[दीवान]मंत्री की बेशर्मी में मीडियाकर्मी भी शामिल है

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Mon Jul 6 03:42:51 CDT 2015


आप मेरी बात पर यकीन मत कीजिए लेकिन सच तो यही है कि मध्यप्रदेश का ये बेशर्म
मंत्री टेक्नीकली प्रधानसेवक का लघु संस्करण है. वो आजतक के पत्रकार अक्षय
सिंह की मौत के सवाल पर बेशर्मी से सिर्फ ये नहीं कह रहा है कि हमसे बड़ा
पत्रकार कौन है बल्कि साथ में ये भी बता रहा है कि पत्रकारों को हम क्या समझते
हैं, हमारे सामने औकात क्या है ?

याद कीजिए, प्रधानमंत्री का पत्रकारों के साथ दीवाली मिलन एपीसोड और जी न्यूज
के संपादक सुधीर चौधरी की प्रधानमंत्री के साथ सेल्फी ट्विट. सुधीर चौधरी ने
जिस अंदाज में प्रधानमंत्री के साथ सेल्फी की बात ट्वीट की और फर्स्ट ट्विट का
दावा पेश किया, क्या उसमे मध्यप्रदेश के इस बेशर्मी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
की बेशर्मी का एक हिस्सा शामिल नहीं है. जी न्यूज ने इस मिलन की जो कवरेज दी,
उसमे ये बात भी शामिल थी कि ये चैनल और संपादक की बड़ी उपलब्धि है.

<http://3.bp.blogspot.com/-RMviPeHy-aY/VZo_VjTC-xI/AAAAAAAARgQ/aKuIgO5Iuz4/s1600/Screen%2BShot%2B2015-07-06%2Bat%2B2.11.29%2Bpm.png>

आज आप इस मंत्री पर शब्दों के कोडे बरसा सकते हैं, एक के बाद एक चैनल माइक तान
सकते हैं लेकिन एक मंत्री को इस बेशर्मी तक पहुंचने में क्या सुधीर चौधरी जैसे
दर्जनों मीडियाकर्मियों ने खाद-पानी का काम नहीं किया ? आपने दीवाली मिलन के
दौरान पत्रकारों के आगे नरेन्द्र मोदी की बॉडी लैंग्वेज पर गौर किया होगा..साफ
महसूस कर रहे होंगे कि मैं सिर्फ इस देश को ही नहीं, देश के इन
संपादकों-पत्रकारों को भी चलाता हूं जिसका भरपूर प्रमाण आगे पत्रकारों ने दे
भी दिया.

नेताओं,मंत्रियों के साथ चाय-बीड़ी करने और मिलन को उपलब्धि बताने की
मीडियाकर्मियों के बीच जो आपाधापी मची रहती है, वो इनके सामने ऐसे पेश आते हैं
कि कैलाश विजयवर्गीय क्या, किसी भी दूसरे नेता-मंत्री को ये आत्मविश्वास पैदा
हो जाए कि उनके आगे पत्रकार-संपादक क्या हैं ?
मैं कल रात जयपुर में चल रहे दो दिवसीय जर्नलिज्म टॉक से होकर आया हूं. मैंने
बहुत करीब से देखा कि सेशन के दौरान आम आदमी पार्टी के राघव चढ्ढा से लोगों ने
सवाल किए, सेशन के बाद कुछ मीडियाकर्मी हाथ मिलाने-फोटो खिंचाने, कुछ देर साथ
खड़े रहने के लिए मरे जा रहे थे. सवाल इसका है ही नहीं कि कौन नेता सही है या
कौन गलत लेकिन पेशे का हवाला देकर आप उनसे दोस्ती गांठेंगे तो वो ऐसी बेशर्मी
करने का दुस्साहस बेहद स्वाभाविक है.

दूसरी बात, आप चले जाइए मीडिया की नौकरी के किसी इंटरव्यू में. बातचीत की
शुरुआत ही इस सिरे से होती है कि आप किस नेता, किस मंत्री को पर्सनली जानते
हो.. ये पर्सनली जानना साथ में चाय-शराब से आगे तक की भी हो सकती है. मैं कई
दिग्गज पत्रकारों से मिलता हूं. दस मिनट की मुलाकात में ही बता देते हैं कि
कौन नेता, कौन मंत्री उनके यहां आ चुका है और किस-किस की पार्टी में वो फैमिली
मेंबर की तरह शरीक होता है.

आज आपको कैलाश विजयवर्गीय की ये बेशर्मी बुरी लग रही है जो कि स्वाभाविक भी है
लेकिन आप कभी मीडियाकर्मियों के अपने चाल-चलन पर गौर कीजिएगा, लगेगा ये ऐसा
करने के लिए शह देते आए हैं..इस भोथरे मंत्री ने घासलेटी बेशर्मी दिखाई, बाकी
कई बारीकी से करते हैं लेकिन भाव कुछ अलग नहीं होता, प्रधानमंत्री नरेन्द्र
मोदी तक का नहीं. ‪#‎मीडियामंडी‬
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