[दीवान]कहानी डीटीसी 212
vineet kumar
vineetdu at gmail.com
Thu Apr 4 08:36:51 CDT 2013
वो मेरी बगल की सीट पर आकर बैठ गई और थोड़ी ही देर बाद अपनी गृहस्थी की गप्प
में ऐसे रम गई कि आसपास कौन हैं, क्या हो रहा है सुध ही नहीं थी उसे. उसके
पूरे रुप को देखकर मुझे बाबा नागार्जुन की सिंदूर तिलकित भाल स्त्री का ध्यान
आ गया. सामने खड़ा उसका जीवनसाथी उसी रस में उससे बात किए जा रहा था- तुम ठीक
कह रही हो, अबकी बार पैसा आएगा न तो सकेन्ड फोलोर ठलवा ही लेते है.. वो जब बात
करता, तब वो उसकी हथेली के उपर हाथ फेरनी शुरु कर देती और बहुत प्यार से
सहलाती. और जब खुद बोलतीतो हाथ गोद में रख लेती. इस बीच हुआ ये कि बस ऐसे
हिचकोले खाने लगी कि मेरे जो हाथ आज के अखबार के पन्ने पलटने में फंसा था, आगे
की सीट के पाइप पकड़ने में लग गया और संयोग से उसके जीवनसाथी के ठीक बगल में
ही. एक बार व्यस्त हो गया तो वो पाइप पकड़े ही रहा. इस बार उसने हाथ उसकी
हथेली के उपरी हिस्से पर नहीं मेरे हाथ पर रख दिए. मैंने अपने हाथ हटाए नहीं
बल्कि बिना किसी भय के दूसरे हाथ से उसका हाथ पकड़ा और उसके जीवनसाथी के हाथ
पर रख दिया..वो थोड़े वक्त के लिए अवाक् रह गयी फिर हल्के से मुस्कराया. सॉरी
गलती हो गई और शरमा भी शायद इस बात से ज्यादा रही थी कि इसने मेरे हाथ हटाकर
इनके(जीवनसाथी) के हाथ पर रखे हैं इसका मतलब वो एकटक हमारी हरकत निहार रहे
होंगे. मैंने कहा, इसमे सॉरी कैसा, मुझे बहुत अच्छा लग रहाथा आपदोनों की बात
सुनकर.टीवी सीरियलों में धंसे रहने और मां के साथ हिन्दी सिनेमा देखने का असर
रहा है कि जब भी किसी युगल को साथ बोलते-बतियाते देखता हूं तो मुझे सास/ मां
बनने में और उसी तरह के भाव उमड़ने में दस सेकम्ड भी नहीं लगते. मन किया कहूं
जोड़ी सलामत रहे लेकिन लगा पता नहीं इसे वो कैसे लेंगे.
अच्छा, आप कहां से हैं, बिहार से और आप..हमलोग भी समस्तीपुर से है लेकिन बारह
साल से दिल्ली में ही है. आपकी शादी हो गई ? मैंने कहा नहीं,तो कर लीजिए न, तब
न कभी गलती से आप किसी और के हाथ पर अपना हाथ रख दीजिएगा तो हम हटाकर आपकी
कनिया पर रखेंगे, करजा भी तो उतारना है. अब इस दम्पत्ति को बजीराबाद पुल पर
उतरना था सो आज की मेरी इस हरकत को करजा बताकर उतर गई.(कहानी. डीटीसी 212)
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