[दीवान]और शहर की स्पीड में हमदोनों गुम हो गए, #दरबदर दिल्ली-9
vineet kumar
vineetdu at gmail.com
Mon Jul 7 13:45:16 CDT 2014
प्रगति मैदान रेडलाइट पर खड़ी मेरी ऑटो में एक नन्हा हाथ अचनाक से घुसा और
परसों ही ugly फिल्म देखी थी तो थोड़ा घबरा भी गया- हाथ बेली की फूलमाला से
भरे हुये..भैया ले लो..
बेली की फूलमाला से मुझे दो ही बातें याद आती है- एक तो दीदियों की शादी में
उचककर उनके ससुर को पहनाने की छुटपन की ललक और दूसरी cp में घूमते हुये अपने
दोस्तों की पत्नी ओब्लिक गर्लफ्रेंड और मेरी दोस्त के लिये अपने दोस्त पर दवाब
बनाने के..ये दोनों ही बेहद खुबसूरत पल जब-तब याद आते रहते हैं..
ले लो न भैया, 100 में ...सब है..नहीं बच्चा,मुझे एक दे दो, दस ले लो..भैया
पूरे 30 हैं.1 दस में महंगे पड़ेंगें..और भाभीजी के जूडे में एक थोड़े ही न
लगेंगें..डिअर तू भाभी की चिंता छोड़, एक दे दे न..भैया पूरी ले लो न..
आगे कुछ कहता कि ग्रीन सिग्नल..दोस्त 10 की नोट गिरा रहा हूँ,जल्दी से एक माला
फेंक..उसने मेरी बात सुने बिना कहा- भैया, मैं पूरी लड़ी फेंक रहा हूँ, आगे ऑटो
रोककर उठा लेना, भाभी को कहना, इस देवर की तरफ से गिफ्ट...
मैं एक माला लेकर उसका मन रखना चाहता था और वो पूरी माला देकर मेरा दिल लेकिन
शहर की स्पीड में दोनों तेजी से गुम हो गये..
#दरबदर
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दिल्ली-9
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