[दीवान]राजेन्द्र यादव की स्वीकारोक्ति और स्त्रीवादी प्रतिबद्धता के सवाल ! संजीव चन्दन

Ashish Kumar 'Anshu' ashishkumaranshu at gmail.com
Wed Oct 16 05:46:02 CDT 2013


*राजेन्द्र यादव को हिन्दी साहित्य अपनी स्पष्ट बयानी के लिए ही जानता है। वे
अपने समग्र चिन्तन में ‘हिप्पोक्रेट’ नहीं दिखे। इसलिए श्री यादव के फेसबुक पर
साया हुए इस बयान को हमें गंभीरता से लेना चाहिए- ‘बहुत ही अफ़सोस है मुझे कि
वेब की दुनिया में मेरे और ज्योति कुमारी के संबंध को लेकर एक से एक कयास
लगाये जा रहे है. मैंने हमेशा ज्योति कुमारी को अपनी बेटी की तरह माना है। इस
सम्बन्ध में कुछ लोग गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी कर रहे है। मै उनकी भर्त्सना
करता हूँ। लोगों को सस्ती लोकप्रियता अर्जित करने के लिये ऐसी वैसी बात करने
से परहेज़ करना चाहिये।’’ अब तक के जीवन में श्री यादव अपनी बेबाकी के लिए ही
जाने जाते हैं। इसलिए यदि ज्योति और राजेन्द्र यादव के रिश्ते के संबंध जो
बाते कही जा रहीं है, वह सच होती तो निश्चित तौर पर राजेन्द्र यादव उसे
स्वीकार करते। वैसे ज्योति के मामले में उनकी अब तक की चुप्पी जरूर उन के लिए
गंभीर सवाल खड़े करती है। उम्मीद है कि नवम्बर, हंस के संपादकीय में यह चुप्पी
टूटेगी। फिलहाल जैसाकि संजीव चंदन के आलेख से जानकारी मिलती है कि कुछ लोग इस
मामले में पैसों की बात कर रहे हैं। उन्हें याद रखना चाहिए, पैसों की बात करके
वे ना ज्योति का भला कर रहे हैं और ना राजेन्द्र यादव का क्योंकि ज्योति इस
मामले में पीड़िता के साथ-साथ एक गवाह भी है। गवाह को पैसे देने की बात करना
भारतीय कानून में अपराध माना जाता है। इसलिए इस तरह की बात जो कर रहे हैं,
उन्हें बात करनी चाहिए लेकिन बात करने से पहले इस संबंध में पुख्ता जानकारी
जरूर जुटा लेनी चाहिए। माने थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए।  यहां प्रस्तुत है
संजीव चंदन का आलेखः मॉडरेटर  *
   राजेन्द्र यादव की स्वीकारोक्ति और स्त्रीवादी प्रतिबद्धता के सवाल ! संजीव
चन्दन <http://ashishanshu.blogspot.in/2013/10/blog-post_16.html>

-- 
आशीष कुमार 'अंशु'
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