[दीवान]शायद जी न्यूज के बिजनेस हेड और संपादक सुधीर चौधरी ब्लैकमेलर साबित हों
vineet kumar
vineetdu at gmail.com
Mon Oct 8 20:58:07 IST 2012
[image: Photo: शायद जी न्यूज के बिजनेस हेड और संपादक सुधीर चौधरी आखिर में
मीडियाकर्मी नहीं दलाल और ब्लैकमेलर ही साबित हों. मीडिया हलकों में ये खबर
जोर पर है कि नवीन जिंदल ने सुधीर चौधरी के खिलाफ खबर को लेकर ब्लैकमेलिंग किए
जाने के मामले में एफआइआर दर्ज कराया है. नवीन जिंदल ने रिपोर्ट में आरोप
लगाया है कि जी बिजनेस ने कोल ब्लॉक आबंटन मामले में खबर दिखाए जाने के मामले
को लेकर ब्लैकमेलिंग कर रहा था और इसकी कीमत करोड़ों में थी. जाहिर है ये सब
सुधीर चौधरी के इशारे के बिना संभव नहीं है. इससे पहले भी सुधीर चौधरी की
ट्रैक रिकार्ड सही नहीं रही है. पिछले साफ जब मीडिया में भ्रष्टाचार सिन्ड्रोम
उफान पर था और कई चैनल देश के दस रावण दिखा रहे थे, उस दौरान मीडियाखबर ने
मीडिया के दस रावण की सीरिज चलायी थी, उनमें एक रावण सुधीर चौधरी भी थे. लाइव
इंडिया में उमा खुराना फर्जी स्टिंग ऑपरेशन मामले में सबकुछ जानने के बावजूद
उन्होंने जिस तरह पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया था, वो किसी भी हाल में भरोसा
करने लायक नहीं था कि एक चैनल के सीइओ को ये पता ही न हो कि उसका रिपोर्टर जिस
स्टोरी को आधे दिन तक एक्सक्लूसिव बताकर दिखाता रहा, चैनल खेलता रहा, वो
स्टोरी प्लांटेड या फर्जी है. तब सुधीर चौधरी ने कहा था कि रिपोर्टर ने उसे
अंधेरे में रखा. संभव है कि इस मामले में भी वो यही दलील दें. आपको जानकर
हैरानी होगी कि ऐसे दागदार संपादक न केवल तरक्की करते रहे बल्कि उस बीइए(
ब्रॉजकास्टर्स एडिटर एसोसिएशन) के कोषाध्यक्ष बने रहे हैं जो अपने को सेल्फ
रेगुलेशन के जरिए चैनलों को दुरुस्त करने के दावे करता आया है. इसमे कोई
हैरानी नहीं कि इस मामले में भी सुधीर चौधरी पूरी तरह पल्ला झाड़ने की कोशिश
करें. लेकिन क्या ये संभव है कि करोड़ों रुपये की दलाली रिपोर्टर,स्ट्रिंगर या
विशेष संवाददाता डकार जाए और कुर्सी गर्म करनेवाला बिजनेस हेड ताड़ के पंखे
झलता रह जाए ? कटेगा तो सबमे बंटेगा के सिद्धांत पर काम करनेवाले मीडिया को
लेकर ऐसा यकीन करना मासूमियत से ज्यादा कुछ नहीं है. मेरी अपनी समझ है कि ये
कोई पहला मामला नहीं रहा होगा कि खबर के लिए इस तरह से ब्लैकमेलिंग और दलाली
के लिए पैसे की मांग की गई हो और न ही कार्पोरेट इतना दूध का धुला है कि इसे
सामने लाने का काम करता रहा है..बस ये है कि कई बार धनपशु और कार्पोरेट भी
सिस्टम और मीडिया का पेट भरते-भरते उकता जाते हैं और तब लगता है कि जो करना है
करो लेकिन अब बहुत हो गया. जिंदल का मामला भी शायद इसी तरह का हो..सामान्य
तरीके से जो लोग इस तरह के मामले को मीडिया भ्रष्टाचार करार देते हैं, दुखद
लेकिन सच्चाई है कि यही मीडिया का बिजनेस पैटर्न है..बस ये है कि जिसके बारे
में हम जान पाते हैं तो थोड़े वक्त के लिए हाय-तौबा मचाते हैं और फिर रुटीन की
नट-बोल्ट में फिट हो जाते हैं.
http://mediakhabar.com/media-khabar/media-gossip/4473-zee-news-sudhir-chaudhri.html]शायद
जी न्यूज के बिजनेस हेड और संपादक सुधीर चौधरी आखिर में मीडियाकर्मी नहीं दलाल
और ब्लैकमेलर ही साबित हों. मीडिया हलकों में ये खबर जोर पर है कि नवीन जिंदल
ने सुधीर चौधरी के खिलाफ खबर को लेकर ब्लैकमेलिंग किए जाने के मामले में
एफआइआर दर्ज कराया है. नवीन जिंदल ने रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि जी बिजनेस
ने कोल ब्लॉक आबंटन मामले में खबर दिखाए जाने के मामले को लेकर ब्लैकमेलिंग कर
रहा था और इसकी कीमत करोड़ों में थी. जाहिर है ये सब सुधीर चौधरी के इशारे के
बिना संभव नहीं है.
इससे पहले भी सुधीर चौधरी की ट्रैक रिकार्ड सही नहीं रही है. पिछले साफ जब
मीडिया में भ्रष्टाचार सिन्ड्रोम उफान पर था और कई चैनल देश के दस रावण दिखा
रहे थे, उस दौरान मीडियाखबर ने मीडिया के दस रावण की सीरिज चलायी थी, उनमें एक
रावण सुधीर चौधरी भी थे. लाइव इंडिया में उमा खुराना फर्जी स्टिंग ऑपरेशन
मामले में सबकुछ जानने के बावजूद उन्होंने जिस तरह पूरे मामले से पल्ला झाड़
लिया था, वो किसी भी हाल में भरोसा करने लायक नहीं था कि एक चैनल के सीइओ को
ये पता ही न हो कि उसका रिपोर्टर जिस स्टोरी को आ
धे दिन तक एक्सक्लूसिव बताकर दिखाता रहा, चैनल खेलता रहा, वो स्टोरी प्लांटेड
या फर्जी है. तब सुधीर चौधरी ने कहा था कि रिपोर्टर ने उसे अंधेरे में रखा.
संभव है कि इस मामले में भी वो यही दलील दें. आपको जानकर हैरानी होगी कि ऐसे
दागदार संपादक न केवल तरक्की करते रहे बल्कि उस बीइए( ब्रॉजकास्टर्स एडिटर
एसोसिएशन) के कोषाध्यक्ष बने रहे हैं जो अपने को सेल्फ रेगुलेशन के जरिए
चैनलों को दुरुस्त करने के दावे करता आया है. इसमे कोई हैरानी नहीं कि इस
मामले में भी सुधीर चौधरी पूरी तरह पल्ला झाड़ने की कोशिश करें. लेकिन
क्या ये संभव है कि करोड़ों रुपये की दलाली रिपोर्टर,स्ट्रिंगर या विशेष
संवाददाता डकार जाए और कुर्सी गर्म करनेवाला बिजनेस हेड ताड़ के पंखे झलता रह
जाए ? कटेगा तो सबमे बंटेगा के सिद्धांत पर काम करनेवाले मीडिया को लेकर ऐसा
यकीन करना मासूमियत से ज्यादा कुछ नहीं है. मेरी अपनी समझ है कि ये कोई पहला
मामला नहीं रहा होगा कि खबर के लिए इस तरह से ब्लैकमेलिंग और दलाली के लिए
पैसे की मांग की गई हो और न ही कार्पोरेट इतना दूध का धुला है कि इसे सामने
लाने का काम करता रहा है..बस ये है कि कई बार धनपशु और कार्पोरेट भी सिस्टम और
मीडिया का पेट भरते-भरते उकता जाते हैं और तब लगता है कि जो करना है करो लेकिन
अब बहुत हो गया. जिंदल का मामला भी शायद इसी तरह का हो..सामान्य तरीके से जो
लोग इस तरह के मामले को मीडिया भ्रष्टाचार करार देते हैं, दुखद लेकिन सच्चाई
है कि यही मीडिया का बिजनेस पैटर्न है..बस ये है कि जिसके बारे में हम जान
पाते हैं तो थोड़े वक्त के लिए हाय-तौबा मचाते हैं और फिर रुटीन की नट-बोल्ट
में फिट हो जाते हैं. http://mediakhabar.com/media-khabar/media-gossip/
4473-zee-news-sudhir-chaudhri.html
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