[दीवान]कम से कम जाति विशेष से तो मुक्त हुआ झाडू
vineet kumar
vineetdu at gmail.com
Wed Apr 9 13:28:18 CDT 2014
भइया, बुरा मत मानिएगा..आप जिस तरह से झाडू रखते हैं न, ऐसे चूहड और भंगी लोग
रखते हैं..वैसे आप पीछे से कहां से आते हैं ? आपके मकान-मालिक को आपकी बिरादरी
पता है ?
मयूर विहार के घर के ओसारे के एक कोने में मैं स्वाभाविक रूप से झाड़ू खड़ी
करके रखता था. एक महिला जिससे मेरी कभी कोई बातचीत नहीं हुई, एक दिन कॉल बेल
बजाया और ये बातें कहीं. मैंने उनका शुक्रिया अदा किया और अपने मकान मालिक का
नंबर देते हुए कहा कि आप उन्हें फोन करके बता सकती हैं कि आपने धोखे से एक
भंगी को घर किराये पर दे दिया है. वो झेंप गई. ये अलग बात है कि मकान-मालिक ने
पहली और आखिरी बातचीत में जब यह जान लिया था कि मैं नॉनवेज नहीं खाता तो आगे
जाति और पीछे कहां से आते हो, कुछ नहीं पूछा. उस गुप्ता मकान मालिक के लिए
मेरा शाकाहारी होना ही पर्याप्त था. झाड़ू रखने के तरीके से आपकी जाति-बिरादरी
तय होती है.
अब जबकि एक से एक ब्राह्मण, राजपूत और सवर्ण को हाथ में, सर पर झाड़ू रखकर
रैली में चलते, झूमते और लोगों से बात करते देखता हूं तो उस महिला की बात
सोचकर हंसी आती है. क्या वो अपनी इस मान्यता तो अब तक सहेज पायी होगी और क्या
सोचती होगी टेलीविजन पर ऐसी फुटेज देखकर ? कुछ नहीं तो आम आदमी पार्टी ने इस
झाडू को जाति बंधन से तो जरुर मुक्त कर दिया.
[image: Photo: भइया, बुरा मत मानिएगा..आप जिस तरह से झाडू रखते हैं न, ऐसे
चूहड और भंगी लोग रखते हैं..वैसे आप पीछे से कहां से आते हैं ? आपके
मकान-मालिक को आपकी बिरादरी पता है ? मयूर विहार के घर के ओसारे के एक कोने
में मैं स्वाभाविक रूप से झाड़ू खड़ी करके रखता था. एक महिला जिससे मेरी कभी
कोई बातचीत नहीं हुई, एक दिन कॉल बेल बजाया और ये बातें कहीं. मैंने उनका
शुक्रिया अदा किया और अपने मकान मालिक का नंबर देते हुए कहा कि आप उन्हें फोन
करके बता सकती हैं कि आपने धोखे से एक भंगी को घर किराये पर दे दिया है. वो
झेंप गई. ये अलग बात है कि मकान-मालिक ने पहली और आखिरी बातचीत में जब यह जान
लिया था कि मैं नॉनवेज नहीं खाता तो आगे जाति और पीछे कहां से आते हो, कुछ
नहीं पूछा. उस गुप्ता मकान मालिक के लिए मेरा शाकाहारी होना ही पर्याप्त था.
झाड़ू रखने के तरीके से आपकी जाति-बिरादरी तय होती है. अब जबकि एक से एक
ब्राह्मण, राजपूत और सवर्ण को हाथ में, सर पर झाड़ू रखकर रैली में चलते, झूमते
और लोगों से बात करते देखता हूं तो उस महिला की बात सोचकर हंसी आती है. क्या
वो अपनी इस मान्यता तो अब तक सहेज पायी होगी और क्या सोचती होगी टेलीविजन पर
ऐसी फुटेज देखकर ? कुछ नहीं तो आम आदमी पार्टी ने इस झाडू को जाति बंधन से तो
जरुर मुक्त कर दिया.]
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