[दीवान]डॉ हरीश अरोड़ा करेंगे मुझ पर कानूनी कार्रवाई
vineet kumar
vineetdu at gmail.com
Sat Aug 17 11:46:55 CDT 2013
इतने सख्त तो कभी कोई मीडियाकर्मी भी नहीं हुए जितने कि मेरी एक टिप्पणी को
लेकर मीडिया पर पाठ्यक्रम आधारित पुस्तकें लिखनेवाले लेखक डॉ. हरीश अरोड़ा(
https://www.facebook.com/pages/Dr-Harish-Arora/274312062605726). उन्होंने
स्पष्ट लिखा है कि हमने उनकी किताब को लेकर जो टिप्पणी की है, उसे तत्काल
फेसबुक वॉल से हटाएं नहीं तो वो कानूनी कार्रवाई करेंगे. लिहाजा, हम अपने इस
कुकृत्य के लिए( हालांकि वर्चुअल स्पेस में ये स्वाभाविक है) सार्वजनिक रुप से
माफी मांगते है. हमारी लड़ाई, हमारा प्रतिरोध फिलहाल पाठ्यक्रम आधारित
पुस्तकों में लिखी जा रही सामग्री के बहाने इस बड़े मुद्दे को पर्सनल किए जाने
तक नहीं है. हम उस व्यापक संदर्भ से जुड़े रहेंगे जिसने पूरी इन्डस्ट्री को
हिलाकर रख दिया है. ताकि सनद रहे इसलिए डॉ. हरीश अरोड़ा के शब्द आपके लिए-
मिस्टर विनीत, आपने जिस तरह से रूपचंद (रूपचंद गौतम),मानस (मुकेश मानस) और मुझ
पर प्रत्यक्ष रूप से दुग्गी रचनाकार और न जाने कितने अनर्गल आरोप लगाये हैं
उनसे मुझे व्यक्तिगत रूप से मानसिक आघात लगा. चंद शब्दों के जाल बुनकर आप
अंतरजाल की इस दुनिया में जो भ्रम फैला रहे हैं उसकी भाषा स्पष्ट रूप से
मानहानि की श्रेणी में आती है. आपकी जानकारी के लिए यह स्पष्ट कर दूँ कि मैं
विधि स्नातक भी हूँ और विनीत कुमार कौन होता है पुस्तकों के मापदंड तय करने
वाला ? यदि आपने तुरंत इस टिपण्णी फेसबुक से नहीं हटाया और इस टिपण्णी का
सन्दर्भ देते हुए फेसबुक पर सार्वजनिक रूप से माफ़ी नहीं मांगी तो मुझे आपके
विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.
मेरे जिन पाठकों ने मुझे आपकी इस पोस्ट की जानकारी दी वे भी मेरे इस सार्वजनिक
अपमान से आहत हैं. इसलिए मुझे उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आपकी इस
टिपण्णी का उत्तर देना पढ़ रहा है.
मैंने जो टिप्पणी की थी-
देशभर के मीडिया संस्थान जिन्होंने अपने पाठ्यक्रम में पत्रकारिता,मूल्य,
मानवता, नैतिकता, सामाजिक विकास में धूप-अक्षत की तरह चिपकाकर रुपचंद मानस और
हरीश अरोड़ा जैसे दर्जनों टंकणकारों के दुग्गी( अशोक प्रकाशन को कैंपस में
दुग्गी कहते हैं) के लिए विशाल मार्केट तैयार का परिवेश रचते हैं, उन्हें
पाठ्यक्रम में एक पेपर अनिवार्य रुप से एस्ट्रेस मैनेजमेंट शामिल करने चाहिए.
वो इस पेपर के जरिए समझ सकेंगे कि जब बच्चा बीमार हो, पत्नी एक्सपेक्टेड हो,
शादी होनेवाली हो, मां-बाबूजी कुछ दिन रहने साथ आनेवाले हों और इस बीच नौकरी
चली जाए तो क्या करें ? माफ कीजिएगा, मैं गांधी, सोल,माइंड,हर्ट,पीस से अलग एक
पेपर की बात कर रहा हूं.
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