[दीवान]यादों में फड़फड़ाता है लाल माथे पर एक नीला रिबन
reyaz-ul-haque
beingred at gmail.com
Sun Jul 15 19:13:43 IST 2012
दलित, अल्पसंख्यक बस्तियों से गुजरती हुई नीले परों वाली एक लाल चिड़िया की
याद आती है आज के दिन. सुनसान सड़कों पर उभरते जुलूस की शक्ल और तनी हुई
मुट्ठियों का कोरस याद आता है. नजरों में फिर जाती है राजधानियों की कत्लगाहों
की बेचारगियां और हवा में कारतूस की गंध. यादों में फड़फड़ाता है लाल माथे पर
एक नीला रिबन.
विलास घोगरे. आप जानते हैं उन्हें.
यादों में फड़फड़ाता है लाल माथे पर एक नीला
रिबन<http://hashiya.blogspot.in/2012/07/blog-post_2084.html>
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