[दीवान]एक तीर से दो निशाना.
Ashish Kumar 'Anshu'
ashishkumaranshu at gmail.com
Sat Oct 6 14:53:15 IST 2012
हिंदी में दो प्रसिद्द कहावतें हैं, एक सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे, और
दूसरी एक तीर से दो निशाना. रॉबर्ट बाड्रा के मामले में यह दोनों कहावते सच
हुई हैं. पहली कहावत कांग्रेस के लिए और दूसरी अरविन्द केजरीवाल के लिए.
बाड्रा राजनितिक मैदान में उतरने के लिए तैयारी कर रहे थे और यह बात जग जाहिर
है कि कांग्रेस आलाकमान इसके लिए तैयार नहीं थी, इस तरह अरविन्द का आरोप
कांग्रेस आलाकमान के लिए 'सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे' जैसा है. इस
आरोप के बाद अब लम्बे समय तक बाड्रा राजनीत
ि में आने की नहीं सोचेगे. 'एक तीर से दो निशाना' अरविन्द ने लगाया. पहला
कांग्रेस आलाकमान को खुश किया. दूसरा बीजेपी को क्योंकि बाड्रा पर सवाल यदि
बीजेपी उठाती तो फ़ौरन कांग्रेस बीजेपी के दमाद को निशाने पर ले आती. फिर पूरी
कहानी दमाद बनाम दमाद की हो जाती. वैसे आप सबकी जानकारी के लिए दोनों दमादों
की आपस में खूब बनती है. मुझे संदेह है, टीम केजरीवाल अगला खुलासा रंजन का ही
तो नहीं करने वाली?
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