[दीवान] post
amitesh kumar
amitesh0 at gmail.com
Thu Jan 3 01:21:22 IST 2013
साल का अंत एक दुखद नोट के साथ हो रहा है लेकिन उम्मीदों के चराग गलियों में
रोशन हो रहें है. दिल्ली के जंतर मंतर और दुर्भेध बना दिया गए इंडिया गेट के
अलावा मोहल्लों और देश के अन्य शहरों में भी. साल बीतते बीतते वर्ष की
उपलब्धियों, कमियों, क्षतियों इत्यादि की गिनती प्रारंभ हो गई है. किताबे
कितनी छपी, कौन अच्छी रही, सिनेमा कौन से आये उनमें पसदिंदा कौन सी रही, बेहतर
अभिनेता –अभिनेत्री कौन रहे? किस फ़िल्म की कमाई कितनी रही, गुणवत्ता कितनी
रही? साल के टाप गीत कौन से हैं? चर्चित चेहरे? सबसे ज्यादा रन किसने बनाए ,
विकेट किसने लिये, मैच कितने जीते, कितने हारे? इत्यादि इत्यादि. कई सालों से
यह प्रचलन देख रहा हूं लेकिन रंगमंच की खबर लेते किसी को नहीं देखा. वैसे
भी रंगमंच एक व्यापक समाज की कला रहते हुए भी विशिष्ट समाज की कला बनते जा रहा
है. टेलीविजन, सिनेमा, क्रिकेट, की चकाचौंध में रंगमंच की सुधि कौन लेता
इसलिये दर्शक उससे दूर गये. लेकिन पिछले कुछ सालों में रंगमंच में दर्शक लौट
रहें हैं. सिनेमा और टेलीविजन की एकरसता से ऊब कर मनोरंजन की स्वस्थ भूख
मिटाने की इच्छा रखने वालों ने रंगमंच की तरफ़ कदम बढ़ाया है. प्रस्तुतियां
दर्शकों की मोहताज नहीं रहीं. भव्य प्रस्तुतियों में जहां दर्शक उमड़ पड़ते हैं
वहीं कम प्रचारित प्रस्तुतियों में भी दर्शक रहते हैं. पिछले कुछ भारंगमों में
भी देखा गया है कि टिकट काउंटर खुलते ही नाटकों के टिकट बिक जाते हैं. फ़िर भी
हिंदी समाज का ध्यान इस तरफ़ नहीं है. अपनी रुचि से कुछ् लोग अवश्य नाटक देखते
रहते हैं. वैसे रंगमंच ही क्यों हिंदी साहित्य से जुड़े समाज की रूचि कला जगत
की ही ओर कम है. संगीत की सभाओं में या दृश्य कलाओं की प्रदर्शनी में कहां
देखा जाता है इन्हें इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि उस पर लिखने
वाले लोग कितने हैं? वैसे यह अकाल हमारे दौर का है. खैर रंगमंच का नियमित
दर्शक होने के नाते और उस पर लिखते पढ़ते रहने वाले की हैसियत से मैं एक पहल
करने की कोशिश कर रहा हूं. इस साल देखी गई दस बेहतर प्रस्तुतियों को छांटने
का. इस चयन में मूल्य निर्णय की अपेक्षा एक दर्शक की रुचि और रीडर के तर्क का
द्वंद्व है. और इस कार्य की प्रेरणा दिनमान पत्रिका से मिली जिसकी फ़ाइलों को
पलटते हुए मैंने नियमित रूप से वर्षांत के अंकों में रंगमंच के लेखाजोखा को
छपा हुआ देखा।
स्पाटलाईट- "दस प्रस्तुतियां बीते वर्ष
की"<http://rangwimarsh.blogspot.in/2013/01/blog-post.html>
--
Amitesh
+91-9990366404
www.pratipakshi.blogspot.com
www.rangwimarsh.blogspot.com
me on facebook https://www.facebook.com/amitesh.monu<https://www.facebook.com/amitesh.monu>
on twitter https://twitter.com/amitesh0 <https://twitter.com/amitesh0>
-------------- next part --------------
An HTML attachment was scrubbed...
URL: <http://mail.sarai.net/pipermail/deewan/attachments/20130103/d4fbbecf/attachment.html>
More information about the Deewan
mailing list