[दीवान]21 जनवरीः राष्ट्रीय रामायण दिवस, स्थापना वर्ष 2008

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Mon Jan 21 10:12:45 IST 2008


रामायण की कथा टीवी पर शुरु होते ही हमारे घर में झाडू की खपत बहुत बढ़ गयी थी।
मां खोजती रहती लेकिन कभी मिलती नहीं। हम सारे भाई-बहन तीर बनाते और स्कूल से
आते ही अपना नाम भूलकर रामायण के पात्र बन जाते। एक दूसरे के मिजाज के हिसाब से
पाट बंटता। तभी हमने जाना था कि आंख के इलाज के लिए अपने शहर में अलग से एक
हॉस्पीटल है। मेरे एक पड़ोसी दोस्त नीरज की आंख में झाडू की सीक चुभ गयी थी और
उसका वहां इलाज चल रहा था। मां का कहना एकदम साफ था कि उसने रावण बनकर भगवान
राम पर तीर चलाया इसलिए ऐसा हुआ और हम बच्चों को हिदायत देती- रामायण खेलना
लेकिन रावण फैमिली का पाट मत लेना भले ही बानर बनना पड़ जाए।
हमारे घर में टीवी भी नहीं थी। दूसरे के घर देखने जाते। लेकिन जहां हम जाते
वहां के लोग रामायण खत्म होते ही हमें बाजार से कुछ लाने भेज देते और दीदी को
घर के छोटे-मोटे कामों में फंसा लेते। कुछ नहीं हुआ तो बच्चे के साथ खेलने का
काम। बात पापा तक गयी और हमलोगों को खूब डांटा कि -कोई जरुरत नहीं है रामायण
देखने की, मर नहीं जाओगे नहीं देखने से। मैं घर में छोटा था और कमजोर भी लेकिन
थोड़ा विरोधी किस्म का। चट से स्कूल बैग लाया और एक किताब निकालकर दिखाया कि
देखिए रामायण अपने कोर्स में है और टीवी से बात सही तरीके से समझ में आती है।
फिर हडकाते हुए बोला- अगर आप टीवी नहीं खरीदते तो हममें से कोई भाई-बहन दूकान
में आपका खाना पहुंचाने नहीं जाएंगे। घर में टीवी आ गयी। और मेरे जैसे कई लोग
उस बड़े घर में टीवी देखकर त्रस्त हो चुके थे हमारे यहां आने लगे। पूरा कमरा भर
जाता और खत्म होने पर ऑडिएंस को रामभक्त जानकर मां चाय पिलाती। रविवार नौ से दस
तक सड़को पर कोई दिखाई नहीं देता. उस समय लोगों के रविवार की रुटिन रामायण से
तय होती थी। ये जीवन-शैली और कल्चरल कॉन्टेस्ट का हिस्सा हुआ करता था।
बीस साल बाद एनडीटीवी इमैजिन आज फिर रामायण लेकर आ रहा है। रात के साढ़े नौ बजे
ऑन एयर होगा। सारे चैनलों का स्लग है-लौट आए राम। न्यूज चैनलों पर स्पेशल भी चल
रहा है । एनडीवी का दावा है कि राम का नाम लेते ही अरुण गोविल का जो चेहरा याद
आ जाता है उसे यह रामायण रिप्लेस करेगा.
लेकिन हमलोग साहित्य लिखने-पढ़ने वाले जब भी किसी रचना पर बात करते हैं जैसा कि
रामायण भी हमारे लिए एक टेक्स्ट ही है तो उसे समझने का एक तरीका ये भी अपनाते
हैं कि रचना चाहे कितनी भी पुरानी क्यों न हो समकालीनता के सवालों और चुनौतियों
को वो किस रुप में देखता-समझता है. इस बीस साल में कितना कुछ बदला है- बाबरी
मस्जिद को ध्वस्त किया गया, हिन्दुओं का एक तपका जिसकी संख्या दुर्भाग्य से
अधिक है ने जश्न मनाया। अक्षरधाम पर हमले हुए और फिर बनारस पर भी हमला।
रामभक्तों ( देश में एक पार्टी हैं जिनके पास नापने की मशीन है कि कौन रामभक्त
है) को बुरा लगा। जय श्री राम पर एक ग्रुप का पेटेंट हो गया। इधर रामसेतु
परियोजना को लेकर हंगामा हुआ। चैनल की भाषा में कहें तो- दहक उठा देश। वीजेपी
के राजनीति के कटोरे में फिर सरकार ने मुद्दा डाल दिया और अब इसी बूते सत्ता
में आने की बात होने लगी है।इन सबके बीच श्रीलंका सरकार ने रिसर्च की सीडी जारी
की है औऱ रावण के पांच हवाई अड्डों सहित पचास ऐसे ठिकानों को खोज निकाला है
जिसके संदर्भ रामकथा से जुड़ते हैं और दर्शकों या फिर रामभक्तों के लिए मतलब के
हो सकते हैं। अपने प्रसूनजी समय पर खोद-खोदकर जानकारों से पूछते रहे कि- आपको
नहीं लगता कि ये सिर्फ टूरिस्ट को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है, आस्था को
बाजार में कन्वर्ट किया जा रहा था। वीएचपी के बंदे का जबाब था ऐसा करके
श्रीलंका सरकार ने हमारे दावे को मजबूत किया है कि राम का अस्तित्व था। बाकी
बाजार के लिए तो राम से जुडी कोई भी चीज तर माल तो है ही, एकदम कमाउ आइटम।
इधर गणेश- ओ माई फ्रैंड गणेशा हो गए और हनुमान सीबीएससीइ के कोर्स की पढ़ाई
करने स्कूल जाने लगे हैं, हमारी तरह होमवर्क करने लगे हैं, पहले की तरह
चमत्कारी न होकर मानवीय होते जा रहे हैं और सॉफ्ट भी, कोई कॉन्वेंट का अदना
बच्चा उन्हें हड़का सकता है।
सेज है, दो महीने में बजट आनेवाला है, लखटकिया आ गयी है, परमाणु करार का मसला
है। रावण के हवाई अड्डे जब श्रीलंका में रावण के हवाई अड्डे हैं तो अपने यहां
तो कम से कम राम के पोर्च या गैराज होंगे ही इस पर खोज होना है। एनडीटीवी को
लेफ्ट का चैनल मानकर राइट विंग के लोग जब-तब हमले करते रहते हैं। मतलब काफी कुछ
आज से बीस साल पहले से अलग है और इन सबके बीच एनडी के राम आ रहे हैं तो ये समझा
जाए कि पहले की रामायण कि पहले रामायण देखो फिर काम पर जाओ और अब कि पहले काम
कर लो तब रामायण देखो फिर से एक कल्चरल कॉन्टेक्स्ट पैदा करेगा। फिलहाल
विज्ञापन को देखते हुए आज के दिन को राष्ट्रीय रामायण दिवस मानने में कोई फजीहत
तो नहीं क्योंकि बाजार में तो सब कुछ पॉलिटकिली करेक्ट है जैसे एनडी का रामायण
दिखाना।
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