[दीवान]हम इस मीडिया के बीच स्त्री शोषण वर्कशॉप से रोज गुजरते हैं
vineet kumar
vineetdu at gmail.com
Fri Aug 23 11:24:00 CDT 2013
न्यूज चैनलों की सनसनी और भाषा का आम दर्शकों पर क्या असर होता है, ये
जानने-समझने के लिए रैलियों,प्रदर्शन और धरने के बीच उनके द्वारा इस्तेमाल किए
पोस्टरों पर गौर करें तो बेहतर समझ आएगा..आज जब टाइम्स नाउ पर मुंबई में
प्रदर्शन की कवरेज देख रहा था तो ऐसा लग रहा था, ये पोस्टर्स, होडिंग्स
उन्होंने खुद नहीं, चैनलों ने बांटे हों..हम दिन-रात जिस मीडिया समाज जिसमे
मीडिया छात्र से लेकर, मीडिया के बड़े-बड़े अधिकारी तक शामिल हैं से गुजरते
हैं, पता नहीं क्यों लगता है हम रोजमर्रा की जिंदगी में स्त्री यौन हिंसा,
उत्पीड़न, शोषण के वर्कशॉप से गुजर रहे हों..हमें इनके बीच ऐसी बड़ी घटना की
आशंका घेरती है जो बहुत ही खूबसूरती से दनादन यौन उत्पीड़न के खिलाफ नारे
गढ़ने में माहिर है.
[image: Photo: न्यूज चैनलों की सनसनी और भाषा का आम दर्शकों पर क्या असर होता
है, ये जानने-समझने के लिए रैलियों,प्रदर्शन और धरने के बीच उनके द्वारा
इस्तेमाल किए पोस्टरों पर गौर करें तो बेहतर समझ आएगा..आज जब टाइम्स नाउ पर
मुंबई में प्रदर्शन की कवरेज देख रहा था तो ऐसा लग रहा था, ये पोस्टर्स,
होडिंग्स उन्होंने खुद नहीं, चैनलों ने बांटे हों..हम दिन-रात जिस मीडिया समाज
जिसमे मीडिया छात्र से लेकर, मीडिया के बड़े-बड़े अधिकारी तक शामिल हैं से
गुजरते हैं, पता नहीं क्यों लगता है हम रोजमर्रा की जिंदगी में स्त्री यौन
हिंसा, उत्पीड़न, शोषण के वर्कशॉप से गुजर रहे हों..हमें इनके बीच ऐसी बड़ी
घटना की आशंका घेरती है जो बहुत ही खूबसूरती से दनादन यौन उत्पीड़न के खिलाफ
नारे गढ़ने में माहिर है.]
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2. 22 साल की फोटो जर्नलिस्ट के साथ हुए दुष्कर्म को लेकर टाइम्स नाउ पिछले कई
घंटों से लगातार उबल रहा है..उसकी देखा-देखी बाकी चैनल भी..मेरा अपना निजी
अनुभव है कि अधिकांश न्यूज चैनलों और नोएडा फिल्म सिटी जैसी मीडिया की
पवित्रभूमि पर महिला मीडियाकर्मियों के साथ जिस अंदाज में ये मर्द मीडियाकर्मी
पेश आते हैं, उन्हें लेकर बातें करते है लगता ऐसी घटनाओं की रिहर्सल चल रही
हो. आप यकीन कीजिए,यही काम अगर महिला मीडियाकर्मी के साथ कोई मीडियाकर्मी करता
तो एक लाइन की खबर नहीं चलती..अगर गलती से चल भी जाती तो जबरदस्त तरीके से
मैनेज कर लिया जाता. ऐसे सबूत हमारे बीच लिखित तौर पर है.
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