[दीवान]वो कैंची गिरीन्द्र की नहीं थी

ashishkumar anshu ashishkumaranshu at gmail.com
Fri Jan 23 12:54:45 IST 2009


*हमारा पक्ष भी तो पूछा होता* -

विनीत भाई, आप उन सब लोगों से परिचित हैं जो मीडिया स्कैन टीम के साथ जुड़े हुए
हैं. उसके बाद भी आप इस तरह का कोई लेख कैसे लिख सकते हैं? लिखने से पहले कम से
कम एक बार बात तो करते.
संपादन के मामले में उलट हुआ. यहाँ जो संपादन है वह पूरी तरह से गिरीन्द्र की
देखरेख में हुआ है. वह क़यामत की रात (जिस रात को मीडिया स्कैन पूरा हुआ) , अंक
के साथ थे. लेख जुटाने में उनके कहने पर जो मदद बन पाई हमने की. लेकिन वह लेख
भी लाकर गिरीन्द्र के झोले में ही डाला गया.  ( आपने लिखा है - अतिथि संपादक
होने के नाते गिरीन्द्र ने अपनी तरफ से लोगों को लिखने के लिए कहा। लोगों ने
उसके कहने पर लिखा भी। बाद में उसने एरेंज करके मीडिया स्कैन के लिए स्थायी रुप
से काम करनेवालों को सौंप दिया।) अपने मन की लिखने से पहले विनीत भाई आप एक बार
बतिया लेते - मुझसे बतियाने में हर्ज था तो तनिक गिरिन्द्र (09868086126) का
नंबर ही मिला लेते तो अच्छा होता.

---- आशीष कुमार 'अंशु'
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