[दीवान]लप्रेक ड्यूरिंग गुरूग्राम

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Tue Apr 12 13:06:38 CDT 2016


सुनो, तुम भी शैल से सावित्री तो नहीं हो जाओगी न ?
क्यों, हो भी गई तो तुम मेंटल क्यों हो रहे हो..आखिर मेरा सर्टिफिकेट नेम तो
सावित्री ही है न..पास्ट में लौटना बुरा तो नहीं होता न..
है तो पर पिछले चार सालों में घिस-घिसकर मुझे शैल करने में जो मेहनत लगी वो तो
सब पानी में चला जाएगा न ?
ओए बड़ेवाले सी, नाम बदल जाने से क्या मैं भी बदल जाउंगी क्या..
शायद बदल ही जाओ..वैसे शैल बोलने से तुम मुझे अपने ज्यादा करीब लगती हो..
और सावित्री बोलने से ?
सरकार, आधार कार्ड, पासपोर्ट, यूनिवर्सिटी आइडी के करीब..
मतलब चिरकुटई की हाइट ही है पाषाण..मैं अपने ऑरिजिनल नाम से सरकार के करीब हो
गई और शैल बोलने से तुम्हारे करीब..यार तू बीजेपी को लेकर इतना सिनिकल क्यों
हो जाता है..हर बात में उंगली.
शैल, सुनो न..तुम हॉस्टल जाकर मेरी दी उन सारी किताबों की पिक व्हॉट्स अप
करोगी..
कौन सी पोर्शन..?
जिन-जिन पन्नों पर हमने टू शैल, मच-मच लव टू यू..एम्बीएंस मॉल, गुडगांव लिखकर
तुम्हें दिए थे..
क्या हो जाएगा इससे ?
हम शैल और गुडगांव को आखिरी बार इकठ्ठे फील कर सकेंगे..और फिर तुम ही तो कहती
हो- पास्ट में लौटना बुरा तो नहीं होता न. हमारा पास्ट तो गुडगांव ही है न
शैल..



लप्रेक ड्यूरिंग गुरूग्राम..
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