[दीवान]मन तो कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो नहीं न पढ़ा है लकीरः लप्रेक

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Sat Oct 12 13:52:33 CDT 2013


मन तो कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो नहीं न पढ़ा है लकीरः लप्रेक

छह किलो की झूठ बोलकर तुम कितनी खुश और बिंदास होकर डांस कर रही थी किनारा ?
सच में, तुम जब भी झूठ बोलती हो न, बेहद खूबसूरत लगने लगती हो..मैं तब तुमसे
ज्यादा तुम्हारी झूठ पर फिदा हो जाता हूं.
क्या मतलब लकीर, मैं समझी नहीं ?

मतलब ये कि डीजे पर कितने गाने बजे, तुम ठुड्डू पर हाथ टिकाए बैठी रही..बाकी
लोगों तुम्हें कई बार खींचा डांस फ्लोर की तरफ, तुम टस से मस नहीं हुई लेकिन
जैसे ही बजा- लक ट्व्नटी एट कुडी दा फोर्टी सेवन वेट कुडी दा..एकदम से उठकर
नाचने लग गई. परसों ही तो तुमने कमलानगर में उसे बेचारे की जिद के आगे अपना
वजन कराया था, पूरी 56 किलो की थी.
मैं तुम्हारी तरह छोटी-छोटी चीजों की हिसाब नहीं रखती, सेक्शन ऑफिसर की तरह सब
करेक्ट रखने की कोशिश नहीं करती, जो मन में आता है, करती हूं. लाइफ इस झूठ-सच
से परे भी बहुत कुछ है.
किनारा, तुम बुरा मान गई,मैंने तो बस ऐसे ही कहा था. सच में तुम बहुत प्यारी
और हॉट लग रही थी डांस करते वक्त. मैंने तुम्हारे अलावे किसी और को पूरी
पार्टी में देखा तक नहीं, चंदप्रकाश मिश्र की मीडिया लेखन किताब की कसम.

हा, हा..एक तू ही रेमंड विलियम्स और फिस्के को पढ़कर मीडिया की परीक्षाएं पास
की है, मैं तो बस चैम्पियन औऱ चंद्रप्रकाश मिश्र की ही..मैं हूं ही बोतल, डफर
और कुछ.
ओफ्फ हो, अब तुम इतने रोमांटिक मूड में कहां चंद्रप्रकाश मिश्र को लेकर बैठ
गई, लीव इट न..
ओए किनारा, कहां चल दी यार, सॉरी बाबा..तू 56 किलो की हो जा या पूरे एक
क्विंटल की, रहगी तो किनारा ही न जिस पर लहरों की ये लकीर हमेशा साथ रहेगा.
रुक न, कहां जा रही है..
मैं कहीं नहीं जा रही..ये बता कि आज व्हिसकी छोड़कर मेरे साथ वोदगा ले रहा है
या नहीं या फिर मैं कर दूं तेरी कत्ल. आधा तो तू मेरी डांस देखकर पहले ही मर
गया है.
क्या बात है किनारा. तू बड़ा बिंदास हो गई रे..तुझे मेरी बात बुरी नहीं लगी न.
लकीन, लाइफ में कई बार बुरी लगने पर भी बातों को बुरी नहीं मानते, हम ऐसा करके
उससे कई बड़ी चीजें खो देते हैं न..खैर, चल न.
इस गाने पर एक बार फिर से डांस करते हैं. उस ठुल्ले ने पैसे बनाने के चक्कर
में दस बजते ही ठीक इसी गाने पर डीजे रुकवा दिए थे..हो जाए, एक-एक पैग वोदगा
और दो-दो स्टेप- लक ट्व्नटी एट कुडी दा फोर्टी सेवन वेट कुडी दा.
किनारा ने ब्रांड न्यू बोस ऑडियो सेट उठा लिए थे और उंगलियां तेजी से टच
स्क्रीन पर इस गाने को खोजने में थिरकने लगी थी. इधर लकीर अचानर से आध्यात्म
में चला गया.
किनारा, एक बात पूछूं.
हां पूछ न, बस ये मत पूछना दृश्य माध्यम से क्या आशय है और प्रतिपादित करें कि
ये एक ठंडा माध्यम है.
हा हा..बोस की कांच टूटनेवाली झनझनाहट इस कमरे में गूंजती कि इसके पहले दोनों
के ठहाकों से कमरे में एक इंच जगह न बची थी..
किनारा, आय एम सीरियस नाउ. रियली आइ वॉन्ट टू नो. तुम जब भी किसी शादी या
रिस्पेशन में जाती हो, लौटकर अचानक से बहुत खुश हो जाती हो. आज से छह साल पहले
वाली किना..पीजी डब्ल्यू के आगे ऑरेंज कैंडी चूसनेवाली. जस्ट चेल मी न, व्हाय ?
सच कहूं लकीन. मैं जिस किसी की शादी या रिस्पेशन में जाती हूं न, वहां से
खुशियों की जमावन ले आती हो और उसे अपनी गृहस्थी में मिला देती हूं. एक बात
बता, तूझे कभी ऐसा लगा कि शादी के तीन साल हो गए, मैं पुरानी पड़ गई हूं. अपनी
आदत में, बातचीत में, अंदाज में. नहीं न, बस इसलिए कि मैं हर शादी से लौटकर ये
जमावन डाल देती हूं..
लेकिन तुम हर बार लौटकर इसी तरह गाने बजाती हो और फिर मुझे व्हिसकी के बजाय
बोदगा पीने की जिद, वो क्यों ?
वो इसलिए क्योंकि हम उस डीजे पार्टी की एक्सटेंशन अपने घर तक लाना चाहते हैं.
याद कर न, हमारी शादी कैसी हुई ? न ढोल, न बाजा, न रिश्तेदारों का आना-जाना.
तीन साल साथ कल्याण विहार में रहे, एक दिन तीन-चार दोस्तों को बुलाया और कहा,
चल तीस हजारी, दे गवाही कि हमने शादी की है..और अग्रवाल स्वीट्स के
चाट-पापड़ी, पेठे के बीच हो गई हमारी शादी और पार्टी..हम जिन शादियों में जाते
हैं, वहां कितना कुछ होता है. नाते-रिश्तेदार, खाना-पीना,मिलना-जुलना और सबसे
ज्यादा पता है मुझे क्या फैसिनेट करता है- घंटों लड़की का हाथ पकड़कर उसकी
भाभी या बड़ी बहन पकड़ी रहती है, ढांढस बंधाती रहती है, चिंता मत कर, तू जिसके
साथ जीवन बिताने जा रही है वो सच्चा सोलमेट साबित होगा..है न.

इसका मतलब है तू हर शादी में अपनी शादी का अधूरापन भरने की कोशिश करती है.
लेकिन नाच-गाना, नाते-रिश्तेदार..ये सब न करने-बुलाने का तो तेरा ही फैसला था
न और फिर तुझे कोई क्यों ढांढस बंधाता..वैसे मुझे तीस हजारी में मेरे सहित
तेरे दोस्त भी बंधा रहे थे- नर्वस मत को लकीर, जिंदगी का बहुत सही किनारा लग
जाएगा तेरी किना के साथ..
हां, सो तो है लेकिन हमारी आंखों ने, दिमाग ने सिर्फ कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो
नहीं न पढ़े हैं लकीर, विवाह और डीडीएलजे बी तो देखी है न..मन उधर भी तो चला
जाता है.
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