[दीवान]रजत शर्मा का एनबीए का प्रेसिडेंट चुने जाने के मायने
vineet kumar
vineetdu at gmail.com
Tue Sep 30 07:57:17 CDT 2014
इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ उसी रजत शर्मा को न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन
का प्रेसिडेंट बनाया गया है जिन्होंने साल 2011 में मुंबई बम धमाका मामले
एनीबीए की ओर से एक लाख का जुर्माना लगाए जाने के बाद इस संगठन को गैरजरूरी और
मनमानी करनेवाला करार दिया था और इंडिया टीवी को इससे अलग कर लिया था.
हुआ यों था कि 26/11 के मुंबई हमले के दौरान इंडिया टीवी ने पाकिस्तान मूल की
फरहाना अली जो कि आतंकवादी मामलों की जानकार हैं और सेंट्रल इन्टलीजेंस
एजेंसी, यूएसए से जुड़ी रही हैं, उन्हें चैनल ने आतंकवादी मामलों के विशेषज्ञ
के बजाय जासूस करार दे दिया जिसका आशय था कि वो आतंकवादी गतिविधियों में शामिल
है. इंडिया टीवी ने ये इंटरव्यू रॉयटर से बिना क्रेडिट दिए प्रसारित किया था
और जिसमे फरहाना अली की छवि पूरी तरह डैमेज कर दी थी.
इस बात की शिकायत फरहाना अली ने एनबीए से की और उसके बाद इस संगठन ने एक लाख
रुपये का जुर्माना और रात के आठ से नौ के बीच लगातार पांच दिनों तक खेद की अलग
से पट्टी चलानी थी..लेकिन चैनल ने ऐसा करने के बजाय एनबीए को टीवी टुडे
नेटवर्क की जागीर बताते हुए खुद को इससे 10 अप्रैल 2009 को अलग कर लिया. बाद
में 17 जुलाई 2009 को इंडिया टीवी ने प्रेस रिलीज जारी करते हुए दोबारा से
सदस्यता लेने की घोषणा की..इस शर्त के साथ इंडिया टीवी और रजत शर्मा वापस गए
कि चैनल के तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर विनोद कापड़ी को प्रमुख संपादक की श्रेणी
में रखा जाए और रजत शर्मा को स्थायी सदस्य के रूप में स्वीकार किया जाए. एनबीए
ने ये मांगे मान ली और इंडिया टीवी की छाती चौडी रह गई.
वैसे तो अपने गठन के बाद से एनबीएन ने जिस तरह के फैलले दिए हैं और जैसी
हरकतें की हैं, उस हिसाब से देखें तो रजत शर्मा का चेयरमैन होना हैरानी की बात
नहीं है. ये आज न कल होना ही था..लेकिन ऐसे समय में जबकि उनका चैनल और स्वयं
वो खुद भी मौजूदा सरकार के बजाय उनके प्रधान सेवक के भक्त बन गए हैं..दो चीजें
तो बेहद स्षप्ट और अघोषित ही सही लेकिन तय है- एक तो ये कि एनबीए के चेयरमैन
की हैसियत से अब वो इस भक्ति को खुल्लाखेल फरुर्खाबादी बनाने में सक्रिय
होंगे. दूसरा किसी भी चैनल या कार्यक्रम को लेकर सवाल नहीं किए जाएंगे जो कि
सरकार के पक्ष में किए जाने के बावजूद पत्रकारिता के मानदंड को ध्वस्त करते
हों और उन चैनलों और खबरों को कसने की पूरजोर कोशिश होगी जो मोदी सरकार के
खिलाफ जाते हैं..कुल मिलाकर आप चाहें तो एनबीए की भूमिका आनेवाले समय में उन
चैनलों के लिए सरकारी नियंत्रण जैसी होगी जो मोदी सरकार की गतिविधियों से
असहमत होते हैं..वहीं उन चैनलों के लिए आश्वस्त करेंगे कि आप उनके नाम की चाहे
जितनी उंची सुर चाहो, लगा सकते हो..
रहा मामला इंडिया टीवी की एंकर तनु शर्मा द्वारा एफआइआर करके चैनल पर उत्पीड़न
का मामला दर्ज किए जाने का तो एबीए जैसी संस्था इस तरह की नैतिकता को कब मानता
आया है जो इंडिया टीवी मामले में अलग से माने..
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