[दीवान]पुण्य प्रसून वाजपेयीजी आपका शुक्रिया

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Mon Oct 14 11:37:21 CDT 2013


न्यूज चैनलों से साहित्य और कविता इस कदर गायब हो गयी है कि जब कभी कोई कविता
की पंक्तियां पढ़ता है तो लगता है कि किसी दुर्लभ प्रजाति को अपनी बुलेटिन में
शामिल कर रहा है. लिहाजा हमे वो अलग और सुकून देनावाला लगता है.
शुक्रिया पुण्य प्रसूनजी..आज आपको ऑपरेशन ब्लैक दिखाते हुए धूमिल याद आ
गए..आपका चैनल सबसे ज्यादा प्रोफेशनल होने का दावा करता है. इस प्रोफेशनल होने
में कविता और साहित्य को दरकिनार करना भी शामिल है लेकिन आप जैसे थोड़े
पुराने,प्रोफेशनली परफेक्ट लोग भी जब धूमिल, मुक्तिबोध,रघुवीर सहाय की कविता
याद करते हैं तो एक तरह से नए लोगों को फिर से उस जमीन की तरफ संकेत करते हैं
जहां साहित्य और कविता भी एक प्रोफेशनल चैनल के लिए अनिवार्य है.
[image: Photo: शुक्रिया पुण्य प्रसूनजी..आज आपको ऑपरेशन ब्लैक दिखाते हुए
धूमिल याद आ गए..आपका चैनल सबसे ज्यादा प्रोफेशनल होने का दावा करता है. इस
प्रोफेशनल होने में कविता और साहित्य को दरकिनार करना भी शामिल है लेकिन आप
जैसे थोड़े पुराने,प्रोफेशनली परफेक्ट लोग भी जब धूमिल, मुक्तिबोध,रघुवीर सहाय
की कविता याद करते हैं तो एक तरह से नए लोगों को फिर से उस जमीन की तरफ संकेत
करते हैं जहां साहित्य और कविता भी एक प्रोफेशनल चैनल के लिए अनिवार्य है.]
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