[दीवान]फेसबुक अपडेटः ए.के. हंगल साहब को लेकर

vineet kumar vineetdu at gmail.com
Mon Apr 23 17:20:16 IST 2012


97 साल के ए.के. हंगल साहब ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की सदस्यता रिन्यू
करायी है. सन् 1942 से ही इस पार्टी से जुड़े रहे हंगल साहब की शेल्फ में पड़े
मार्क्सवादी साहित्य के पन्ने भले ही पीले पड़ गए हों लेकिन चेहरे पर फिर से
चमक आ गयी है. उन्हें इस पार्टी पर अब भी उतना ही भरोसा और उम्मीदें हैं. इन
दिनों देश में कम्युनिस्ट पार्टी को लेकर मंथन और विश्लेषण का दौर कुछ ज्यादा
ही स्पीड से जारी है. पत्रिकाओं और अखबारों में धुंआधार स्पेशल और कवर स्टोरी
आ रही है. धुंधाधार पैनल डिस्कशन हो रहे हैं. शुभप्रसन्ना ( ममता बनर्जी के
समर्थक) की बनायी पेंटिंग "द लास्ट सपर" में पार्टी मृत्युशय्या पर पड़ी है और
दिग्गज नेता भोज के लिए बैठे हैं....कम्युनिस्ट होने को लेकर अक्सर मजाक किया
जाता है- अगर आप 25 साल की उम्र तक कम्युनिस्ट नहीं हैं तो आपका जीवन बेकार है
और अगर आप उसके बाद भी रह गए तो जीवन पहले से भी बेकार है. इन सबके बीच क्या
कॉमरेड हंगल साहब की उस भावना, संवेदना की उस जमीन की तलाश नहीं करनी चाहिए
जहां 97 साल का एक अभिनेता, वॉलीवुड की चमकीली दुनिया के बीच जीते हुए भी मरना
कॉमरेड (वाकायदा पार्टी मेंबर) होकर ही चाहता है ? बेहतर हो कि चैनल, पैनल
डिस्कशन और पार्टी के महंतों की बकबक की जगह कॉमरेड हंगल की इस भावना पर आधे
घंटे की स्टोरी प्रसारित करे.
http://www.openthemagazine.com/shorts/smallworld/2012-04-21
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