (निर्मल वर्मा) 'और अंत में प्रार्थना' (उदय प्रकाश), 'कामरेड का कोट'
(सृंजय), 'धर्मक्षेत्रे-कुरूक्षेत्रे' (दूधनाथ सिंह), 'दो औरतें' (कृष्ण
बिहारी) 'जलडमरूमध्य' (अखिलेश), 'डेढ़ सौ साल की तन्हाई' (संजीव) आदि कहानियों
ने 20 वीं सदी के उत्तरार्ध और 21 वीं सदी के शुरुआती दौर के भारतीय समाज की
'माइक्रो रियलिटी' को परत-दर-परत उघारा है और नए-नए विमर्श शुरू किए हैं.
हिंदी की बहुचर्चित साहित्यिक पत्रिका 'हंस' में प्रकाशित इन लम्बी कहानियों ने
समकालीन हिंदी कहानी को एक नया आयाम दिया है. दरअसल ये लम्बी कहानियाँ 'हंस' की
धरोहर हैं.
वाणी प्रकाशन ने 'हंस' के गौरवपूर्ण 25 वर्षों के प्रकाशन से चुनिन्दा व
सर्वाधिक लोकप्रिय लम्बी कहानियों का संकलन दो खण्डों में प्रकाशित किया है.
'हंस' की रजत जयंती के अवसर पर 31 जुलाई 2011 को शाम पांच बजे ऐवाने गालिब
सभागार में आयोजित कार्यक्रम में राजेन्द्र यादव द्वारा सम्पादित और वाणी
प्रकाशन से दो खण्डों में प्रकाशित 'हंस : लम्बी कहानियाँ' पुस्तक का लोकार्पण
किया जाएगा।
आप सभी साथी कार्यक्रम मेन सादर आमंत्रित हैं।
शुक्रिया।
वाणी प्रकाशन, दिल्ली
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