[दीवान]संपादकों को प्रधानमंत्री का प्रवक्ता नहीं बनना चाहिए- उदय सिन्हा

brajesh kumar jha jha.brajeshkumar at gmail.com
Mon Jul 11 13:23:45 IST 2011


*संपादकों को प्रधानमंत्री का प्रवक्ता नहीं बनना चाहिए- उदय सिन्हा (**हैड
चैनल वन)*

संपादक जब प्रधानमंत्री से मिलकर बाहर आये तो ऐसा बिलकुल नहीं लगा कि संपादक
बोल रहे हैं। तब ऐसा लग रहा था कि प्रधानमंत्री के प्रवक्ता बोल रहे हैं।
हालांकि, यह तो नहीं कहा जा सकता है कि वह सरकार के प्रवक्ता की तरह बोल रहे
थे, लेकिन कुमार केतकर जी और आलोक मेहता जी दोनों प्रधानमंत्री के प्रवक्ता की
तरह जरूर बोल रहे थे। वे कह रहे थे कि प्रधानमंत्रीजी ऐसा चाहते हैं, पीएम यह
चाहते हैं, आदि-आदि। मुझे ऐसा लगता है कि पीएम के प्रवक्ता की भूमिका संपादकों
को नहीं निभानी चाहिए थी। यह भी महसूस होता है जैसे प्रधानमंत्री कार्यालय ने
या प्रधानमंत्री ने पत्रकारों के विरोध में ही कुछ पत्रकारों को खड़ा किया, ताकी
कुछ लोग सरकार का पक्ष रखें और उसको आगे फैलाएं।


यह सच है कि किसी वरिष्ठ पत्रकार को मीडिया में इस तरह बोलना शोभा नहीं देता
है, लेकिन अगर हम इससे पत्रकारिता की छवि का आंकलन करने लगेंगे तो गलत होगा,
क्योंकि पत्रकारिता तो एक व्यापक शब्द है। किसी एक घटना से पत्रकारिता की छवि न
तो खराब होती है, न ही सुधरती है। पत्रकारिता की छवि पर असर तो किसी सिलसिलेवार
घटना के बाद ही होता है। पर हां प्रधानमंत्री के प्रवक्ता के तौर पर बात कर के
इन लोगों ने संपादकों की गरिमा को जरूर घूमिल करने का काम किया है। इससे
पत्रकारिता की छवि घूमिल नहीं हुई है। हां, उसका उद्देश्य क्रिया-कलाप जो
उन्हें करना चाहिए था, यह निश्चित तौर पर नहीं हुआ। आखिर पत्रकारिता का तो काम
ही है कि वह सरकार की कमियों को बताए। सरकार के पक्ष की बातें बताना पत्रकार का
काम नहीं होता। यह भूमिका उलट होनी चाहिए थी। उन्हें प्रधानमंत्री को यह बात
बताना चाहिए था कि जनता के मन में ये बातें हैं तो शायद ज्यादा बेहतर होता।


एक और महत्वपूर्ण बात है। वह यह कि प्रधानमंत्री पांच संपादकों से मिले। पांच
में से सिर्फ दो ही संपादकों को मीडिया से बात करते हुए देख गया। एक कुमार
केतकर और दूसरे आलोक मेहता। अब यह बात समझने वाली है कि क्या इन पांचो संपादकों
ने मिलकर इन दोनों को अपना प्रवक्ता नियुक्त किया था कि वे दोनों सबों की ओर से
बात करेंगे। या फिर यह प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से कहा गया था कि ये दो
संपादक ही बाहर जाकर मीडिया से बात करेंगे। वैसे आमतौर पर ऐसी ब्रिफिंग
प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार का काम है, किसी संपादक का नहीं। इस पर भी
चर्चा होनी चाहिए की यह भूमिका किसने तय की? यदि प्रधानमंत्री कार्यालय से यह
भूमिका तय हुई है तो निश्चित रूप से जानिए की वह प्रधानमंत्री के प्रवक्ता के
तौर पर बोल रहे थे।


प्रथम प्रवक्ता
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