[दीवान]किसान विरोधी है फिल्म "पीपली लाइव'
mahmood farooqui
mahmood.farooqui at gmail.com
Mon Aug 16 10:27:21 IST 2010
"waqai aapne yadi ye sab film men dikhaya hai..."
picturiya dekhi nahi hai kya aapne? Agar aap ise dekh len to aapke ghusse ko
aur hawa milegi aur tab main aap se qaide se mafi bhi mang sakunga.
Prakash--'ek hi jhatke men faisla. Zille-ilahi...' maza aa gaya parh ke, ek
line men aisa visphotak mazaq!
2010/8/16 shashi kant <shashikanthindi at gmail.com>
> "किसान विरोधी है फिल्म पीपली लाइव<http://shashikanthindi.blogspot.com/2010/08/blog-post_16.html>
> "
>
> <http://2.bp.blogspot.com/_TJ6Vb3l55wM/TGg2_J_nT9I/AAAAAAAACXo/fcNyjJDQnh4/s1600/Peepli+Live+%282010%29.jpg>
>
> " पीपली लाइव" फिल्म में दिखाया गया है कि पैसे की खातिर किसान आत्महत्या करते
> हैं. यह सरासर ग़लत है. लगातार फसल खराब होने और बैंक के क़र्ज़ न चुका पाने की
> वजह से मज़बूर होकर किसान आत्महत्या कर रहे हैं..." आत्महत्या करनेवाले एक
> किसान की बेवा ने कैमरे के सामने कहा.
>
> विदर्भ में पंद्रह अगस्त, रविवार को आमिर ख़ान के विरोध में हज़ारों किसानों
> ने प्रदर्शन किया.
>
> आत्महत्या करनेवाले किसानों की विधवाओं, उनके अनाथ बच्चों और उनके परिवार के
> सदस्यों ने आज आमिर ख़ान का पुतला फूँका.
>
> ये क्या कर दिया आपने आमिर भाई, अनूषा जी और महमूद भाई?
>
> एक लाख रुपये की खातिर किसान आत्महत्या करते हैं?
>
> एक ग़रीब किसान का भाई ही पैसे के लोभ में अपने भाई को आत्महत्या करने के लिए
> बाध्य करता है?
>
> भाई-बहन, वाकई आपने ये सब यदि फिल्म में दिखाया है तो भयानक है.
>
> आपकी यह फिल्म पूरी तरह किसान विरोधी है.
>
> अरे, आप दिल्ली, बम्बई वाले क्या जानें किसानों को?
>
> नहीं कुछ तो यह फिल्म बनाने से पहले प्रेमचंद की "पूस की रात" कहानी ही पढ़
> लेते.
>
> आपलोगों ने सारा मज़ा किरकिरा कर दिया.
>
> हिन्दुस्तान के किसान ईश्वर, खुदा, जीसस या कहें वाहे गुरु होते हैं. किसानों
> को अमूमन मुनाफ़ा नहीं होता. वे नो प्रॉफिट नो लौस पर खेती करते हैं.
>
> जो फसल उपजाते हैं, उसे खुद नही खाते, गाय-भैंस पोसते हैं लेकिन सारा दूध बेच
> देते हैं,ना खुद खाते ना अपने मासूम बच्चों को खिलाते हैं, मज़बूरन.
>
> (मैं बिहार के एक किसान परिवार से हूँ और मेरे तीनों बड़े भाई खेती करते है.
> उन तीनों की सालाना आमदनी से ज़्यादा अकेली मेरीसालाना आमदनी है. जबकि मेरे पास
> दिल्ली में कोई नौकरी नहीं है, फ्रीलांसिंग करता हूँ.)
>
> ..और ऐसे किसानों का आपने अपनी "पीपली लाइव" फिल्म में मज़ाक उड़ाया है?
>
> आपलोगों ने ठीक से होमवर्क नहीं किया.यह अच्छी बात नहीं है आमिर भाई, अनूषा
> रिज़वी और महमूद फारूकी जी.
>
> माफ़ कीजिएगा.
>
> -शशिकांत
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