[दीवान]प्रधानमंत्री उवाच ऑन सोशल मीडिया
vineet kumar
vineetdu at gmail.com
Tue Sep 24 08:14:44 CDT 2013
1. जब तक आप सोशल मीडिया को राजनीतिक पार्टियों के लिए नई मीडिया स्ट्रैटजी और
क्रॉस कटिंग का हिस्सा मानकर नहीं समझते हैं तब तक चैनल जो बताशे बना रहे हैं,
उसे चाय में डुबो-डुबोकर खाइए.. लेकिन इतना जरुर जान लीजिए कि अभी आनेवाले समय
में सोशल मीडिया पेड न्यूज का विकल्प बनकर उभरेगा जिसका असर उसी की तरह होगा
लेकिन बदनामी की मात्रा कम होगी..अब ऐसे में कल को पार्टीवाइज सोशल मीडिया
संभाल रहे लोग पैनलिस्ट की शक्ल में स्क्रीन पर दिखें तो आश्चर्य नहीं. मीडिया
में पार्टी प्रवक्ता की जगह सोशल मीडिया प्रभारी ले सकता है..ये हो-हल्ला इसी
स्ट्रैटजी को मेनस्ट्रीम मीडिया में चर्चा में लाने के लिए जारी है..और वैसे
भी जितने सरोकारी शब्द और विचार हैं वो राजनीति में ही तो काम लाए जाते हैं.
भूल गए पीपली लाइव की नत्था योजना.
2. अगर देश की जनता सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें फैलाने और लोकतंत्र की जड़े
कमजोर करने का काम कर रहे हैं तो क्या ये जरुरी नहीं है कि सरकार और प्रशासन
की मशीनरी इससे उलट इसे काटने और कमजोर करने के लिए इसी वर्चुअल स्पेस पर
सक्रिय हो.
3. सोशल मीडिया को लेकर बयान देने का साफ मतलब है कि जो लाखों-करोड़ों रुपये
इसके पीछे चुनावी विज्ञापन की शक्ल में, वर्चुअल पार्टी वर्कर को पैसे देकर
झोंके गए है, वो अनदेखा कैसे रह जाए..इसे 360 डिग्री मीडिया पैटर्न में घुसाने
के लिए जरुरी है कि इस पर एक के बाद एक बयान दिए जाएं ताकि ये चर्चा में आ सके
और जब चर्चा में आ जाए तो लोकतंत्र के लिए खतरा करार देने में कितना वक्त लगता
है.
4. हम भारतीय हर चीज को गेरुआ और चारकोल जैसे एक ही रंग से रंगने के अभ्यस्त
है. पहले कोई सोशल मीडिया को नियंत्रित करने,सावधान और संतुलित करने की बात
करता था तो तर्क देता था लेकिन अब ये बात हमारे हुक्कराम करने लगे हैं तो मुझे
तर्क देने के बजाय एक सवाल करने का मन करता है- अगर सोशल मीडिया यही सब कर रहा
है तो आपके विज्ञापन, फर्जी अकाउंट अभियान क्या कर रहे हैं ? आप इस दलदल से
अलग कैसे हैं ?
5. अब देखिए कि जब सोशल मीडिया साम्प्रदायिकता, फासीवाद और झूठ का प्रसार करते
हैं तो देश की दिग्गज राजनीतिक पार्टियां इसकी सवारी करके चुनाव जीतने की
फिराक में है तो वो किस चीज का बढ़ावा दे रहे हैं ?्
6. हमारा लोकतंत्र बासी ब्राउन बेड है जिसे सोशल मीडिया के हाथों ने छुए नहीं
कि भरभराकर बिखर जाता है..
7. इस देश में परिवार नियोजन और सुरक्षित सेक्स के लिए वितरित कंडोम का
इस्तेमाल बच्चे गुब्बारे के रुप में खेलने के लिए करते हैं. इसे कंडोम का
सुपयोग माना जाएगा या दुरुपयोग..सोशल मीडिया को लेकर जो भसड़ मची है, बस इसलिए
पूछ रहा हूं.
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