[दीवान] (no subject)
sanjeev kumar
sanjusanjeev67 at gmail.com
Mon Dec 28 01:12:45 CST 2015
*जी एन साईबाबा के मसले पर हुई प्रेस कांफ्रेंस से लौट कर*
इन कांफ्रेंसियो के झांसे में बिल्कुल न आइयेगा, हुज़ूर
बड़ा खतरनाक है वो पहिया-कुर्सी वाला अपराधी
(हाँ-हाँ, अपराधी नहीं, अभियुक्त--एक ही बात है!)
ये बार-बार उसकी नाइंटी परसेंट डिसेबिलिटी की बात करते हैं
और भूल जाते हैं कि शहर के हर धरने-प्रदर्शन, प्रोटेस्ट-मार्च
हम-होंगे-कामयाब-टाइप हर आयोजन में
पहुंचा रहता था वह!
काहे की डिसेबिलिटी?
मुझे तो उसकी पहिया कुर्सी भी
बड़ी रहस्यमय और डरावनी लगती है, जनाब!
क्या पता कब वह जेम्स बांड की तरह
अपने हत्थे पर लगा एक बटन दबाये
और पीछे से आग छोडती कुर्सी उड़ जाए सुर्रर्र से
क्या पता कब
बेसहारे का सहारा दिखने वाली बैसाखी
एक लीवर की हरकत से
मिसाइल लांचर में तब्दील हो जाए
क्या पता कब उसके निरीह दिखने वाले चेहरे पर
एकाएक क्रूर मुस्कान उभरे
और चश्मे के पीछे से आँखें
एक बड़े हमले का इशारा कर बैठें
ऐसा खतरनाक आदमी
पिछले छह महीने से बाहर है
आप और हम सरीखे पवित्रात्माओं की इस दुनिया में
ये सोचकर ही रीढ़ में सिहरन होती है, हुज़ूर
अच्छा किया जो आपने बेल नहीं दी
उसे कतई अपने पास रखियेगा
हाजमे के लिए बड़ी मुफ़ीद चीज़ है
सुना है, बेल की शरबत अपान वायु की समस्या को दूर करती है जड़ से
और कुछ नहीं तो कम-से-कम
सुरीला और सुवासित तो कर ही देती है
आपको, सचमुच, वो शरबत दरकार है, सरकार!
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