[दीवान]प्रधानमंत्री के नाम किसान की चिट्ठी
Girindra Nath
girindranath at gmail.com
Fri Jul 3 01:16:12 CDT 2015
माननीय प्रधानमंत्री जी,
नमस्कार।
आपको तो पता ही होगा कि यह समय किसानी कर रहे लोगों के लिए धनरोपनी का है। आप
सोच रहे होंगे कि यह किसान इतनी सी छोटी बात के लिए मुल्क के प्रधान सेवक को
क्यों तंग कर रहा है। लेकिन क्या करूं, हमने आपको प्रचंड बहुमत देकर केंद्र तक
पहुंचाया है। ऐसे में आपको अपना मानकर यह पाती लिख रहा हूँ।
प्रधानमंत्री जी, इस वक्त हर जगह किसान धान की बात कर रहा है। इस वक्त हमें
अपने खेतों में पानी की जरूरत होती है ताकि धनरोपनी कराई जा सके। मेघ वैसे ही
हमलोगों से रूठा है। ऐसे में डीजल फूंक कर हम खेत में कादो कर रहे हैं ।
माननीय प्रधानमंत्री जी, आप कादो समझते हैं न ? आप जरूर समझते होंगे क्योंकि
आप सबकुछ जानते हैं। चुनाव के वक्त आपके भाषणों के हम दीवाने हुआ करते थे
क्योंकि तब आप हमलोगों की मन की बात सीधे तरीके से किया करते थे। भाषण कला में
आपसे कौन हाथ मिलाये। हम सब तब आप की हाँ में हाँ और ना में ना मिलाया करते
थे। उस वक्त अक्सर आप किसानी की बात करते थे।
याद हैं न आपको, जब आप चुनाव प्रचार के सिलसिले में पूर्णिया आये थे तब यहां
के रंगभूमि मैदान में कोसी के किसानों के लिए आपने कितना कुछ कहा था। आपको हम
सब भावी प्रधानमंत्री की नजर से देख रहे थे। जो सच भी साबित हुआ।
पूर्णिया के अपने लंबे भाषण में आपने मछली, मखाना , मक्का, पटसन आदि का जिक्र
किया था। ऐसे में कादो का अर्थ आपसे पूछना बेईमानी होगी। हम समझते हैं कि आप
सब समझते ही होंगे। इस देश में किसान की बात करना सबसे आसान काम है लेकिन उसका
दर्द समझना सबसे कठिन काम। हमें आप पर भरोसा है ..आप हमारा दर्द समझते होंगे
या समझने की कोशिश कर रहे होंगे।
तो प्रधानमंत्री जी, मैं कह रहा था कि डीजल महंगा है और हम किसान कितना पैसा
फूंके? कोसी प्रोजेक्ट का नहर है लेकिन वो भी सूखा। उसमें समय पर पानी नहीं
छोड़ा जाता। अब कहिये ऐसे में रोपा कैसे होगा ?
प्रधानमंत्री जी, इस मुल्क में हर किसी के लिए किसान ही सबसे साफ्ट टारगेट है।
हर कोई हमारी बात करता है। आप डिजिटल भारत की बात करते हैं, उसमें भी गाँव की
बातें हैं । गाँव गाँव तक फाइवर केबल नेटवर्क का जाल बिछाने की आप बात कर रहे
हैं लेकिन किसान की प्राथमिक़ता खेती बाड़ी है।
अच्छी खेती के बाद ही हम कुछ सोच पाएंगे। खेती के वक्त डिजीटल इंडिया वीक जैसी
बातें सुनकर लगता है कि कोई हमारा मजाक उड़ा रहा है। वैसे यह कोई नया काम नहीं
है। हमारा मजाक उड़ता रहा है लेकिन हमें आशा है कि आपकी सरकार ऐसा नहीं करेगी।
आप किसान के मन को मत तोड़िये आप तो रेडियो पर मन की बात करते हैं न !
प्रधामन्त्री जी, धान नहीं होगा तो चावल की मार होने लगेगी। गेहूं नहीं होगा
तो रोटी-नान की मार होने लगेगी, दाल नहीं होगा तो भोजन की थाली सुनी हो जाएगी।
आप सबके डाइनिंग टेबल के लिए भी हम सब ही मेहनत कर रहे हैं। ऐसे में हम सबका
ख्याल यदि नहीं रखा जाएगा तो देश की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी। आप तो चाय
बेचे हैं, आपने तो निचले पायदान से यात्रा आरम्भ कर इतनी ऊंचाई प्राप्त की
है.. आप किसान की पीड़ा जरूर महसूस कर रहे होंगे।
आप मुल्क के प्रधान हैं, आप मन की बात करते हैं, आप विदेश जाते हैं..। विदेश
यात्राओं की तरह एक बार गाँव-गाँव भी घूमिये न ! इसी बहाने उन गाँव की सड़क
पक्की हो जायेगी, जहां अबतक सड़क नहीं पहुंची है। बिजली भी पहुंच जायेगी।
अधिकारियों का दो -तीन दौरा हो जाएगा। पंचायतों का कायाकल्प हो जाएगा। आप भी
खेत खलिहान को नजदीक से देख पाएंगे। प्रधानमंत्री जी इस पर एक दफे जरूर
सोचियेगा।
हम सब तो यही समझते हैं कि आप सबकुछ जान ही रहे हैं। किसान को सुविधा दीजिये
प्रधानमंत्री जी ..यकीन मानिए किसान आपको और इस देश को निराश नहीं करेगा। हम
खूब मेहनत करेंगे। देश का अन्न भण्डार बढ़ा देंगे। लेकिन इसके लिए हमें समय पर
खाद चाहिए, पानी चाहिए..। आपकी सिंचाई सम्बन्धी योजना को लेकर हम सब पलक बिछाए
हुए हैं।
आप दिल्ली के विज्ञान भवन में किसानों की बात करते हैं, हमारे लिए किसान चैनल
लांच करते हैं। लेकिन फसल शानदार नहीं होगी तो हम टेलीविजन कैसे खरीदेंगे? हम
समय के साथ आगे कैसे बढ़ेंगे? जरा सोचियेगा। एक बात और, क्या आप जानते हैं कि
किसानों को फसल क्षति का मुआवजा मिलना कितना बड़ा कठिन काम है? इसका उदाहरण मैं
खुद हूँ। मार्च में गेहूं की फसल लूट गयी थी बेमौसम बारिश की वजह से लेकिन
अबतक खाते में पैसा क्रेडिट नहीं हुआ है। ये तो बानगी भर है, कहानी तो लंबी है।
अब आप ही कहिये प्रधानमंत्री जी कि एक किसान के तौर पर इस वक्त मैं धान की बात
करूं , सिंचाई व मुआवजे की बात करूं या फिर आपके साथ डिजीटल इण्डिया वीक मनाऊँ।
आपका
गिरीन्द्र नाथ झा
ग्राम-चनका
जिला-पूर्णिया
राज्य-बिहार
3 जुलाई, 2015
http://anubhaw.blogspot.in/
09661893820
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