[दीवान] (no subject)
amitesh kumar
amitesh0 at gmail.com
Wed Aug 14 16:29:33 CDT 2013
बिहार संगीत नाटक अकादमी (बिसंनाअ) में व्याप्त भ्रष्टाचार और अराजकता के
खिलाफ़ लगातार बीस दिन तक राज्य की राजधानी में संस्कृतिकर्मी सड़क पर
आंदोलनरत हों और कला-संस्कृति विभाग के हुक्मरान के कानों पर जूं तक न रेंगें, यह
बात अपने-आपमें राज्य का कला-संस्कृति के प्रति दृष्टिकोण का बयान है. बिसंनाअ
के रवैये के प्रति बिहार के कलाकारों में रोष तो पहले से था. जो 16 जुलाई 2013 की
घटना के बाद फूट पड़ा. उस दिन नाट्य दल ‘रंगश्रृष्टि’ का सामान प्रेमचंद
रंगशाला से फेंक दिया गया. रंगशाला में किसी भी दल का सामान नहीं रखा जायेगा
यह तुगलकी फरमान बिसंनाअ के सचिव ने कब-क्यों जारी की, इसका उत्तर रंगकर्मी
ढुंढने लगे. जो नोटिस चिपकाया गया है उस पर न तो नंबर है न ही किसी के
हस्ताक्षर और न ही तारीख.
'बिहार संगीत नाटक अकादमी का फार्स और समस्त संस्कृतिकर्मी'- पुंज
प्रकाश<http://rangwimarsh.blogspot.in/2013/08/blog-post_14.html>
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Amitesh
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