[दीवान]दक्षिणपंथी मीडिया और राजनीति का नया किन्तु पाश्चात्य फार्मूला

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Wed Jul 20 07:46:09 CDT 2016


इन दिनों दक्षिणपंथी राजनीति ऑब्लिक प्रोपगेंडा करनेवाले लोगों में भी एक फैशन
चल गया है. वो फैशन कुछ इस तरह से कि सार्वजनिक मंचों से मुसलमानों के एक तबके
को बेहतर बताने लगे हैं, उन्हें राष्ट्रभक्त बताकर उनकी तारीफ करने लगे हैं.(
देखिए, ये वीडियो- https://www.youtube.com/watch?v=4BCYddguXhA).

तारीफ करने के बाद उतनी ही आक्रमकता से वो दूसरे तबके को गद्दार बताने के लिए
स्पेस तैयार कर लेते हैं. आपको लग रहा होगा कि ये उनकी मौलिक सोच या दिमागी
उपज है. लेकिन

सच बात तो ये है कि ये संस्कृति और परंपरा के मामले में अतीत से चाहे जितनी
खाद-पानी लें, ये फार्मूला भी उसी पाश्चात्य देश से लिया है जिसकी वो दिन-रात
जमकर आलोचना किया करते हैं.

साल 2005 के लंदन में हुए आतंकवादी हमले के दौरान मुसलमानों को दो हिस्से में
बांटकर परिभाषित करने काम का जमकर हुआ जिसमे कि मुख्यधारा मीडिया ने
प्रोपगेंडा मशीन( नोम चोमस्की के शब्द) का काम किया. उसी दौरान गेरी यंग ने द
गार्डियन में इस बिडंबना को लेकर विस्तार से लिखा. ये अच्छे मुस्लमान और बुरे
मुस्लमान का फॉर्मूला ऐसा हिट रहा कि इसे अब भारतीय राजनीति और मीडिया में
अपनाया जाने लगा है. इससे आपको दक्षिणपंथी राजनीति और पत्रकारिता करनेवाले लोग
एक स्तर पर ज्यादा उदार और समझदार लग सकते हैं लेकिन वो ऐसा करके पहले से कहीं
ज्यादा क्रूर दृश्य रचने में लगे हैं. अमेरिका के संदर्भ में तो महमूद ममदानी
की पूरी की पूरी किताब ही है.
[image: Vineet Kumar's photo.]
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