[दीवान]Fwd: उठाए जा रहे अभिव्यक्ति के खतरे

Ravikant ravikant at sarai.net
Mon Aug 19 06:43:45 CDT 2013


---------- Forwarded message ----------
From: reyaz-ul-haque <beingred at gmail.com>
Date: 2013/8/19
Subject: उठाए जा रहे अभिव्यक्ति के खतरे
To: alok putul <alokputul at gmail.com>


यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस समूचे घटनाक्रम में कँवल भारती के रूप में एक ऐसे
धर्मनिरपेक्ष और वाम चेतना से लैस अम्बेदकरवादी बुद्धिजीवी की घेरेबंदी की गयी
है जिसकी दलित विमर्श में एक हस्तक्षेपकारी भूमिका रही है. संकीर्ण राजनीतिक
नजरिये से दूर कँवल भारती ने ‘कांशीराम के दो चेहरे’ सरीखी पुस्तक तब लिखी थी
जब मायावती का शासन था और वे स्वयं राजकीय सेवा में थे. अपनी एक दर्ज़न से
अधिक पुस्तकों में उन्होंने वर्णाश्रमी ब्राह्मणवाद का क्रिटीक रचते हुए एक
समतावादी समाज का विकल्प प्रस्तावित किया है. उन्होंने अपने लेखन में दलित
अतिवाद का भी विरोध किया है. यही कारण है कि समूचा बुद्धिजीवी समाज आज उनके
पक्ष में एकजुट है. सोशल मीडिया पर भी उनके पक्ष में व्यापक एकजुटता देखने को
मिल रही है. मानवाधिकार कार्यकताओं ने भी इस मसले पर मानवाधिकार आयोग के
हस्तक्षेप की मांग की है.

उठाए जा रहे अभिव्यक्ति के
खतरे<http://hashiya.blogspot.in/2013/08/blog-post_19.html>
-------------- next part --------------
An HTML attachment was scrubbed...
URL: <http://mail.sarai.net/pipermail/deewan_mail.sarai.net/attachments/20130819/8b2ae657/attachment.html>


More information about the Deewan mailing list