[दीवान]उनकी हरकतें भी अपराध का एक हिस्सा हुआ करती हैं

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Wed Sep 11 11:29:47 CDT 2013


1. मैं रोज सैंकड़ों मर्द चेहरे के बीच से गुजरता हूं और रोज बच जाता हूं,
जैसे एक शख्स बच जाता है दंगाईयों की ही जात/बिरादरी के होने से..

2. आपने कभी गौर किया है उन तमाम ऐसे शख्स की आवाज, चुने गए शब्दों पर, वाक्य
विन्यास और जोर दिए गए पदबंधों पर जो हर आरोपी के विरोध में खड़ा है, हर
पीड़ित के पक्ष में अड़ा है..बहुत गौर करेंगे तो लगेगा..वह मसीहे के पाले से
बहुत जल्द ही छिटककर उसी आरोपी की कतार में जा खड़ा होगा.. न्याय की मांग में
उसकी हरकतें भी अपराध का एक हिस्सा हुआ करती हैं.
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