[दीवान]जब अल्का सक्सेना कर सकतीं हैं तो, फिर तो कोई भी

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Thu Aug 29 14:26:38 CDT 2013


अल्का सक्सेना जैसी सालों से टेलीविजन के लिए काम करती रही मीडियाकर्मी को अगर
सजेरियन के जरिए निर्धारित समय से पूर्व इसलिए बच्चे को जन्म देने में कुछ भी
गलत,अमानवीय और गैरकानूनी नहीं लगता क्योंकि ऐसा होने से कान्हा पैदा होंगे तो
क्या आप किसी पाखंड़ी, अंधविश्वासी, और जादू-टोने की दूकान चलानेवाले से
उम्मीद करते हैं कि समाज से ये सब खत्म हो जाएगा ? अल्का सक्सेना जैसी पुराने
पुराने मीडियाकर्मी को न्यूजरुम में इस तरह की कथा बांचने और इस घोर अमानवीय,
गैरकानूनी करतूतों को सत्यनारायण स्वामी की कथा बनाकर,रस ले-लेकर बांचने में
भले ही आनंद आता हो लेकिन वो इस बात का अंदाजा नहीं लगा पा रही हैं, कि नए
मीडियाकर्मियों के लिए क्या देकर जाएंगी. न्यूजरुम डायवर्सिटी पर बात करते हुए
अक्सर कुछ लोग इस बात पर उम्मीद जताते हैं कि अगर इसमें स्त्रियों की संख्या
बढ़ती है तो स्त्रियों के प्रति संवेदनशीलता और न्याय का स्तर भी बढ़ेगा लेकिन
अगर अल्का सक्सेना जैसे लोग ही हों तो क्या बढ़ सकेगा ? इनलोगों के पास तो
पत्रकारिता की एक महान विरासत( हालांकि ऐसा मानने में मेरी असहमति है) लेकिन
ये विरासत के नाम पर क्या देंगी, जरा सोचिए( जरा सोचिए पंचलाइन जी न्यूज से
साभार)
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