[दीवान]जहां न्यूज चैनलों को जाना चाहिए, वहां एमटीवी पहुंच गया
vineet kumar
vineetdu at gmail.com
Wed Aug 7 23:17:45 CDT 2013
जहां न्यूज चैनलों को जाना चाहिए, वहां एमटीवी पहुंच गया
[image: sound-trippn]<http://mediakhabar.com/wp-content/uploads/2013/08/sound-trippn.jpg>एमटीवी
का शो साउंड ट्रिपन सीजन 2 पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बारीक, दिलचस्प और
एन्गेजिंग है. शो को देखते हुए पहला प्रभाव बनता है कि शोर के जरिए संगीत पैदा
करने की कोशिश में स्नेहा खनवलर उन इलाके और हाशिए के समाज में जा रही है,
जहां न्यूज चैनल स्टोरी खोजने और कवर भी कम ही जाते हैं. तब आपको लगता है कि
अगर इस शो से संगीत का हिस्सा हटा दिया जाए तो बाकी से एक अलग शो बनेंगे जिसे
कि न्यूज सेग्मेंट में डाल सकते हैं और यहीं पर आकर ये शो संगीत की दुनिया से
बहुत आगे निकलकर उस दुनिया में शामिल होता है जो कि टेलीविजन से तेजी से गायब
हो रहे हैं.
थीम पर आधारित शो की पूरी ट्रीटमेंट पर गौर करें तो काफी हद तक ये साइंस
फिक्शन और वीडियो गेम की ग्रामजेलॉजी जैसा असर पैदा करता है. आप महसूस करेंगे
कि ये शो जमीनी स्तर पर शोर,आवाज और चेहरे को उठाते हुए भी आखिर में जाकर
फिक्शन हो जाता है. ये इस शो की खूबसूरती भी है और एक किस्म का जादू भी कि
आखिर कैसे डांस स्टेप्स से, खुशियों से, चलने के अंदाज के बीच से जहां सिर्फ
भाव,शरीर के कुछ अंग और हवा गुजरती है, उनके बीच एक संगीत की भाषा बन सकती है.
लेकिन आप गोगिया सरकार के जादू की तरह ये सब टीवी स्क्रीन पर देखते हैं.
ये शो इस लिहाज से एक दिलचस्प अध्ययन का हिस्सा हो सकता है कि आदिपुर,दीमापुर
और भवई जैसे निपट गांव या मुख्यधारा के मनोरंजन उद्योग से कटे इलाके में जब
ग्लैमर का तड़का लगता है तो वो एक ही साथ कितने अलग-अलग शक्ल में सामने आता
है. म्यूजिक इन्डस्ट्री पर ट्यून,गाने,बोल और वीडियो चुराने के आए दिन आरोप
लगते हैं, वो कितने बड़े खजाने से महरुम हैं. ऐसे में शो की होस्ट और म्यूजिक
कम्पोजर स्नेहा खनवलर को संगीत की दुनिया के अलावे टीवी में इस रुप में
रेखांकित किया जाएगा कि उन्होंने धुनों की यात्रा उन इलाकों और ठिकाने के लिए
की जहां म्यूजिक इन्डस्ट्री का संगीत शोर बनकर नहीं बज रहा लेकिन जहां के
आदिम-प्राकृतिक शोर से संगीत पैदा किए जा सकते हैं.
लेकिन इस बेहद नेचुरल, आर्गेनिक दिखनेवाले इस शो में होस्ट की उंगलियां जिस
अंदाज में एचटीसी मोबाईल की टच स्क्रीन पर फिसलती है और वापस लौटने के लिए
जब-जब मारुति आल्टो के नए मॉडल में बैठती है, वो अचानक से म्यूजिक कम्पोजर और
होस्ट के बजाय इन दोनों की ब्रांड एम्बेसडर लगने लग जाती है और उतनी दूर तक ये
शो संगीत के बजाय विज्ञापन के हिस्से में चला जाता है. आपको ये बुरी तरह खटकता
है और ये जानते हुए कि ये ब्रांड इस शो के प्रायोजक हैं तो मौजूद रहेंगे ही
लेकिन इस तरह सरेआम कि दर्शक के कलेजे पर सवार और होस्ट से बहुत दूर
करके..न,न,न..होस्ट और एडीटिंग टीम को इस पर काम करने की जरुरत है.
चैनलः एमटीवी, स्टार-साढ़े तीन
(मूलतः तहलका में प्रकाशित)
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